PM E-Drive EV Subsidy 2026: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सब्सिडी में बड़ा बदलाव, योजना मार्च 2028 तक बढ़ी
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के लिए PM E-Drive Scheme से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली इस योजना की अवधि बढ़ाने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के लिए मिलने वाले इंसेंटिव में भी बदलाव किया है। अब इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर पहले की तुलना में कम इंसेंटिव मिलेगा।
सरकार ने PM E-Drive Scheme के लिए कुल बजट को भी बढ़ाया है। योजना का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति बढ़ाना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
PM E-Drive Scheme की अवधि मार्च 2028 तक बढ़ी
PM E-Drive Scheme की शुरुआत 29 सितंबर 2024 को की गई थी और इसे 1 अक्टूबर 2024 से लागू किया गया था। शुरुआत में योजना की अवधि 31 मार्च 2026 तक निर्धारित की गई थी। इसके लिए सरकार ने कुल ₹10,900 करोड़ का बजट निर्धारित किया था।
बाद में योजना की अवधि में बदलाव किए गए। अब सरकार ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के अनुसार PM E-Drive Scheme की समय-सीमा 31 मार्च 2028 तक बढ़ाई गई है, योजना में मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, ई-रिक्शा, ई-कार्ट और L5 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर जैसे वाहनों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत करने के लिए चार्जिंग स्टेशन और अन्य जरूरी EV इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की सब्सिडी में हुआ बदलाव
PM E-Drive Scheme में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के इंसेंटिव को लेकर किया गया है। पहले इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए ₹5,000 प्रति kWh की दर से इंसेंटिव दिया जा रहा था।
अब इस दर को घटाकर ₹2,500 प्रति kWh कर दिया गया है। इसका सीधा असर इलेक्ट्रिक स्कूटर और अन्य इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ेगा, पहले एक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर अधिकतम ₹10,000 तक का इंसेंटिव मिल सकता था। नई व्यवस्था में यह अधिकतम राशि घटकर ₹5,000 प्रति वाहन हो गई है।
यानी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहकों को अब PM E-Drive के तहत पहले के मुकाबले कम वित्तीय सहायता मिलेगी। हालांकि, योजना की अवधि बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहन बाजार को लंबे समय तक सरकारी समर्थन मिलने की उम्मीद है।
PM E-Drive का बजट ₹1,000 करोड़ बढ़ा
सरकार ने केवल योजना की अवधि ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि इसके लिए निर्धारित बजट में भी बढ़ोतरी की है। PM E-Drive Scheme का बजट पहले ₹10,900 करोड़ था।
अब इसमें ₹1,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि जोड़ी गई है। इसके बाद योजना का कुल बजट बढ़कर ₹11,900 करोड़ हो गया है, बजट में यह बढ़ोतरी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे योजना के तहत अधिक संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों और संबंधित EV इंफ्रास्ट्रक्चर को सहायता देने का रास्ता तैयार होगा, बदली हुई योजना के तहत अधिकतम 45,79,120 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को सहायता मिलने की बात कही गई है।
₹1.50 लाख तक कीमत वाले EV के लिए इंसेंटिव
PM E-Drive Scheme के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर इंसेंटिव पाने के लिए वाहन की कीमत से जुड़ी सीमा भी महत्वपूर्ण है। दी गई जानकारी के अनुसार ₹1.50 लाख तक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहन इस इंसेंटिव के लिए पात्र हैं।
इसका मतलब है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहक को वाहन की कीमत और लागू नियमों के आधार पर PM E-Drive के तहत मिलने वाले लाभ का फायदा मिल सकता है, हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते समय ग्राहक को यह ध्यान रखना चाहिए कि योजना के नियमों के अनुसार इंसेंटिव की वास्तविक राशि वाहन की बैटरी क्षमता और लागू पात्रता शर्तों पर निर्भर कर सकती है।
PM E-Drive Scheme क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन चलाने की लागत कम हो सकती है। इसी वजह से सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रही है।
PM E-Drive Scheme का उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को आर्थिक सहायता देना नहीं है। इसका एक बड़ा उद्देश्य देश में ऐसा EV इकोसिस्टम तैयार करना भी है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो।
चार्जिंग स्टेशन बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल करने वालों की बड़ी चिंता कम हो सकती है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने से पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
E2W खरीदने वालों पर क्या पड़ेगा असर?
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहकों के लिए इंसेंटिव में कमी एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पहले जहां अधिकतम ₹10,000 तक का इंसेंटिव मिल सकता था, वहीं अब अधिकतम राशि ₹5,000 कर दी गई है।
इस बदलाव के कारण इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय मिलने वाला सरकारी लाभ कम होगा। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहन की कुल लागत को केवल इंसेंटिव के आधार पर नहीं देखना चाहिए। खरीदारी से पहले वाहन की कीमत, बैटरी क्षमता, रेंज, चार्जिंग सुविधा और रखरखाव खर्च जैसी चीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है।योजना की अवधि मार्च 2028 तक बढ़ने से ग्राहकों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए सरकारी समर्थन का लंबा समय मिल सकता है। हालांकि, योजना के तहत लाभ लेने से पहले संबंधित वाहन और लागू नियमों की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
योजना में पहले क्या था और अब क्या बदला?
PM E-Drive Scheme की शुरुआत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए अधिकतम ₹10,000 तक इंसेंटिव की व्यवस्था थी। अब इसमें बदलाव करते हुए अधिकतम इंसेंटिव ₹5,000 कर दिया गया है इसके साथ ही इंसेंटिव की दर ₹5,000 प्रति kWh से घटाकर ₹2,500 प्रति kWh कर दी गई है। दूसरी तरफ योजना का बजट ₹10,900 करोड़ से बढ़ाकर ₹11,900 करोड़ किया गया है, इस तरह नई व्यवस्था में एक तरफ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर मिलने वाला प्रत्यक्ष लाभ कम हुआ है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने योजना के लिए कुल बजट बढ़ाया है और इसकी अवधि भी आगे बढ़ाई है।
PM E-Drive Scheme का मुख्य उद्देश्य
PM E-Drive Scheme का मुख्य उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देना है। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ें और इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित हो।
योजना के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के अलावा ई-रिक्शा, ई-कार्ट और L5 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर जैसे वाहनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन समेत EV इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल सकती है।














