आईटीआई में आउटसोर्सिंग से अनुदेशक भर्ती पर रोक, हाईकोर्ट ने कहा- सेवा नियमावली का पालन जरूरी
प्रयागराज में हाईकोर्ट ने राजकीय आईटीआई में फोरमैन अनुदेशक के पदों पर आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती को लेकर बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने इन पदों को आउटसोर्सिंग से भरने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी शासनादेश वैधानिक सेवा नियमावली के प्रावधानों के विपरीत नहीं हो सकता। इस आदेश के बाद आउटसोर्सिंग के माध्यम से अनुदेशक भर्ती की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लग गई है।
मामला राजकीय आईटीआई में फोरमैन अनुदेशक के पदों पर भर्ती से जुड़ा है। याची अखिलेश कुमार सिंह की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 24 जून को एक शासनादेश जारी किया गया था। इसमें अनुदेशक के पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरने की मंजूरी दी गई थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए कोर्ट का रुख किया गया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने की। याची की ओर से अधिवक्ता सुनील कुमार और वीरेंद्र कुमार गौतम ने पक्ष रखा। वहीं सरकारी पक्ष की ओर से सरकारी वकील ने अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आउटसोर्सिंग से फोरमैन अनुदेशक के पदों को भरने वाले सरकारी आदेश पर रोक लगा दी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सेवा नियमावली के पालन पर विशेष जोर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कोई भी शासनादेश वैधानिक सेवा नियमावली का उल्लंघन नहीं कर सकता। हालांकि कोर्ट ने विभाग को पूरी तरह भर्ती प्रक्रिया रोकने के लिए नहीं कहा है। विभाग को सेवा नियमावली के अनुसार नियमित प्रक्रिया के तहत भर्ती जारी रखने की छूट दी गई है।
इस आदेश का असर राजकीय आईटीआई में फोरमैन अनुदेशक के पदों पर प्रस्तावित आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा। अब विभाग को भर्ती से जुड़े अगले कदम सेवा नियमावली के प्रावधानों के अनुसार उठाने होंगे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में आगे की प्रक्रिया पर संबंधित अभ्यर्थियों और विभागीय अधिकारियों की नजर रहेगी।
आईटीआई अनुदेशक भर्ती को लेकर हाईकोर्ट का यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सरकारी आदेश और वैधानिक सेवा नियमावली के बीच नियमों के पालन को स्पष्ट किया गया है। फिलहाल आउटसोर्सिंग के जरिए फोरमैन अनुदेशक के पद भरने पर रोक है, जबकि नियमावली के तहत नियमित भर्ती प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी गई है। आगे विभाग इस आदेश के आधार पर क्या कदम उठाता है, यह महत्वपूर्ण रहेगा।
