8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों को ₹3 करोड़ का बीमा? पुराने CGEGIS नियमों में बदलाव की मांग

8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों को ₹3 करोड़ का बीमा? पुराने CGEGIS नियमों में बदलाव की मांग

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग केवल salary और allowances में बदलाव तक सीमित नहीं रहने वाला है। कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें CGEGIS यानी Central Government Employees Group Insurance Scheme में बड़े बदलाव की मांग भी शामिल है। संगठनों का कहना है कि मौजूदा insurance cover आज की महंगाई और परिवार की बढ़ती जरूरतों के मुकाबले काफी कम है।

कर्मचारी संगठनों के अनुसार, CGEGIS के तहत मिलने वाली बीमा राशि में लंबे समय से अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में अगर किसी सरकारी कर्मचारी की service के दौरान असमय मृत्यु हो जाती है, तो परिवार को मिलने वाला insurance cover पर्याप्त financial security नहीं दे पाता। इसी वजह से 8वें वेतन आयोग के सामने CGEGIS को नए सिरे से review करने की मांग उठाई गई है।

CGEGIS में बड़े बदलाव की मांग

CGEGIS केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए group insurance से जुड़ी योजना है। इसमें insurance के साथ savings component भी शामिल होता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था काफी पुरानी हो चुकी है और इसे आज की आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार update किया जाना चाहिए।

Ministerial Staff Association (MSA) की ओर से बीमा cover को मौजूदा स्तर से कम से कम 10 गुना बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। संगठन का तर्क है कि पिछले कई वर्षों में salary, महंगाई और परिवार की जरूरतों में काफी बदलाव आया है, लेकिन CGEGIS का insurance cover उसी अनुपात में नहीं बढ़ा है।

यही कारण है कि 8th Pay Commission से इस योजना की पूरी structure की समीक्षा करने और insurance benefit को realistic level पर लाने की मांग की जा रही है। कर्मचारियों का मानना है कि group insurance का उद्देश्य केवल एक औपचारिक benefit देना नहीं, बल्कि मुश्किल समय में परिवार को मजबूत financial support देना होना चाहिए।

Group A कर्मचारियों के लिए ₹3 करोड़ तक का प्रस्ताव

CGEGIS को लेकर Federation of National Postal Organisations (FNPO) ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। संगठन ने अलग-अलग employee groups के लिए बड़े insurance cover का प्रस्ताव रखा है।

प्रस्ताव के अनुसार Group C कर्मचारियों के लिए ₹1 करोड़, Group B के लिए ₹1.50 करोड़ और Group A कर्मचारियों के लिए ₹3 करोड़ तक का insurance cover दिए जाने की बात कही गई है। इसके साथ अलग-अलग स्तर के कर्मचारियों से monthly contribution लेने का सुझाव भी रखा गया है।

यहां यह समझना जरूरी है कि ₹3 करोड़ का insurance cover अभी सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया है। यह कर्मचारी संगठनों की ओर से 8वें वेतन आयोग के सामने रखा गया एक proposal है। अंतिम फैसला आयोग की recommendations और उसके बाद केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा।

पुराने CGEGIS नियमों में बदलाव क्यों जरूरी बताया जा रहा है?

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा CGEGIS व्यवस्था काफी पुरानी परिस्थितियों में तैयार हुई थी। उस समय salary levels और परिवार की financial requirements आज की तुलना में काफी अलग थीं। अब inflation बढ़ने के साथ education, health और daily expenses पर भी परिवारों का खर्च बढ़ा है।

ऐसे में कर्मचारियों का तर्क है कि insurance cover को पुराने आंकड़ों के आधार पर जारी रखना practical नहीं है। यदि कर्मचारी की अचानक मृत्यु हो जाती है, तो परिवार को मिलने वाली राशि लंबे समय तक आर्थिक सहारा देने में सक्षम होनी चाहिए। इसी वजह से CGEGIS में insurance component को ज्यादा मजबूत करने की मांग की जा रही है।

पहले भी वेतन आयोगों में उठ चुका है मुद्दा

CGEGIS के insurance cover और employee contribution को बढ़ाने का मुद्दा पहले भी वेतन आयोगों के सामने उठता रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अलग-अलग समय पर योजना में बदलाव की जरूरत पर चर्चा हुई, लेकिन अपेक्षित स्तर पर बदलाव नहीं हो सका।

FNPO ने सुझाव दिया है कि पहले 7वें वेतन आयोग से संबंधित प्रस्तावित insurance levels को लागू किया जाए। इसके बाद salary और inflation में होने वाले बदलाव के आधार पर insurance cover को समय-समय पर revise किया जाना चाहिए।

संगठन ने एक ऐसा mechanism बनाने का सुझाव भी दिया है, जिसमें महंगाई भत्ता यानी DA किसी निर्धारित स्तर तक पहुंचने पर insurance cover में automatic increase किया जा सके। इससे हर बार नई व्यवस्था के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया की जरूरत कम हो सकती है।

Insurance के साथ savings component में भी बदलाव की मांग

CGEGIS केवल insurance scheme नहीं है। इसमें savings का हिस्सा भी शामिल होता है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि मौजूदा समय में insurance protection को अधिक priority देने की जरूरत है।

उनका कहना है कि कर्मचारी की service के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को सबसे ज्यादा जरूरत तत्काल financial support की होती है। इसलिए insurance और savings के बीच मौजूदा ratio की भी समीक्षा की जानी चाहिए। अगर insurance component को बढ़ाया जाता है, तो इससे असमय मृत्यु की स्थिति में कर्मचारी के परिवार को ज्यादा आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।

8वें वेतन आयोग पर कर्मचारियों की नजर

8th Pay Commission से केंद्रीय कर्मचारियों को salary revision, allowances और दूसरी service benefits को लेकर काफी उम्मीदें हैं। लेकिन CGEGIS में संभावित बदलाव भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।

अगर कर्मचारी संगठनों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाता है, तो आने वाले समय में central government employees के insurance benefits में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। खासकर Group A के लिए ₹3 करोड़ तक और Group B तथा Group C के लिए करोड़ों रुपये के cover का प्रस्ताव इस मुद्दे को काफी महत्वपूर्ण बना रहा है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹3 करोड़ का CGEGIS insurance cover कोई final government decision नहीं है। फिलहाल यह कर्मचारी संगठनों की मांग और सुझाव के रूप में 8वें वेतन आयोग के सामने रखा गया है। आयोग की recommendations और केंद्र सरकार के अंतिम फैसले के बाद ही इसकी वास्तविक स्थिति साफ होगी।

निष्कर्ष

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए CGEGIS एक ऐसा benefit है, जिसका सीधा संबंध कर्मचारी और उसके परिवार की financial security से है। लंबे समय से insurance cover में बड़े बदलाव की मांग उठती रही है। अब 8वें वेतन आयोग के दौरान इस मुद्दे को फिर प्रमुखता मिलने से कर्मचारियों की उम्मीद बढ़ी है।

Group A के लिए ₹3 करोड़, Group B के लिए ₹1.50 करोड़ और Group C के लिए ₹1 करोड़ का insurance cover फिलहाल प्रस्ताव है, लागू नियम नहीं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वां वेतन आयोग इन सुझावों को कितनी गंभीरता से लेता है और केंद्र सरकार CGEGIS के पुराने नियमों में कितना बड़ा बदलाव करती है। आने वाले समय में इस पर होने वाला फैसला लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

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