10 बैगलेस डे मॉड्यूल से बिना किताबों के सीखेंगे बच्चे, निखरेगा व्यक्तित्व
लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाई का आनंददायक अनुभव देने के लिए 10 बैगलेस डे मॉड्यूल लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पहल के तहत विद्यार्थियों को 10 दिन बिना स्कूल बैग के विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य बच्चों को किताबी रटंत विद्या और भारी-भरकम बस्तों के बोझ से राहत दिलाने के साथ उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है।
इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को आनंदम के 10 बैगलेस डे मॉड्यूल और अरुणोदय प्रार्थना सभा गतिविधि कैलेंडर एवं निर्देशिका का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। लखनऊ के निशातगंज स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को इन मॉड्यूल के उद्देश्यों, गतिविधियों और उनके संचालन की जानकारी दी गई।
आनंदम मॉड्यूल के तहत खेल-खेल में होगी पढ़ाई
आनंदम मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबों और कॉपियों से अलग व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर देना है। इसके तहत निर्धारित 10 दिनों में विद्यार्थियों को खेलकूद, संगीत, कला, पेंटिंग, नृत्य और नाटक जैसी रचनात्मक गतिविधियों में शामिल किया जाएगा।
इन गतिविधियों को इस तरह तैयार किया जाता है कि बच्चों का जुड़ाव उनके पाठ्यक्रम और विषयों से भी बना रहे। विद्यार्थी खेल और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से नई चीजें सीख सकेंगे। इससे पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों को अपने आसपास की दुनिया को समझने और अनुभवों से सीखने का मौका मिलेगा।
बैगलेस डे के दौरान बच्चों की कल्पनाशीलता, रचनात्मकता, सामाजिक कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। समूह में काम करने, अपनी बात रखने और दूसरे बच्चों के साथ मिलकर गतिविधियां पूरी करने से उनमें सहयोग और संवाद की क्षमता विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य स्कूल में पढ़ाई के दबाव को कम करना है। जब बच्चे पढ़ाई के साथ खेल, कला और मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेंगे, तो उनके लिए विद्यालय का वातावरण अधिक आनंददायक बन सकेगा।
अरुणोदय मॉड्यूल से प्रार्थना सभा बनेगी व्यक्तित्व विकास का माध्यम
विद्यालयों में सुबह होने वाली प्रार्थना सभा को अधिक उपयोगी और प्रभावशाली बनाने के लिए अरुणोदय मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत प्रार्थना सभा को केवल नियमित औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
अरुणोदय गतिविधि कैलेंडर और निर्देशिका के अनुसार शिक्षक बच्चों को योग, समसामयिक घटनाओं की जानकारी, प्रेरक प्रसंग, कहानियां और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ सकेंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को देश और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी देने के साथ उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिल सकता है। इससे विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल और सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को मिलेगा बढ़ावा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, रुचिकर और विद्यार्थी केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है। आनंदम और अरुणोदय मॉड्यूल इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इनके माध्यम से बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यवहारिक अनुभव और जीवनोपयोगी कौशल विकसित करने के अवसर मिलेंगे।
गतिविधियों के लिए निर्धारित कैलेंडर और निर्देशिका से विद्यालयों में बैगलेस डे तथा प्रार्थना सभा के संचालन में एकरूपता लाने में मदद मिलेगी। शिक्षकों को भी यह समझने में आसानी होगी कि निर्धारित गतिविधियों को बच्चों की उम्र, रुचि और सीखने की जरूरतों के अनुसार कैसे आयोजित किया जाए।
बच्चों की रुचि और उपस्थिति बढ़ने की उम्मीद
शिक्षा विभाग की इस पहल से परिषदीय विद्यालयों में सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को अधिक रोचक बनाने की उम्मीद है। खेल, कला, संगीत और व्यावहारिक गतिविधियों के जरिए बच्चों को सीखने का अवसर मिलने से विद्यालय के प्रति उनकी रुचि बढ़ सकती है। साथ ही, बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे निखारने का मंच भी मिलेगा।
डायट प्राचार्य मनोज कुमार गिरि के अनुसार, आनंदम के 10 बैगलेस डे मॉड्यूल और अरुणोदय प्रार्थना सभा गतिविधि कैलेंडर एवं निर्देशिका के बारे में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप इन गतिविधियों से विद्यार्थियों में अनुशासन, राष्ट्रप्रेम, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, 10 बैगलेस डे मॉड्यूल और अरुणोदय पहल का उद्देश्य बच्चों को बोझिल पढ़ाई से राहत देते हुए सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाना है। यदि विद्यालयों में इन गतिविधियों का प्रभावी ढंग से संचालन होता है, तो इससे बच्चों के शैक्षिक विकास के साथ उनके व्यक्तित्व, रचनात्मकता और व्यवहारिक कौशल को भी बेहतरबनाने में सहायता मिल सकती है।
