7 आउटसोर्स कर्मचारी बर्खास्त, FIR और ब्लैकलिस्ट करने के आदेश

7 आउटसोर्स कर्मचारी बर्खास्त, FIR और ब्लैकलिस्ट करने के आदेश

अलीगढ़ नगर निगम में हाउस टैक्स वसूली के दौरान वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। लोगों से गृहकर की रकम लेने के बावजूद सरकारी खाते में पैसा जमा नहीं करने और टैक्स के बिलों में छेड़छाड़ करने के आरोप में सात आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने मामले की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यह कार्रवाई की है। साथ ही संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने और भविष्य में नगर निगम में उनकी तैनाती पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

 

यह मामला नगर निगम के संपत्ति कर विभाग से जुड़ा है, जहां गृहकर जमा कराने और बिलों में संशोधन के नाम पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने हाउस टैक्स की रकम जमा कर दी थी, लेकिन बाद में उनके पास दोबारा बिल पहुंच गए। इसके बाद लोगों ने नगर आयुक्त से शिकायत की। मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई गई, जिसमें सात कर्मचारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।

 

हाउस टैक्स की रकम जमा करने में कैसे हुई गड़बड़ी?

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर निगम में तैनात कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों पर आरोप था कि वे लोगों से हाउस टैक्स जमा कराने के नाम पर रकम ले रहे थे, लेकिन उसे सरकारी खाते में जमा नहीं किया जा रहा था। इसके अतिरिक्त, संपत्ति कर के बिलों में कथित तौर पर छेड़छाड़ करके टैक्स की राशि कम दिखाई जा रही थी।

 

आरोप है कि लाखों रुपये के गृहकर को घटाकर हजारों रुपये तक कर दिया गया था। इस तरह की गड़बड़ियों का पता उस समय चला, जब लोगों ने भुगतान करने के बाद भी अपने नाम से दोबारा हाउस टैक्स के बिल प्राप्त किए। इसके बाद शिकायतें नगर आयुक्त तक पहुंचीं और पूरे प्रकरण की जांच शुरू हुई।

 

नगर निगम के लिए यह मामला इसलिए भी गंभीर माना गया, क्योंकि संपत्ति कर से मिलने वाली राशि स्थानीय निकाय के राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इस धनराशि का उपयोग नगर निगम के विभिन्न कार्यों और नागरिक सुविधाओं से संबंधित खर्चों में किया जाता है। ऐसे में कर वसूली में अनियमितता होने से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

 

जांच रिपोर्ट के बाद सात कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त

 

नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने शिकायतों की जांच कराई। जांच में सात आउटसोर्स कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने के बाद उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया गया। इनमें कंप्यूटर ऑपरेटर, कॉल टेकर और बिल वितरक के पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं।

 

नगर निगम की ओर से की गई कार्रवाई में पहले सितंबर महीने में छह आउटसोर्स कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया था। इसके बाद शुक्रवार को एक और कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इस प्रकार संबंधित मामले में कुल सात कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।

 

नगर आयुक्त के निर्देश के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कूटरचना, जालसाजी, सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों के संबंध में कानूनी कार्रवाई की जानी है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

 

सातों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश

 

नगर आयुक्त ने कर अधीक्षक बेचन प्रसाद को निर्देश दिया है कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सुसंगत कानूनी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। साथ ही कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया है।

 

नगर निगम प्रशासन ने इस प्रकरण में मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप कार्रवाई किए जाने की बात कही है। सरकारी धन से संबंधित अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए सेवा समाप्ति के साथ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

इस कार्रवाई का उद्देश्य नगर निगम की कर वसूली व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना है। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच के दौरान संबंधित तथ्यों और आरोपों की कानूनी पड़ताल की जाएगी।

 

भविष्य में नगर निगम में तैनाती पर भी रोक

 

सेवा समाप्त करने के अलावा नगर आयुक्त ने सातों कर्मचारियों को भविष्य में नगर निगम अलीगढ़ में तैनात नहीं किए जाने के उद्देश्य से ब्लैकलिस्ट करने का आदेश भी जारी किया है। नगर निगम प्रशासन के अनुसार, कर्मचारियों पर काम में लापरवाही, प्रपत्रों में कथित कूटरचना, सरकारी धन के गबन, जालसाजी और दुरभिसंधि के माध्यम से निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप हैं।

 

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले के बाद संबंधित कर्मचारियों की नगर निगम में भविष्य की तैनाती पर रोक लगाने की प्रक्रिया भी कार्रवाई का हिस्सा है।

 

अलीगढ़ हाउस टैक्स मामले में बर्खास्त कर्मचारियों के नाम

 

नगर निगम की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कार्रवाई की जद में आए सात कर्मचारियों के नाम और उनके पद इस प्रकार हैं:

 

क्रम संख्या| कर्मचारी का नाम| पद

1| शुभम सक्सेना| कंप्यूटर ऑपरेटर, कर निर्धारण अधिकारी कार्यालय

2| अमित कुमार| कंप्यूटर ऑपरेटर, स्वास्थ्य विभाग

3| आशीष कुमार| कंप्यूटर ऑपरेटर, गृहकर विभाग

4| पंकज कुमार| कॉल टेकर कार्मिक

5| प्रशांत कुमार| बिल वितरक

6| सुमित सैनी| बिल वितरक

7| मनीष कुमार| बिल वितरक

 

नागरिकों के लिए क्या है इस मामले का महत्व?

 

हाउस टैक्स नगर निगम की महत्वपूर्ण राजस्व व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे मामलों में नागरिकों के लिए भुगतान का प्रमाण सुरक्षित रखना और भुगतान की स्थिति की पुष्टि करना उपयोगी होता है। यदि गृहकर जमा करने के बाद भी बकाया बिल प्राप्त होता है, तो संबंधित व्यक्ति को भुगतान की रसीद और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों के साथ नगर निगम के संबंधित विभाग में शिकायत करनी चाहिए।

 

डिजिटल या अन्य माध्यम से भुगतान करने के बाद रसीद प्राप्त करना भी जरूरी है। इससे भविष्य में भुगतान से संबंधित विवाद होने पर संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जा सकता है।

 

अलीगढ़ नगर निगम में सामने आए इस मामले में सात आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्ति, एफआईआर दर्ज कराने और ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश प्रशासन की कार्रवाई के प्रमुख बिंदु हैं। अब संबंधित आरोपों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।

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