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Help desk facility for hearing in SIR: एसआईआर में सुनवाई के लिए हेल्प डेस्क की सुविधा

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Help desk facility for hearing in SIR: एसआईआर में सुनवाई के लिए हेल्प डेस्क की सुविधा

 SIR

SIR:

♡•☆𝘳ℯᵃ₫Եⲏĩ𝐬♡•☆: Logical discrepancies Special : माता पिता की उम्र मे अंतर या दादा दादी नाना नानी के उम्र मे अंतर के कारण आई तार्किक गड़बड़ का पूरा है सोल्यूशंस इस पोस्ट मे |

लखनऊ, मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा नेएसआईआर) में दी गई नोटिसों की सुनवाई के लिए हेल्प डेस्क की सुविधा देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह निर्देश दिए।

समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित आलेख्य मतदाता सूची में शामिल हैं, लेकिन वर्ष 2003 की मतदाता सूची का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है, ऐसे लगभग 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी कर नियत तिथि पर सुनवाई की जा रही है।

इसके अतिरिक्त, तार्किक विसंगतियों के कारण लगभग 2.22 करोड़ मतदाताओं को भी नोटिस जारी कर सुनवाई की जा रही है। हेल्प डेस्क ऐसे स्थल पर स्थापित हो जिससे सुनवाई के लिए आने वाले लोगों की नजर सहजता से उस पर पड़ जाए। डेस्क पर हेल्प डेस्क लिखा हुआ बैनर भी लगाया जाए।

SIR:

हेल्प डेस्क पर जिला व राज्य स्तरीय कॉन्टैक्ट सेंटर के टोल-फ्री नंबर प्रदर्शित किए जाएं। साथ ही जिला स्तर पर स्थापित डिस्ट्रिक्ट कॉल सेंटर की हेल्प लाइन से संबंधित टेलीफोन लाइनों को पूर्ण रूप से क्रियाशील रखा जाए, काल सेंटर पर विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की प्रक्रियाओं से भिज्ञ कर्मचारी लगाए जाएं, ताकि हेल्प लाइन नंबर पर दूरभाष के माध्यम से जनता से प्राप्त शिकायतों का त्वरित समाधान किया जा सके।

 SIR

SIR:

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने समस्त निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों व सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्देशित किया कि जारी नोटिसों की सुनवाई तत्परता और सुचारु रूप से की जाए।

सभी अधिकारी सुनवाई के दिन नियत समय से उपस्थित रहें व सुनवाई के लिए उपस्थित होने वाले मतदाताओं के साथ शिष्ट व्यवहार अपनाया जाए। सुनवाई की तिथियां इस प्रकार निर्धारित की जाएं कि बीएलओ द्वारा नोटिस प्राप्त होने के उपरांत मतदाताओं को नियत तिथि पर उपस्थित होने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने समस्त रोल प्रेक्षकों व जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सुनवाई के लिए चयनित स्थलों का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करें। जहां भी किसी प्रकार की कमी पाई जाए, उसे तत्परता से दूर कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।

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