परिषदीय स्कूलों में इसी माह से शुरू होंगे बैगलेस डे, 22 अगस्त से होगी शुरुआत, देखें पूरा कैलेंडर

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परिषदीय स्कूलों में इसी माह से शुरू होंगे बैगलेस डे, 22 अगस्त से होगी शुरुआत, देखें पूरा कैलेंडर

परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ गतिविधियों और व्यावहारिक सीखने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में परिषदीय एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में बैगलेस डे शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल बैग और नियमित कक्षा की पढ़ाई से अलग गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर देना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए 10 बैगलेस डे का कैलेंडर जारी किया गया है। इन गतिविधियों की शुरुआत अगस्त महीने से होगी। कैलेंडर के अनुसार पहला बैगलेस डे 22 अगस्त 2026 को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग शनिवार को बच्चों के लिए अलग विषय और गतिविधियां निर्धारित की गई हैं।

22 अगस्त से शुरू होगा बैगलेस डे

बैगलेस डे के तहत बच्चों को उस दिन स्कूल बैग लेकर आने के बजाय अलग-अलग रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इसका मकसद बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक और गतिविधि आधारित बनाना है।

पोस्टर में दी गई जानकारी के मुताबिक, पहला बैगलेस डे 22 अगस्त 2026, शनिवार को होगा। इस दिन मिट्टी के खिलौने, स्थानीय शिल्पकार के साथ कौशल कार्यशाला तथा कला एवं शिल्प प्रदर्शनी जैसी गतिविधियां रखी गई हैं।

इसके बाद 29 अगस्त 2026 को औषधीय पौधों के उद्यान का विकास, कंपोस्ट वर्मी कंपोस्ट का निर्माण और विद्यालय किचन गार्डन बनाने जैसी गतिविधियों से बच्चों को जोड़ा जाएगा। इससे बच्चों को प्रकृति, पौधों और विद्यालय परिसर से जुड़ी गतिविधियों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

बैगलेस डे का कार्यक्रम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें बच्चों को अलग-अलग विषयों से जोड़ते हुए ऐसे कार्य कराए जाएंगे, जिनसे वे करके सीख सकें और अपनी रचनात्मक क्षमता का इस्तेमाल कर सकें।

देखें बैगलेस डे का पूरा कैलेंडर

शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए दिए गए कैलेंडर में अगस्त से नवंबर तक अलग-अलग गतिविधियां निर्धारित की गई हैं। इसमें प्रत्येक निर्धारित दिन के लिए अलग विषय रखा गया है।

22 अगस्त 2026: मिट्टी के खिलौने, स्थानीय शिल्पकार के साथ कौशल कार्यशाला तथा कला एवं शिल्प प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी।

29 अगस्त 2026: औषधीय पौधों के उद्यान का विकास, कंपोस्ट वर्मी कंपोस्ट का निर्माण और विद्यालय किचन गार्डन बनाने जैसी गतिविधियां होंगी।

12 सितंबर 2026: जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन से संबंधित गतिविधियों पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को पानी के महत्व और संरक्षण से जोड़ना है।

19 सितंबर 2026: स्वास्थ्य सुरक्षा एवं गुड टच-बैड टच की जानकारी से संबंधित गतिविधि रखी गई है।

26 सितंबर 2026: पतंग बनाने-उड़ाने, विज्ञान और स्टेम मॉडल प्रतियोगिता जैसी रचनात्मक गतिविधियां कराई जाएंगी।

3 अक्टूबर 2026: वित्तीय साक्षरता और मिनी बैंक से संबंधित गतिविधि निर्धारित है।

10 अक्टूबर 2026: गुड़िया व दृश्य रचनात्मक कार्यशाला तथा मिनी नाटक, जिसमें संगीत-नाटक आदि में से कोई एक गतिविधि शामिल होगी।

17 अक्टूबर 2026: फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी से संबंधित गतिविधियां होंगी।

24 अक्टूबर 2026: निर्माण स्थल एवं सार्वजनिक अवसंरचना के अध्ययन से जुड़ी गतिविधि निर्धारित की गई है।

31 अक्टूबर 2026: एआई, रोबोटिक्स और अन्य नई तकनीकों का ज्ञान बच्चों को दिया जाएगा।

इसके अलावा 14 नवंबर 2026 यानी बाल दिवस के अवसर पर बाल मेला आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। इस तरह अगस्त से नवंबर तक बच्चों को अलग-अलग विषयों और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।

बच्चों के लिए क्यों खास है बैगलेस डे?

गलेस डे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बच्चों को केवल किताबों और कॉपियों तक सीमित न रखकर अलग-अलग गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। ऐसे कार्यक्रमों में बच्चे कला, शिल्प, पर्यावरण, विज्ञान, तकनीक, स्वास्थ्य, वित्तीय समझ और रचनात्मक कार्यों से जुड़ सकते हैं।

22 अगस्त को मिट्टी के खिलौने और स्थानीय शिल्पकार के साथ कौशल कार्यशाला जैसी गतिविधि इसका उदाहरण है। इसी तरह किचन गार्डन, औषधीय पौधे और जल संरक्षण जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपने आसपास के वातावरण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

बैगलेस डे में बच्चों को अपनी रुचि और रचनात्मकता दिखाने का अवसर भी मिलता है। पतंग बनाना, विज्ञान एवं STEM मॉडल, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, नाटक और कला-शिल्प जैसी गतिविधियां बच्चों के लिए सामान्य कक्षा से अलग अनुभव प्रदान करती हैं।

कैलेंडर में नई तकनीक को भी जगह दी गई है। 31 अक्टूबर को एआई, रोबोटिक्स और अन्य नई तकनीकों का ज्ञान देने की गतिविधि रखी गई है। इससे साफ है कि बैगलेस डे के कार्यक्रम में पारंपरिक कला और स्थानीय गतिविधियों के साथ आधुनिक विषयों को भी शामिल किया गया है।

परिषदीय स्कूलों में बदलेगा सीखने का अंदाज

बैगलेस डे के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई के साथ व्यवहारिक ज्ञान देने पर जोर दिखाई देता है। निर्धारित गतिविधियों में स्थानीय शिल्प से लेकर पर्यावरण, स्वास्थ्य, वित्तीय साक्षरता और नई तकनीक तक अलग-अलग क्षेत्र शामिल हैं।

कैलेंडर में शामिल गतिविधियों को देखें तो बच्चों के लिए हर निर्धारित दिन कुछ नया करने और सीखने का अवसर रखा गया है। कहीं वे पौधों और जल संरक्षण से जुड़ेंगे तो कहीं कला, विज्ञान और तकनीक से। इसी तरह फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी जैसी गतिविधियां बच्चों की रचनात्मकता को सामने लाने का अवसर दे सकती हैं।

उपलब्ध पोस्टर में यह भी बताया गया है कि परिषदीय एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बैगलेस डे की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। यानी इसका उद्देश्य केवल एक वर्ग के बच्चों तक सीमित न रहकर संबंधित विद्यालयों के विद्यार्थियों को गतिविधि आधारित सीखने से जोड़ना है।

कुल मिलाकर, 22 अगस्त 2026 से शुरू होने वाला बैगलेस डे कार्यक्रम बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ सीखने का एक अलग अनुभव लेकर आएगा। अगस्त से नवंबर तक निर्धारित गतिविधियों में कला, शिल्प, पर्यावरण, स्वास्थ्य, विज्ञान, वित्तीय साक्षरता, फोटोग्राफी, तकनीक और अन्य विषयों को शामिल किया गया है। 14 नवंबर को बाल दिवस के अवसर पर बाल मेला भी आयोजित किया जाएगा। इससे बच्चों को स्कूल में पढ़ाई के साथ अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का अवसर मिलेगा।

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