योगी सरकार कोचिंग सेंटरों के लिए बनाएगी कानून, देनी होगी गारंटी; 1.50 लाख जुर्माने का भी प्रावधान

योगी सरकार कोचिंग सेंटरों के लिए बनाएगी कानून, देनी होगी गारंटी; 1.50 लाख जुर्माने का भी प्रावधान

लखनऊ कोचिंग केंद्र में आग से हुई छात्रों की मौत के बाद योगी सरकार यूपी में कोचिंग केंद्रों के लिए सख्त कानून बनाने जा रही है। कोचिंग केंद्रों को 50 के ऊपर छात्रों को पढ़ाने के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। उन्हें आग से बचाव के लिए जरूरी उपाय करने होंगे। पढ़ने वाले छात्रों को जरूरी सुविधाएं देनी होंगी और बीच में पढ़ाई छोड़ने पर फीस वापस की गारंटी होगी। नियमों के उल्लंघन पर 50 हजार से लेकर 1.50 लाख तक जुर्माना देना होगा।

 

इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश कोचिंग (विनियमन) अध्यादेश-2026’ लाने की तैयारी है। यूपी में निजी कोचिंग केंद्रों के पंजीकरण और उन पर नियंत्रण करने की व्यवस्था की जा रही है। इनको विनयमित करने, पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री की लागत तय करने और उनके द्वारा की जाने वाली अवैध वसूली पर रोक लगाने का नए कानून में प्रावधान होगा। यूपी में 50 से अधिक छात्रों को दाखिला देने वाले कोचिंग केंद्रों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। कोचिंग केंद्रों में स्नातक से कम अर्हता वाले को शिक्षक नहीं रखा जा सकेगा। कोचिंग केंद्र दाखिला लेने के लिए रैंक या अच्छे अंक दिलाने का भ्रामक वादा नहीं कर सकेंगे।

 

जून में लखनऊ कोचिंग सेंटर में लगी थी भीषण आग

इस साल जून महीने की 22 तारीख को लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई थी। इसमें कई छात्र-छात्राओं की मौत हो गई थी। जान बचाने के लिए दूसरे और तीसरे तलों से एसी के पाइप के सहारे और खिड़कियां तोड़कर कुछ लोग कूद गए। उनमें से कई लोग घायल हो गए। तब पुलिस ने इमारत के मालिक समेत छह लोगों के खिलाफ अलीगंज थाने में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया था। पुलिस ने इमारत मालिक समेत कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

 

एडीए ने बनाई थी टीम

इस भीषण अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) हरकत में आ गया था। जांच में सामने आया था कि आवासीय नक्शे पर निर्मित इस भवन का उपयोग व्यवसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। भवन में अग्निशमन मानकों, सेटबैक और अन्य जरूरी सुरक्षा प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था। हादसे के बाद एलडीए पर सवाल उठने लगेतो अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की। यह भी पता चला था कि जिस इमारत में आग लगी उसके अवैध निर्माण को लेकर 2016 में ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था लेकिन दो महीने से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया था। इसके बाद बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण नहीं किया गया।

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