वित्तविहीन शिक्षक बनेंगे प्रधानाचार्य, सरकारी शिक्षकों के सामने नई परेशानी; भर्ती नियमों पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक बनने का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए भर्ती नियमों में बदलाव ने नई बहस छेड़ दी है। एक ओर संशोधित नियमों में वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों को भी संस्था प्रधान के पदों पर आवेदन का रास्ता दिखाई दे रहा है। वहीं दूसरी ओर एडेड कॉलेजों में वर्षों से सेवा दे रहे कई शिक्षक नई शैक्षिक योग्यता की शर्तों के कारण भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। इससे शिक्षकों के बीच नाराजगी बढ़ रही है।
प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के रिक्त पदों पर भर्ती की तैयारी चल रही है। वर्ष 2013 के बाद प्रधानाध्यापक के 1172 और प्रधानाचार्य के 1475 पदों पर भर्ती शुरू होने की उम्मीद है। इसी बीच तीन सितंबर को जारी शासनादेश में B.Ed को अनिवार्य किए जाने से ऐसे शिक्षक प्रभावित हुए हैं, जिनकी नियुक्ति पूर्व के नियमों के तहत हुई थी। अब नई eligibility conditions के कारण उनके सामने आवेदन करने की स्थिति ही नहीं रह गई है।
गैर-B.Ed शिक्षकों के सामने बड़ी परेशानी
संशोधित नियमों में B.Ed की अनिवार्यता ने कई वर्षों से माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। एलटी प्रशिक्षित, कला, व्यायाम और संगीत जैसे विषयों के कई शिक्षक इससे प्रभावित हो सकते हैं। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्तियां उस समय लागू नियमों के अनुसार हुई थीं। ऐसे में सेवा के कई वर्ष पूरे करने के बाद अचानक नई qualification के आधार पर उन्हें प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक भर्ती से बाहर करना उचित नहीं है।
शिक्षकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उनकी मूल नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार वैध थी, तो संस्था प्रधान की भर्ती में उनके अनुभव और पूर्व की training को किस तरह देखा जाएगा। यही वजह है कि शिक्षक संगठन अब नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि B.Ed के साथ LT Training को भी equivalent qualification के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, ताकि लंबे समय से विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को भी fair opportunity मिल सके।
परास्नातक में 50 प्रतिशत अंक की शर्त पर भी सवाल
प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक भर्ती में केवल B.Ed की अनिवार्यता ही विवाद का विषय नहीं है। परास्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की शर्त को लेकर भी शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। शिक्षकों का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE की 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना में विभिन्न स्तरों पर अध्यापन के लिए अलग-अलग शैक्षिक योग्यताओं और प्रतिशत का उल्लेख किया गया है। लेकिन संस्था प्रधान के पद के लिए परास्नातक में 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि अलग-अलग विश्वविद्यालयों में syllabus, examination system और evaluation standards एक जैसे नहीं रहे हैं। पिछले 25 से 30 वर्षों में विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली में कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में पुराने समय में प्राप्त अंकों को वर्तमान standard से जोड़कर qualification तय करना कई अनुभवी शिक्षकों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। इसी आधार पर 50 प्रतिशत अंकों की बाध्यता को समाप्त करने की मांग उठ रही है।
जल्द जारी हो सकता है भर्ती विज्ञापन
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से संस्था प्रधान भर्ती का advertisement जल्द जारी किए जाने की तैयारी है। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले शिक्षक संगठन चाहते हैं कि नियमों में मौजूद इन विसंगतियों को दूर किया जाए। उनका मानना है कि यदि पात्रता संबंधी विवाद पहले ही स्पष्ट नहीं किए गए तो आगे selection process के दौरान कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है।
माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी ने मांग की है कि प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक भर्ती में B.Ed के साथ LT Training को भी समकक्ष अर्हता माना जाए। इसके साथ ही स्नातकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि यदि इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो उच्च न्यायालय में याचिकाएं दाखिल होने की संभावना है। इससे भर्ती की पूरी selection process प्रभावित हो सकती है।
भर्ती प्रक्रिया से पहले नियम स्पष्ट करना जरूरी
प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक किसी भी माध्यमिक विद्यालय की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इन पदों पर लंबे समय से रुकी भर्ती को लेकर शिक्षकों की उम्मीदें काफी ज्यादा हैं। लेकिन eligibility criteria को लेकर यदि शुरुआत में ही विवाद खड़ा होता है तो इसका असर पूरी recruitment process पर पड़ सकता है।
फिलहाल शिक्षकों की नजर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के आगामी विज्ञापन और भर्ती नियमों पर है। खासतौर पर B.Ed अनिवार्यता, LT Training की मान्यता और परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की शर्त को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। हजारों शिक्षक चाहते हैं कि अनुभव और पूर्व में लागू नियमों को भी ध्यान में रखा जाए, ताकि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रहे शिक्षकों के साथ अवसर को लेकर असमानता न हो।
