उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में पठन संस्कृति (Reading Culture) को मजबूत करने के लिए जारी शासनादेश, उद्देश्य, निर्देश, लाभ, गतिविधियाँ और MCQ सहित पूरी जानकारी पढ़ें।
Table of Contents
🔶 प्रदेश के विद्यालयों में पठन संस्कृति (Reading Culture) को सुदृढ़ करने के निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के समस्त परिषदीय, सहायता प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में पठन संस्कृति (Reading Culture) को सुदृढ़ करने हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की पठन आदतों (Reading Habits) को विकसित करना तथा डिजिटल स्क्रीन टाइम (Screen Time) को कम करना है।
🔶 शासनादेश का उद्देश्य
विद्यालयी शिक्षा में समाचार पत्र, पुस्तकें एवं अन्य पठन सामग्री को अनिवार्य बनाकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना।
🔶 पठन संस्कृति से होने वाले प्रमुख लाभ
📌 1. सामान्य ज्ञान एवं समसामयिक समझ
समाचार पत्र पढ़ने से विद्यार्थियों का General Knowledge और Current Affairs मजबूत होता है।
📌 2. भाषा एवं शब्दावली विकास
नियमित पठन से विद्यार्थियों की Vocabulary, भाषा-शैली और लेखन क्षमता का विकास होता है।
📌 3. आलोचनात्मक एवं तार्किक सोच
समाचार, संपादकीय और लेख पढ़ने से Critical Thinking और Logical Reasoning विकसित होती है।
📌 4. एकाग्रता एवं फोकस में वृद्धि
डिजिटल माध्यमों की तुलना में मुद्रित पठन सामग्री से विद्यार्थियों की Focus Power बढ़ती है।
📌 5. सामाजिक जागरूकता एवं संवेदनशीलता
समाचारों के माध्यम से विद्यार्थी समाज, लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारियों को समझते हैं।
📌 6. समस्या समाधान क्षमता
पहेलियाँ, सुडोकू और क्रॉसवर्ड से Problem Solving Skills विकसित होती हैं।
🔶 विद्यालयों में लागू की जाने वाली प्रमुख गतिविधियाँ
🔹 प्रार्थना सभा में पठन
Morning Assembly में छात्रों द्वारा समाचारों का वाचन।
🔹 Thought of the Day
दैनिक समाचार आधारित विचार प्रस्तुत करना।
🔹 पुस्तकालय में समाचार पत्र उपलब्धता
हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समाचार पत्र अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना।
🔹 समूह चर्चा (Group Discussion)
कक्षा 9 से 12 तक सप्ताह में एक बार संपादकीय विषयों पर चर्चा।
🔹 समाचार पत्र कटिंग संग्रह
कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों द्वारा विषयवार कटिंग फाइल तैयार करना।
🔹 साप्ताहिक पहेली गतिविधि
Crossword, Sudoku जैसी गतिविधियों का आयोजन।

🔶 विद्यालयों एवं अधिकारियों की जिम्मेदारी
- शासनादेश का पूर्ण अनुपालन
- विद्यालय स्तर पर सतत निगरानी
- विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करना
- गतिविधियों का दस्तावेजीकरण
🔶 निष्कर्ष
पठन संस्कृति (Reading Culture) को बढ़ावा देना न केवल शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने का माध्यम है, बल्कि यह विद्यार्थियों को जिम्मेदार, जागरूक और संवेदनशील नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
🔗 External Links (Authority + SEO Friendly)
🔹 1. शिक्षा मंत्रालय (भारत सरकार)
Anchor Text: शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
Link: https://www.education.gov.in
Use: सरकारी शिक्षा नीतियों और कार्यक्रमों के संदर्भ के लिए
ऑल्सो रीड : Three children die after consuming Kaner (oleander) fruit: कनेर फल खाने से तीन बच्चों की मौत
🔹 2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020)
Anchor Text: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
Link: https://www.education.gov.in/nep/about-nep
Use: पठन संस्कृति को NEP 2020 से जोड़ने के लिए
🔹 3. NCERT – Reading & Learning Resources
Anchor Text: NCERT शैक्षिक संसाधन
Link: https://ncert.nic.in
Use: विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने के संदर्भ में
🔹 4. DIKSHA Portal
Anchor Text: DIKSHA डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म
Link: https://diksha.gov.in
Use: डिजिटल व ऑफलाइन पठन सामग्री का संतुलन दिखाने के लिए
🔹 5. UNICEF – Reading & Literacy
Anchor Text: UNICEF Literacy and Education
Link: https://www.unicef.org/education/literacy
Use: पठन संस्कृति के वैश्विक महत्व को दर्शाने हेतु
🔷 MCQ (Multiple Choice Questions)
Q1. पठन संस्कृति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. केवल परीक्षा की तैयारी
B. स्क्रीन टाइम बढ़ाना
C. पढ़ने की आदत विकसित करना ✅
D. मनोरंजन
Q2. समाचार पत्र पढ़ने से कौन-सा गुण विकसित होता है?
A. आलस्य
B. आलोचनात्मक सोच ✅
C. तनाव
D. भ्रम
Q3. किस गतिविधि से समस्या समाधान क्षमता बढ़ती है?
A. वीडियो देखना
B. सोशल मीडिया
C. Crossword/Sudoku ✅
D. गेमिंग
Q4. समूह चर्चा किस कक्षा के लिए अनिवार्य है?
A. कक्षा 1-5
B. कक्षा 6-8
C. कक्षा 9-12 ✅
D. सभी















