विशेष टीईटी पर प्रधानाध्यापक असमंजस में, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सिर्फ प्राइमरी टीईटी का विकल्प

विशेष टीईटी पर प्रधानाध्यापक असमंजस में, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सिर्फ प्राइमरी टीईटी का विकल्प

पदोन्नति के लिए उच्च प्राथमिक टीईटी की पात्रता पर सवाल

लखनऊ : विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन को लेकर कुछ शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है। खासकर प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि उन्हें प्राथमिक स्तर की टीईटी देनी है या उच्च प्राथमिक स्तर की। आवेदन की अंतिम तिथि चार अक्टूबर है और परीक्षा तीन नवंबर को होनी है। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने बेसिक शिक्षा विभाग से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना में प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी का विकल्प दिया गया है। इससे प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक असमंजस में हैं। उनका कहना है कि उनका पद उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक के समकक्ष माना जाता है। ऐसे में उन्हें उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी में आवेदन का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है?

शिक्षकों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए वर्तमान पद पर बने रहने को संबंधित स्तर की टीईटी और पदोन्नति के लिए उच्च स्तर की टीईटी जरूरी है। ऐसे में प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए केवल प्राथमिक टीईटी का विकल्प रखने से पदोन्नति की पात्रता प्रभावित हो सकती है। कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत प्राथमिक संवर्ग के प्रधानाध्यापकों की स्थिति भी इसी तरह की है। शिक्षकों की मांग है कि उन्हें दोनों स्तर की टीईटी में आवेदन की अनुमति दी जाए, ताकि वर्तमान पद की पात्रता के साथ भविष्य की पदोन्नति का रास्ता भी खुला रहे। आवेदन की अंतिम तिथि से पहले स्पष्ट निर्देश जारी करने व आवश्यक पर संशोधित अधिसूचना जारी करने की मांग की है।

पद समकक्ष तो जूनियर TET देने का मौका क्यों नहीं? प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल से कंपोजिट स्कूल में तैनात शिक्षक परेशान

प्राइमरी और अपर प्राइमरी के शिक्षकों के लिए अलग-अलग होनी है स्पेशल टीईटी की परीक्षा

लखनऊः विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन को लेकर बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में तैनात शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। सबसे अधिक परेशानी प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कंपोजिट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को हो रही है, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे प्राथमिक स्तर की टीईटी दें या उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की।

क्या है विवाद?: बेसिक शिक्षा विभाग के कैडर स्ट्रक्चर के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक का पहला प्रमोशन ‘प्राथमिक का हेडमास्टर’ या ‘जूनियर का सहायक अध्यापक’ के तौर पर होता है। दोनों पद समान वेतनमान और समकक्ष है, जबकि अगला प्रमोशन जूनियर विद्यालय के प्रधानाध्यापक के तौर पर होता है।

अब शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि जब प्राथमिक हेडमास्टर का पद जूनियर के सहायक अध्यापक के समकक्ष है, तो उन्हें केवल प्राथमिक टीईटी का ही विकल्प क्यों दिया जा रहा है? उन्हें उच्च प्राथमिक (जूनियर) टीईटी में भी मौका मिलना चाहिए। कंपोजिट स्कूलों में प्राथमिक हेडमास्टरों का पद ‘मानव संपदा पोर्टल’ पर प्रधानाध्यापक/जूनियर सहायक अध्यापक दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत वर्तमान पद पर बने रहने और भविष्य में पदोन्नति पाने के लिए संबंधित और उच्च स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। शिक्षकों का कहना है कि यदि उन्हें अभी सिर्फ प्राथमिक टीईटी का विकल्प मिला, तो कल को जूनियर स्तर पर होने वाली पदोन्नति की पात्रता पर संकट खड़ा हो जाएगा।

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