8th Pay Commission: लेवल 18 के लिए 4.38 फिटमेंट फैक्टर की मांग, फैमिली यूनिट बढ़ाने का भी प्रस्ताव
8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। इस बार वेतन बढ़ोतरी के साथ-साथ फिटमेंट फैक्टर, सालाना इंक्रीमेंट और परिवार की जरूरतों के आधार पर वेतन निर्धारण जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से आयोग के सामने अलग-अलग सुझाव रखे जा रहे हैं। इसी क्रम में इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने अलग-अलग पे लेवल के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर तय करने की मांग की है।
संगठन का मानना है कि सभी कर्मचारियों के वेतन में एक समान अनुपात से बढ़ोतरी करना हर स्तर की जिम्मेदारियों और कार्य की प्रकृति के अनुरूप नहीं हो सकता। इसलिए निचले वेतन स्तर से लेकर उच्चतम पे लेवल तक अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर निर्धारित किए जाने चाहिए। इस प्रस्ताव में लेवल 1 से 3 तक के कर्मचारियों के लिए 2.92 और लेवल 17 से 18 तक के कर्मचारियों के लिए 4.38 फिटमेंट फैक्टर की मांग शामिल है।
हालांकि, यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि ये कर्मचारी संगठन की ओर से रखी गई मांगें हैं। आठवें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और केंद्र सरकार के निर्णय के बाद ही नए वेतनमान तथा वास्तविक वेतन वृद्धि की स्थिति स्पष्ट होगी।
फिटमेंट फैक्टर क्या है और इससे वेतन पर क्या असर पड़ता है?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसका इस्तेमाल पुराने मूल वेतन को नए वेतन ढांचे में निर्धारित करने के लिए किया जाता है। नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर कर्मचारियों की विशेष रुचि रहती है, क्योंकि इसका संबंध संशोधित बेसिक पे से होता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन 18,000 रुपये है और किसी प्रस्ताव के तहत 2.92 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो गणना के अनुसार नया मूल वेतन 52,560 रुपये होगा। यह केवल गणितीय उदाहरण है, न कि आठवें वेतन आयोग द्वारा घोषित वेतन।
वास्तविक वेतन निर्धारण में वेतन मैट्रिक्स, पे लेवल, वेतन संशोधन के नियम और सरकार द्वारा स्वीकृत व्यवस्था की भूमिका होगी। इसके अलावा महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और अन्य भत्तों पर पड़ने वाला असर भी अंतिम नियमों के आधार पर तय होगा।
लेवल 18 के लिए 4.38 फिटमेंट फैक्टर की मांग
इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने आठवें वेतन आयोग के समक्ष अलग-अलग वेतन स्तरों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा है। संगठन के अनुसार, कर्मचारियों के पद, जिम्मेदारियों, कार्य की जटिलता और सेवा से जुड़ी अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए वेतन संशोधन की व्यवस्था होनी चाहिए।
इस प्रस्ताव में सबसे अधिक फिटमेंट फैक्टर उच्च वेतन स्तरों के लिए मांगा गया है। लेवल 17 और 18 के लिए 4.38 फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है। वहीं, शुरुआती वेतन स्तरों के लिए 2.92 का गुणांक प्रस्तावित है।
संगठन का तर्क है कि अलग-अलग पे लेवल पर कार्य करने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में अंतर होता है। ऐसे में सभी स्तरों पर एक ही फिटमेंट फैक्टर लागू करने के बजाय अलग-अलग गुणांक तय करने पर विचार किया जाना चाहिए।
किस पे लेवल के लिए कितना फिटमेंट फैक्टर मांगा गया?
IRTSA की ओर से प्रस्तुत मांग के अनुसार, अलग-अलग वेतन स्तरों के लिए फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव इस प्रकार है।
लेवल 1 से 3 के लिए 2.92 फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है। लेवल 4 से 8 के लिए 3.50 फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित है। इसी तरह लेवल 9 से 13 के लिए 3.80 और लेवल 14 से 16 के लिए 4.09 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी गई है।
सबसे ऊंचे स्तर पर लेवल 17 से 18 के लिए 4.38 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया गया है।
इन मांगों का उद्देश्य अलग-अलग वेतन स्तरों पर काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन निर्धारण में अंतर को ध्यान में रखना है। हालांकि, आयोग इन प्रस्तावों को किस रूप में स्वीकार करेगा, इस बारे में अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
लेवल 1 से लेवल 18 तक वेतन में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है?
संगठन की मांग के आधार पर वेतन में संभावित बदलाव को समझने के लिए मौजूदा मूल वेतन को प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर से गुणा करके देखा जा सकता है। लेकिन इसके लिए संबंधित कर्मचारी का वास्तविक वर्तमान बेसिक पे जानना जरूरी है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन 12,000 रुपये है और उस पर 2.92 का गुणांक लगाया जाए, तो गणना के अनुसार राशि 35,040 रुपये होगी। इसी तरह, यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन 51,300 रुपये है और उस पर 4.38 का गुणांक लगाया जाए, तो गणना से 2,24,694 रुपये प्राप्त होंगे।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ये उदाहरण केवल गणना समझाने के लिए हैं। किसी कर्मचारी का नया मूल वेतन उसके मौजूदा पे लेवल, वेतन मैट्रिक्स में स्थिति और आयोग द्वारा स्वीकृत नियमों पर निर्भर करेगा।
इसलिए लेवल 1 के कर्मचारियों का बेसिक पे 35,400 रुपये और लेवल 18 के कर्मचारियों का मूल वेतन 2.25 लाख रुपये होने जैसी संभावित गणनाओं को अंतिम सरकारी वेतन के रूप में नहीं देखना चाहिए। वास्तविक राशि की पुष्टि आधिकारिक वेतन संशोधन संबंधी आदेश जारी होने के बाद ही की जा सकेगी।
सालाना इंक्रीमेंट 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने की मांग
आठवें वेतन आयोग के सामने केवल फिटमेंट फैक्टर का मुद्दा ही नहीं है। IRTSA ने कर्मचारियों के सालाना इंक्रीमेंट में भी बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव रखा है।
संगठन की मांग है कि वार्षिक वेतन वृद्धि की दर मौजूदा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत की जाए। वर्तमान व्यवस्था में मिलने वाला सालाना इंक्रीमेंट कर्मचारियों के मूल वेतन में निर्धारित नियमों के अनुसार बढ़ोतरी करता है। यदि भविष्य में इस दर को बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो कर्मचारियों के वेतन में हर वर्ष होने वाली वृद्धि पर इसका असर पड़ सकता है।
हालांकि, 5 प्रतिशत वार्षिक इंक्रीमेंट की मांग अभी एक प्रस्ताव है। इसे लागू करने के लिए आयोग की सिफारिश और सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी।
कर्मचारियों के लिए सालाना इंक्रीमेंट का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि इससे लंबे समय में मूल वेतन बढ़ता है। मूल वेतन में बदलाव होने पर उससे जुड़े कुछ भत्तों और भविष्य के वेतन निर्धारण पर भी असर पड़ सकता है।
फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 4.6 करने का प्रस्ताव
आठवें वेतन आयोग से जुड़ी चर्चाओं में फैमिली यूनिट का विषय भी सामने आया है। IRTSA ने परिवार की जरूरतों और घरेलू खर्च को ध्यान में रखते हुए फैमिली यूनिट की संख्या 4.6 करने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि वेतन निर्धारित करते समय परिवार के वास्तविक खर्चों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए। मौजूदा सातवें वेतन आयोग की व्यवस्था में न्यूनतम वेतन निर्धारण के लिए तीन फैमिली यूनिट का मानक इस्तेमाल किया गया था। अब संगठन चाहता है कि नए वेतन ढांचे में इस मानक पर दोबारा विचार किया जाए।
फैमिली यूनिट का संबंध न्यूनतम वेतन की गणना में परिवार के सदस्यों की जरूरतों को ध्यान में रखने से है। इसमें भोजन, कपड़े, आवास और अन्य आवश्यक खर्चों जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है।
यदि फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग पर आयोग विचार करता है, तो इसका संभावित असर न्यूनतम वेतन तय करने के आधार पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक कर्मचारी के वेतन में सीधे किसी निश्चित प्रतिशत से बढ़ोतरी हो जाएगी। वास्तविक प्रभाव अंतिम वेतन निर्धारण पद्धति पर निर्भर करेगा।
नए घर के खर्च को शामिल करने की भी मांग
कर्मचारियों की ओर से वेतन संशोधन के दौरान आवास से जुड़े खर्चों पर भी ध्यान देने की मांग की जा रही है। IRTSA ने नए घर के खर्च को भी वेतन निर्धारण से जुड़े विचारों में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।
आज के समय में आवास की लागत, किराया, मकान निर्माण और घरेलू जरूरतों पर होने वाला खर्च कई परिवारों के बजट का बड़ा हिस्सा होता है। अलग-अलग शहरों में इन खर्चों में काफी अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि वेतन निर्धारण करते समय जीवनयापन की वास्तविक लागत को पर्याप्त महत्व दिया जाए।
हालांकि, आवास खर्च को किस तरह और किस सीमा तक वेतन गणना में शामिल किया जाएगा, यह आयोग की सिफारिशों और अंतिम नीति पर निर्भर करेगा।
आठवें वेतन आयोग की बैठकों से बढ़ी उम्मीदें
आठवें वेतन आयोग की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स समूहों और संबंधित पक्षों की ओर से सुझाव रखे जा रहे हैं। बेंगलुरु में हुई बैठक के दौरान कुछ पेंशनर्स संगठनों ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग भी उठाई थी। इससे स्पष्ट है कि अलग-अलग संगठन अपनी जरूरतों और अपेक्षाओं के आधार पर वेतन संशोधन के अलग-अलग प्रस्ताव सामने रख रहे हैं।
आयोग की बैठकें विभिन्न शहरों में आयोजित की जा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली, लखनऊ, पुडुचेरी, चेन्नई, भुवनेश्वर और कोलकाता में बैठकें हो चुकी हैं। अगली बैठक मुंबई में प्रस्तावित बताई गई है। बैठक का सटीक कार्यक्रम और उसमें चर्चा होने वाले विषयों की पुष्टि आधिकारिक सूचना से की जानी चाहिए।
इन बैठकों का उद्देश्य संबंधित पक्षों की बात सुनना और वेतन, भत्तों, पेंशन तथा कर्मचारियों की अन्य मांगों पर विचार के लिए सुझाव प्राप्त करना है। अलग-अलग संगठनों के प्रस्ताव आयोग के विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन किसी मांग का रखा जाना उसके स्वीकार होने की गारंटी नहीं है।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को क्या ध्यान रखना चाहिए?
आठवें वेतन आयोग को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों पर फिटमेंट फैक्टर तथा संभावित वेतन वृद्धि से संबंधित कई आंकड़े चर्चा में हैं। ऐसे में कर्मचारियों को प्रस्ताव और आधिकारिक निर्णय के बीच अंतर समझना चाहिए।
IRTSA का 4.38 फिटमेंट फैक्टर, 5 प्रतिशत वार्षिक इंक्रीमेंट और 4.6 फैमिली यूनिट का प्रस्ताव संगठन की मांग को दर्शाता है। इसे केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत नई वेतन व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए।
कर्मचारियों और पेंशनर्स को आयोग की आधिकारिक घोषणाओं, सरकार के आदेशों और संबंधित विभागों की सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए। जब तक अंतिम सिफारिशें और लागू होने वाले नियम सामने नहीं आते, तब तक नए बेसिक पे, कुल वेतन और पेंशन में वास्तविक बढ़ोतरी का निश्चित अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
