72825 शिक्षक भर्ती पर बड़ा अपडेट: बेसिक शिक्षा निदेशक ने दाखिल किया हलफनामा

72825 शिक्षक भर्ती पर बड़ा अपडेट: बेसिक शिक्षा निदेशक ने दाखिल किया हलफनामा

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती एक बार फिर चर्चा में आ गई है। करीब डेढ़ दशक पहले शुरू हुई इस भर्ती से जुड़े विवाद का मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है। अब सुप्रीम कोर्ट में चल रही अवमानना याचिकाओं के बीच बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया है। हलफनामे में शेष अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर विभाग का पक्ष सामने रखा गया है।

शेष अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर क्या कहा गया?

दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती से संबंधित लंबे समय से चल रहे न्यायिक विवाद और बाद की परिस्थितियों को देखते हुए अब इस भर्ती के आधार पर किसी नए अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का आधार नहीं बचता। हालांकि, इस विषय पर अंतिम स्थिति न्यायालय के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

वर्ष 2011 में शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया के बाद से ही अलग-अलग न्यायिक मामलों के कारण नियुक्तियों को लेकर विवाद बना रहा। भर्ती में बड़ी संख्या में पदों पर नियुक्तियां हुईं, लेकिन कुछ पद और अभ्यर्थी लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े रहे। इसी वजह से समय-समय पर नियुक्ति की मांग भी सामने आती रही है।

नई भर्ती से रिक्त पद भरने का भी उल्लेख

हलफनामे में यह भी बताया गया है कि भर्ती से संबंधित शेष रिक्तियों को नई विज्ञप्ति के माध्यम से भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। विभाग का तर्क है कि पुरानी भर्ती प्रक्रिया को लंबे समय तक जारी रखने के बजाय वर्तमान नियमों और न्यायिक आदेशों के अनुरूप रिक्त पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

इससे 72,825 भर्ती के उन अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है, जो अभी भी पुरानी भर्ती के आधार पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। हालांकि, जब तक न्यायालय की ओर से अंतिम आदेश नहीं आता, तब तक पूरे मामले को अंतिम रूप से समाप्त मानना उचित नहीं होगा।

प्राथमिक शिक्षक भर्ती में डीएलएड और बीएड का मुद्दा

बेसिक शिक्षा निदेशक के हलफनामे में बीएड और डीएलएड की प्रशिक्षण योग्यता के अंतर का भी उल्लेख किया गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्राथमिक स्तर के बच्चों को पढ़ाने के लिए डीएलएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को उपयुक्त माना गया है।

विभाग की ओर से यह भी बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक के पद के लिए बीएड को उपयुक्त प्रशिक्षण योग्यता नहीं माना था। हालांकि, पहले से नियुक्त कुछ बीएड अभ्यर्थियों को न्यायालय के आदेशों के तहत राहत मिली थी। खास तौर पर 8 अप्रैल 2024 के आदेश में उन बीएड अभ्यर्थियों को राहत दी गई थी, जिनकी नियुक्ति बिना किसी न्यायिक शर्त के हुई थी और संबंधित विज्ञापन में बीएड को मान्य योग्यता के रूप में स्वीकार किया गया था।

66,555 नियुक्तियों को लेकर क्या हुआ था?

हलफनामे में स्टेट ऑफ यूपी बनाम शिव कुमार पाठक मामले का भी उल्लेख किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 के अपने फैसले में 66,555 नियुक्तियों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही शेष रिक्तियों को नई विज्ञप्ति के माध्यम से भरने की बात सामने आई थी।यह आदेश 72,825 शिक्षक भर्ती से जुड़े विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी के बाद भर्ती के बचे हुए पदों और अभ्यर्थियों को लेकर अलग-अलग स्तर पर कानूनी दावे सामने आते रहे हैं।

अंतरिम आदेश के आधार पर नियुक्ति की मांग

कुछ अभ्यर्थियों ने न्यायालय के अंतरिम आदेशों का हवाला देते हुए नियुक्ति की मांग की थी। उनका पक्ष था कि लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया के कारण उन्हें नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल 2024 को ऐसे दावों को खारिज कर दिया था।

इसके बाद भी मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ और कुछ अभ्यर्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिकाएं दाखिल की गईं। अब बेसिक शिक्षा निदेशक की ओर से दाखिल हलफनामे के बाद विभाग का पक्ष आधिकारिक रूप से न्यायालय के सामने है।

अब 72,825 भर्ती के अभ्यर्थियों को क्या उम्मीद?

नए हलफनामे के बाद 72,825 शिक्षक भर्ती के शेष अभ्यर्थियों के बीच नियुक्ति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विभाग की ओर से नियुक्ति का आधार नहीं बचने की बात कही गई है, लेकिन अंतिम निर्णय न्यायालय की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

इसलिए अभ्यर्थियों को अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना चाहिए। 72,825 शिक्षक भर्ती से जुड़ा अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। यदि न्यायालय विभाग के पक्ष को स्वीकार करता है तो शेष अभ्यर्थियों की पुरानी भर्ती के आधार पर नियुक्ति की संभावना काफी प्रभावित हो सकती है। वहीं, न्यायालय यदि कोई अलग निर्देश देता है तो आगे की प्रक्रिया उसी के अनुसार तय होगी।

अभ्यर्थियों के लिए जरूरी बात

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेसिक शिक्षा निदेशक का हलफनामा न्यायालय का अंतिम फैसला नहीं है। हलफनामा विभाग की ओर से रखा गया पक्ष है। इसलिए 72,825 भर्ती के अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और न्यायालय के अंतिम आदेश पर नजर रखनी होगी।पुरानी भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए यह मामला लंबे समय से उम्मीद और अनिश्चितता का विषय रहा है। अब दाखिल हुए हलफनामे से विभाग का रुख स्पष्ट हुआ है, लेकिन नियुक्ति को लेकर अंतिम स्थिति न्यायालय के निर्णय के बाद ही सामने आएगी।

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