जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में अब देरी पड़ेगी भारी, नए नियम लागू

जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में अब देरी पड़ेगी भारी, नए नियम लागू

प्रयागराज। जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीकरण नहीं कराना अब भारी पड़ सकता है। शासन ने 1 अक्टूबर से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के विलंबित पंजीकरण को लेकर नए निर्देश लागू किए हैं। अब घटना के लंबे समय बाद पंजीकरण कराने पर आवेदक को अतिरिक्त प्रक्रिया और दस्तावेजों से गुजरना होगा।

21 दिन के भीतर पंजीकरण पर कोई शुल्क नहीं

जन्म अथवा मृत्यु की घटना के 21 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर प्रमाणपत्र निशुल्क जारी किया जाएगा। इसलिए लोगों को सलाह दी गई है कि निर्धारित अवधि के भीतर ही पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर लें।

21 दिन के बाद क्या होगा?

समय पर पंजीकरण नहीं कराने पर अलग-अलग अवधि के अनुसार प्रक्रिया निर्धारित की गई है

पंजीकरण की अवधि क्या लगेगा

0 से 21 दिन निशुल्क पंजीकरण एवं प्रमाणपत्र

21 दिन से 1 वर्ष शपथपत्र, विलंब शुल्क और मुख्य चिकित्सा अधिकारी/सांख्यिकी अधिकारी की स्वीकृति

1 से 2 वर्ष शपथपत्र, विलंब शुल्क और उप जिलाधिकारी का आदेश एवं स्वीकृति

2 वर्ष के बाद शपथपत्र, विलंब शुल्क तथा प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश एवं स्वीकृति

1 से 2 साल बाद SDM की मंजूरी जरूरी

यदि जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर पंजीकरण कराया जाता है, तो आवेदक को शपथपत्र और विलंब शुल्क के साथ संबंधित उप जिलाधिकारी (SDM) का आदेश एवं स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।

वहीं दो वर्ष के बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए प्रक्रिया और अधिक कठिन हो जाएगी। ऐसी स्थिति में शपथपत्र, विलंब शुल्क के साथ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश एवं स्वीकृति की आवश्यकता होगी।

जन्म प्रमाणपत्र कई जरूरी कामों में महत्वपूर्ण

जन्म प्रमाणपत्र का उपयोग बच्चों के स्कूल में प्रवेश, आधार, पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए किया जाता है। इसी तरह मृत्यु प्रमाणपत्र बैंक खाते, बीमा, पेंशन, संपत्ति और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में आवश्यक होता है।

इसलिए प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि जन्म और मृत्यु की घटनाओं का पंजीकरण निर्धारित समय सीमा में ही कराएं, ताकि बाद में अतिरिक्त शुल्क और लंबी प्रक्रिया से बचा जा सके।

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