कान की संरचना (Ear Anatomy)कान के तीन मुख्य भाग होते हैं:

- बाहरी कान (Outer Ear): इसमें पिन्ना (कान का बाहरी हिस्सा) और ईयर कैनाल शामिल है।
- मध्य कान (Middle Ear): इसमें ईयरड्रम और तीन छोटी हड्डियां (ossicles) होती हैं।
- अंदरूनी कान (Inner Ear): इसमें कोक्लीअ (सुनने के लिए) और वेस्टिबुलर सिस्टम (संतुलन के लिए) होते हैं।
कान के कार्य (Ear Functions)- सुनना: कान आवाज को सुनने में मदद करते हैं।
- संतुलन: अंदरूनी कान का वेस्टिबुलर सिस्टम संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
कान की देखभाल (Ear Care)- कानों को साफ रखना जरूरी है।
- ईयरबड्स से ज्यादा अंदर तक नहीं जाना चाहिए।
- ज्यादा शोर से बचाव करना चाहिए।
आम कान की समस्याएं (Common Ear Problems)- कान में दर्द या इन्फेक्शन।
- सुनने में परेशानी।
- कान में आवाज सुनाई देना (टिनिटस)।
कानों में आवाज कैसे पहुंचती है– आवाज बाहरी कान से प्रवेश करती है और ईयरड्रम तक पहुंचती है।
- ईयरड्रम कंपन करता है और ये कंपन मध्य कान की हड्डियों तक पहुंचते हैं।
- ये हड्डियां कंपनों को अंदरूनी कान तक पहुंचाती हैं जहां कोक्लीअ में इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलते हैं।
- ये सिग्नल ऑडिटरी नर्व के माध्यम से दिमाग तक पहुंचते हैं।
कानों की सुरक्षा– तेज आवाज या ज्यादा शोर से कानों को नुकसान हो सकता है।
- ईयरप्लग्स का उपयोग करके कानों को बचाया जा सकता है ज्यादा शोर वाले वातावरण में।
- नियमित जांच से कानों की सेहत का ध्यान रखा जा सकता है।
कानों से जुड़ी कुछ आम समस्याएं– कान का संक्रमण: कानों में संक्रमण हो सकता है जो दर्द और सुनने में समस्या कर सकता है।
- सुनने की कमी: उम्र बढ़ने से या शोर के कारण सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
- टिनिटस: कानों में बजने या गूंजने जैसी आवाज सुनाई देना।
- कानों की जांच: नियमित रूप से कानों की जांच करवाना जरूरी है, खासकर अगर आपको सुनने में परेशानी हो या कान में दर्द हो।
- कानों में पानी जाना: अगर कानों में पानी चला जाए तो सावधानी से सुखाना चाहिए। ज्यादा जोर से साफ करने से बचें।
- कानों के लिए सावधानियां: तेज संगीत या शोर वाले स्थानों पर ईयरप्लग्स का उपयोग करें।
- कान का मैल (Earwax): कान में थोड़ा मैल होना सामान्य है। लेकिन ज्यादा मैल जमा होने पर समस्या हो सकती है। डॉक्टर से सलाह लेकर साफ करवाना चाहिए।
- कानों में दर्द के कारण: कान में दर्द संक्रमण, ज्यादा शोर, या दबाव के कारण हो सकता है। अगर दर्द ज्यादा हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
- सुनने की क्षमता की जांच: अगर आपको लगता है कि सुनने में परेशानी हो रही है तो ऑडियोलॉजिस्ट से जांच करवाएं।
- कान की देखभाल: कानों को साफ रखना जरूरी है, लेकिन ईयरबड्स से ज्यादा अंदर तक नहीं जाना चाहिए क्योंकि इससे नुकसान हो सकता है।
- सुनने की क्षमता: उम्र बढ़ने के साथ-साथ या ज्यादा शोर में रहने से सुनने की क्षमता कम हो सकती है।
- कान के सामान्य समस्याएं: कान में दर्द, इन्फेक्शन, या सुनने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर ऐसा हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
- कान और संतुलन: अंदरूनी कान में vestibular system होता है जो शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
कान की बाहरी संरचना में मुख्य रूप से दो भाग होते हैं:
- पिन्ना (Pinna या Auricle): यह कान का बाहरी हिस्सा है जो दिखता है। यह ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करता है और उन्हें कान के अंदर की ओर भेजता है।
- बाहरी कान नलिका (External Auditory Canal): यह एक नली है जो पिन्ना से जुड़ती है और ध्वनि तरंगों को कान के पर्दे (Eardrum) तक पहुंचाती है।
कान की बाहरी संरचना का काम है:

- ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करना।
- उन्हें कान के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचाना।
कान की आंतरिक संरचना में मुख्य रूप से ये भाग होते हैं:

- कान का पर्दा (Eardrum या Tympanic Membrane): यह एक पतली झिल्ली है जो बाहरी कान नलिका के अंत में होती है। ध्वनि तरंगें इस पर पड़ती हैं और इसे कंपित करती हैं।
- मध्य कान (Middle Ear): इसमें तीन छोटी हड्डियां (Ossicles) होती हैं – मैलियस, इन्कस, और स्टेप्स। ये हड्डियां ध्वनि को आंतरिक कान तक पहुंचाती हैं।
- आंतरिक कान (Inner Ear): इसमें कोक्लीआ (Cochlea) होता है जो ध्वनि को विद्युत संकेतों में बदलता है। इसके अलावा वेस्टिबुलर सिस्टम संतुलन में मदद करता है।
कान की आंतरिक संरचना का काम है:
- ध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलना।
- संतुलन बनाए रखने में मदद करना।
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