UPTET 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट से 150 शिक्षकों को झटका, नॉर्मलाइजेशन के खिलाफ याचिका खारिज
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 के परिणाम में अंकों के नॉर्मलाइजेशन को चुनौती देने वाले 150 शिक्षकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में शिक्षकों की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि परीक्षा परिणाम तैयार करने में अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के कारण उनके अंकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और वे निर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक प्राप्त नहीं कर सके।
यह मामला रिट-ए संख्या 17135/2026, वीरेंद्र सिंह एवं 149 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य से संबंधित है। इस फैसले के बाद UPTET 2026 के परिणाम में सामान्यीकरण प्रक्रिया को चुनौती देने वाले इन शिक्षकों को न्यायालय से राहत नहीं मिल सकी है।
UPTET 2026 Normalization Case: क्या है पूरा मामला?
याचिका दाखिल करने वाले शिक्षक उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने 26 अगस्त 2026 को घोषित UPTET 2026 के परिणाम को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था।
शिक्षकों का कहना था कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से परीक्षा के अंकों का सामान्यीकरण किए जाने के कारण उनके प्राप्तांकों पर प्रतिकूल असर पड़ा। उनका दावा था कि यदि सामान्यीकरण प्रक्रिया लागू नहीं की जाती, तो परिणाम अलग हो सकता था और वे न्यूनतम अर्हक अंक हासिल करने में सफल हो सकते थे।
याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा आयोजित करने और परिणाम तैयार करने में अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी।
शिक्षकों ने नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को क्यों दी चुनौती?
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि 20 मार्च 2026 को जारी परीक्षा विज्ञापन में परीक्षा आयोजित करने से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख था, लेकिन सामान्यीकरण की प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं थी।
शिक्षकों का तर्क था कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद ही उन्हें पता चला कि नॉर्मलाइजेशन के कारण उनके अंकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसी आधार पर उन्होंने परिणाम को चुनौती दी और न्यायालय से राहत की मांग की।
उनकी मुख्य आपत्ति अंकों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया को लेकर थी। उनका कहना था कि मूल्यांकन पद्धति की जानकारी अभ्यर्थियों को पहले से स्पष्ट रूप में मिलनी चाहिए थी, ताकि परीक्षा के नियमों को समझकर समय रहते उचित कदम उठाया जा सके।
आयोग और राज्य सरकार ने अदालत में क्या कहा?
याचिका का विरोध करते हुए प्रतिवादी पक्ष की ओर से कहा गया कि नॉर्मलाइजेशन की व्यवस्था परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद लागू नहीं की गई थी, बल्कि इसके संबंध में पहले ही सूचना जारी की जा चुकी थी।
प्रतिवादियों ने 26 फरवरी 2026 के पत्र और परीक्षा विज्ञापन के खंड 9 का हवाला देते हुए दलील दी कि अंकों के सामान्यीकरण से संबंधित प्रावधान परीक्षा प्रक्रिया में शामिल था। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं ने समय रहते इस व्यवस्था को चुनौती नहीं दी।
प्रतिवादी पक्ष का तर्क था कि अभ्यर्थियों को परीक्षा के नियमों पर आपत्ति होने पर उचित समय पर अदालत जाने का अवसर उपलब्ध था। परीक्षा में शामिल होने और परिणाम अपने पक्ष में नहीं आने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया को चुनौती देना उचित नहीं माना जा सकता, जब तक उसमें कोई स्पष्ट कानूनी खामी या मनमानी साबित न हो।
कई पालियों में हुई थी UPTET 2026 परीक्षा
मामले की सुनवाई के दौरान परीक्षा को कई पालियों में आयोजित किए जाने का मुद्दा भी सामने आया। अदालत के समक्ष बताया गया कि बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने के कारण परीक्षा को अलग-अलग दिनों और पालियों में कराना आवश्यक हुआ था।
ऐसी स्थिति में अलग-अलग पालियों में प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर में संभावित अंतर के कारण अभ्यर्थियों के अंकों की तुलना करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सामान्यीकरण की प्रक्रिया का उद्देश्य अलग-अलग पालियों के परिणामों में तुलनीयता और मूल्यांकन में समानता बनाए रखना होता है।
अदालत ने नॉर्मलाइजेशन को कई पालियों में आयोजित परीक्षाओं में इस्तेमाल होने वाली एक मान्य प्रक्रिया के रूप में देखा। हालांकि, किसी भी परीक्षा में ऐसी प्रक्रिया का औचित्य उसके निर्धारित नियमों और लागू किए जाने के तरीके के संदर्भ में समझा जाता है।
UPTET 2026 में कितने अंक थे जरूरी?
मामले से संबंधित आदेश में परीक्षा के न्यूनतम अर्हक अंकों का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 60 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 55 प्रतिशत न्यूनतम अर्हक अंक निर्धारित होने की बात कही गई है।
150 अंकों की परीक्षा के आधार पर इसका विवरण इस प्रकार है:
- सामान्य वर्ग: 90 अंक
- आरक्षित वर्ग: 82 अंक
आरक्षित वर्ग के लिए 55 प्रतिशत की गणना 82.5 अंक होती है। इसलिए अर्हक अंक लागू करने के आधिकारिक नियमों और अंक निर्धारण संबंधी प्रावधानों को ध्यान में रखना जरूरी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने याचिका में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं पाया।
अदालत के सामने महत्वपूर्ण सवाल यह था कि जब परीक्षा विज्ञापन में नॉर्मलाइजेशन से संबंधित व्यवस्था का प्रावधान मौजूद था, तब याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा प्रक्रिया के दौरान उसे चुनौती क्यों नहीं दी।
अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि शिक्षकों ने परीक्षा में भाग लिया और परिणाम घोषित होने के बाद सामान्यीकरण प्रक्रिया को चुनौती दी। केवल प्रतिकूल परिणाम आने के आधार पर परीक्षा की निर्धारित मूल्यांकन व्यवस्था को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जब तक उसमें अवैधता या मनमानी का पर्याप्त आधार सामने न आए।
इन्हीं परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसका अर्थ है कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं को नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के विरुद्ध मांगी गई न्यायिक राहत नहीं मिली।
UPTET अभ्यर्थियों और शिक्षकों के लिए क्या मायने हैं?
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला उन 150 शिक्षकों की याचिका से संबंधित है, जिन्होंने UPTET 2026 के परिणाम में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को चुनौती दी थी। इस मामले में अदालत ने उनके पक्ष में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है।
इस आदेश से यह बात भी सामने आती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लागू नियमों या मूल्यांकन प्रक्रिया पर आपत्ति होने पर समय रहते उचित कानूनी कदम उठाना महत्वपूर्ण हो सकता है। केवल परिणाम घोषित होने के बाद असफलता के आधार पर चुनौती देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता, यदि प्रक्रिया में किसी स्पष्ट कानूनी त्रुटि या मनमानी का आधार स्थापित न हो।
हालांकि, इस निर्णय को UPTET से जुड़े प्रत्येक मामले पर लागू होने वाला सार्वभौमिक फैसला नहीं समझना चाहिए। अन्य मामलों में राहत का प्रश्न उनके तथ्यों, लागू नियमों और उपलब्ध कानूनी आधारों पर निर्भर करेगा।
UPTET 2026 मामले के आदेश का विवरण
न्यायालय: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पीठ: न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर
वाद संख्या: रिट-ए संख्या 17135/2026
मामला: वीरेंद्र सिंह एवं 149 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य
आदेश की तारीख: 15 अक्टूबर 2026
मामले का विषय: UPTET 2026 के परिणाम में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को चुनौती
निर्णय: याचिका खारिज

