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Sanskrit Me Dhwaniyan :संस्कृत ध्वनियाँ कितने प्रकार की होती हैं ?

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Sanskrit Me Dhwaniyan:हिंदी हो या संस्कृत हो उसमें बोलने की ध्वनि को अगर अलग-अलग करना हो तो श्वर और व्यंजन में या अलग कर सकते हो जो की हिंदी भाषा में वर्णमाला के नाम से जाने जाते हैं और इनको ध्वनियों के रूप में भी अलग-अलग किया जा सकता है जैसा कि इस लेख में संस्कृत की ध्वनियों के रूप में इसे अलग-अलग दिखाया गया है जैसा कि आप लोगों को पता ही है की स्वर और व्यंजन एक दूसरे के पूरक हैं इसे हम भाषा की सबसे छोटी इकाई भी कहते हैं

संस्कृत ध्वनियाँ कितने प्रकार की होती हैं ?(Sanskrit Me Dhwaniyan )

उत्तर संस्कृत ध्वनियाँ -संस्कृत ध्वनियों को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है[Sanskrit Me Dhwaniyan]

(क) स्वर(Vowels), (ख) व्यंजन(Consonants)।

संस्कृत में स्वर तथा व्यंजनों की कुल संख्या 46 है।

(क) स्वर(Vowels)-

जो वर्ण किसी अन्य वर्ण की सहायता के बिना बोले जाते हैं उनहें स्वर कहते हैं।

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

Sanskrit Me Dhwaniyan

स्वर के तीन भेद होते हैं-[Sanskrit Me Dhwaniyan]

1. हस्व स्वर(Short Vowels), 2. दीर्घ स्वर(Long Vowels), 3. मिश्रित स्वर।

1. हस्व स्वर (Short Vowels)-हस्व स्वर पॉँच हैं- अ, इ, उ, ऋ लृ । इनके उच्चारण में कम समय लगता है।

2. दीर्घ स्वर(Long Vowels)- आ, ई, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। इन स्वरों के उच्चारणों में हस्व स्वरों की अपेक्षा दो गुना अधिक समय लगता है।

3. मिश्रित स्वर-मिश्रित स्वर चार हैं- इनका निर्माण दो भिन्न-भिन्न स्वरों के मिश्रण से होता है। इसलिए इन्हें मिश्रित स्वर कहते हैं, जो निम्न प्रकार हैं-

अ +ई =ए
अ + उ = ओ
अ + ए = ऐ
अ + ओ = औ

(ख) व्यंजन(Consonanats)-[Sanskrit Me Dhwaniyan]

जो वर्ण स्वर की सहायता के बिना नहीं बोले जाते उन्हें व्यंजन कहते हैं;

जैसे

क्  + अ = क 

ख्  + अ = ख,

ग्  + अ = ग,

घ्  + अ = घ

आदि।

Sanskrit Me Dhwaniyan

व्यंजनों के भेद-व्यंजनों को तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है-[Sanskrit Me Dhwaniyan]

1. स्पर्श व्यंजन।
2. अन्तःस्थ व्यंजन।
3. ऊष्म व्यंजन।

।. स्पर्श व्यंजन जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय जीभ को कण्द ता इत्यादि का पूर्ण स्पर्श करना पड़ता है उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं। इनकी संख्या 25 है

क , ख ,ग, घ,  ङ    क वर्ग
च, छ, ज, झ,  ञ   च वर्ग
ट ,ठ , ड , ढ़, ण   ट वर्ग
त, थ, द, ध, न   त वर्ग
प  ,फ ,ब ,भ , म     प वर्ग 

 

2, अन्तःस्थ व्यंजन स्वर तथा व्यंजन के मध्य अन्त:स्थ व्यंजन होते हैं। इनकी संख्या चार है य, र, ल, व।

3. ऊष्म व्यंजन जिन वर्णों का उच्चारण करते समय वायु मुख के विभिन्न भागों का स्पर्श करते हुए ऊष्म हो जाती है। उसे ऊष्म वर्ण व्यंजन  कहते हैं। ये वर्ण हैं श, ष ,स, ह।

संयुक्त व्यंजन-ऐसे व्यंजन जो एक से अधिक व्यंजनों से बनते हैं उन्हें संयुक्त व्यंजन कहते हैं; जैसे

क् + षू = क्ष,

त् + र= त्र,

ज + ज = ज्ञ,

श + र = श्र।

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व्यंजन किसे कहते हैं:व्यंजन कितने प्रकार के होते है

FAQ

प्र .संस्कृत ध्वनियाँ (Sanskrit Me Dhwaniyan )कितने प्रकार की होती हैं ?

उत्तर- 2 (दो )

प्र . व्यंजन किसे कहते है ?[Sanskrit Me Dhwaniyan]

उत्तर- जो स्वर की सहायता से बोले जाते है

प्र . स्वर किसे कहते है ?[Sanskrit Me Dhwaniyan]

उत्तर- जो स्वतंत्र रूप से बोले जाते है

प्र . सयुक्त व्यंजन किसे कहते है ?

उत्तर-ऐसे व्यंजन जो एक से अधिक व्यंजनों से बनते हैं उन्हें संयुक्त व्यंजन कहते हैं

प्र .     

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