संविदा पर 10 साल से अधिक काम करने वालों को नियमित करें: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

संविदा पर 10 साल से अधिक काम करने वालों को नियमित करें: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में वर्षों से सेवा दे रहे नौ संविदा कर्मचारियों को सेवा में बहाल करने और उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जब कर्मचारी 10 वर्ष से अधिक समय तक लगातार बिना किसी ब्रेक के सेवा दे चुके हैं, तो केवल संविदा कर्मचारी होने के आधार पर उनकी सेवा समाप्त करना उचित नहीं माना जा सकता।

जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले में 14 अगस्त 2024 के उस विभागीय आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके जरिए कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को खारिज किया गया था। कोर्ट ने विभाग को आदेश की प्रति प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर सभी नौ याचिकाकर्ताओं को सेवा में बहाल करने और नियमितीकरण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

10 साल से अधिक लगातार सेवा का मामला

मामले में सामने आया कि याचिकाकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में लंबे समय तक संविदा के आधार पर काम किया। उनकी नियुक्तियां वर्ष 2004 से 2008 के बीच अलग-अलग पदों पर हुई थीं। इनमें टाइपिस्ट, ऑफिस असिस्टेंट, क्लर्क, ड्राइवर और पंप ऑपरेटर जैसे पद शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने वर्षों तक लगातार विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं। इसके बावजूद उनकी नियमितीकरण की मांग को स्वीकार नहीं किया गया। विभागीय स्तर पर मांग खारिज होने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की लंबी और लगातार सेवा को महत्वपूर्ण माना। अदालत के आदेश के बाद अब विभाग को संबंधित कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लेकर नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

नौ कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

इस आदेश से धरो उरांव, अरुण कुमार साहू, गौतम प्रसाद सिंह, आशीष रंजन, प्रदीप बड़ा, विष्णुदेव शाह, अरविंद कुमार सिंह, अजय रजक और संतोष कुमार राम को राहत मिली है। इन कर्मचारियों ने अलग-अलग पदों पर लंबे समय तक विभाग में काम किया है।

मामले में अमृतांश वत्स ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित विभाग पर छह सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी करने की जिम्मेदारी होगी।

ऊर्जा निगम के संविदा चालकों को भी राहत

इसी तरह झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) में लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे चालकों को भी हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने करीब 15 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे संविदा चालकों के नियमितीकरण और संबंधित सेवा लाभ देने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने इस मामले में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि केवल स्वीकृत पद नहीं होने का आधार बनाकर वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार ऐसी स्थिति अधिक से अधिक अनियमित नियुक्ति का मामला हो सकती है, लेकिन इसे अवैध नियुक्ति नहीं माना जा सकता।

लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए अहम आदेश

दोनों मामलों में हाईकोर्ट के आदेश का मुख्य पहलू कर्मचारियों की लंबी अवधि की लगातार सेवा है। एक मामले में कर्मचारियों ने 10 वर्ष से अधिक समय तक सेवा दी, जबकि ऊर्जा निगम के चालक करीब 15 वर्षों से काम कर रहे थे।

इन आदेशों से संविदा पर लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सामने आया है। हालांकि, किसी अन्य विभाग या कर्मचारी पर इस आदेश का स्वतः लागू होना उसके मामले के तथ्यों, नियुक्ति की प्रक्रिया, पद की स्थिति और संबंधित नियमों पर निर्भर करेगा।

अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित विभागों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आगे की कार्रवाई करनी होगी। कर्मचारियों के लिए यह आदेश लंबे समय से चली आ रही सेवा और नियमितीकरण की मांग के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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