सोलर पैनल लगाने पर बिना गारंटी 2 लाख रुपये का लोन, 3 किलोवाट से हर महीने 375 यूनिट बिजली उत्पादन; ₹98 हजार तक अनुदान का फायदा

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सोलर पैनल लगाने पर बिना गारंटी 2 लाख रुपये का लोन, 3 किलोवाट से हर महीने 375 यूनिट बिजली उत्पादन; ₹98 हजार तक अनुदान का फायदा

बिजली का बिल हर महीने घरेलू बजट पर असर डालता है। ऐसे में अगर घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली का उत्पादन हो जाए और शुरुआती खर्च के लिए बैंक से कम ब्याज पर लोन भी मिल जाए, तो यह सुविधा काफी राहत देने वाली हो सकती है। खासकर उन घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है, जो अपने घर पर रूफटॉप सोलर लगाने की योजना बना रहे हैं।

दिए गए विवरण के अनुसार, 3 किलोवाट का ग्रिड कनेक्टेड सोलर पैनल लगाने के लिए बैंक बिना गारंटी के 2 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध करा सकते हैं। इस ऋण पर सालाना 5.75 प्रतिशत ब्याज दर बताई गई है। यह सुविधा पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत कम ब्याज दर पर उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उपभोक्ता को सोलर प्लांट लगाने की शुरुआती लागत का पूरा बोझ एक साथ न उठाना पड़े।

रूफटॉप सोलर की खास बात यह है कि इसमें घर की छत पर ही बिजली का उत्पादन किया जाता है। 3 किलोवाट का सोलर पैनल औसतन हर महीने करीब 375 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। हालांकि वास्तविक उत्पादन मौसम और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। इसके अलावा, नेट स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली उत्पादन और खपत का हिसाब रखा जाएगा। यही व्यवस्था उपभोक्ता को अपनी जरूरत के अनुसार बिजली के इस्तेमाल को समझने में मदद करेगी।

बिना गारंटी 2 लाख रुपये तक का लोन कैसे मदद करेगा?

सोलर पैनल लगाने में सबसे बड़ी चुनौती अक्सर शुरुआती लागत होती है। बिजली उपभोक्ता सोलर लगाना तो चाहते हैं, लेकिन एक साथ बड़ी रकम खर्च करना हर परिवार के लिए आसान नहीं होता। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए 2 लाख रुपये तक के बिना गारंटी लोन की सुविधा महत्वपूर्ण हो जाती है। दिए गए विवरण के अनुसार, बैंक 5.75 प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर यह ऋण उपलब्ध कराएंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि उपभोक्ता सोलर पैनल लगाने वाली एजेंसी को भुगतान कर सके और शुरुआती खर्च के कारण योजना को टालना न पड़े। यानी यदि किसी परिवार के पास सोलर प्लांट लगाने के लिए पूरी रकम तत्काल उपलब्ध नहीं है, तो लोन की सुविधा उसके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

इसके लिए बिजली कंपनी को आवेदन देना होगा। आवेदन के बाद उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार सोलर लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यहां यह समझना जरूरी है कि लोन की वास्तविक स्वीकृति बैंक और संबंधित प्रक्रिया के नियमों के अनुसार होगी। इसलिए उपभोक्ता को आवेदन करने से पहले संबंधित बिजली कंपनी या बैंक से मौजूदा नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

राज्य में अब तक 26 हजार उपभोक्ताओं द्वारा रूफटॉप सोलर लगाए जाने की जानकारी दी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि घरेलू स्तर पर सोलर बिजली की ओर लोगों की रुचि बढ़ रही है। आने वाले समय में अगर अधिक परिवार इस व्यवस्था को अपनाते हैं, तो घरों में बिजली उत्पादन की भूमिका भी बढ़ सकती है।

3 किलोवाट सोलर पैनल लगाने में कितना खर्च आएगा?

दिए गए आंकड़ों के अनुसार, एक किलोवाट ग्रिड कनेक्टेड सोलर पैनल लगाने की औसत लागत करीब 60 हजार रुपये बताई गई है। इसी हिसाब से 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगाने में लगभग 1.80 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा लोहे का स्टैंड लगाने पर लगभग 10 हजार से 20 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च बताया गया है।

इस तरह केवल पैनल की लागत देखने के बजाय स्टैंड और अन्य जरूरी खर्च को भी ध्यान में रखना जरूरी है। किसी भी उपभोक्ता के लिए सोलर लगाने से पहले कुल अनुमानित खर्च समझना बेहतर रहेगा। इससे बाद में अतिरिक्त लागत को लेकर परेशानी कम हो सकती है।

यहां सरकारी अनुदान की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। दिए गए विवरण के अनुसार, 3 किलोवाट सोलर पैनल पर केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता था। अब राज्य सरकार की ओर से 20 हजार रुपये का अतिरिक्त अनुदान दिए जाने की जानकारी है। इस तरह कुल अनुदान 98 हजार रुपये तक बताया गया है।

अगर 3 किलोवाट सोलर पैनल की लागत 1.80 लाख रुपये मानी जाए और उसमें 98 हजार रुपये का अनुदान घटाया जाए, तो शुरुआती लागत का बड़ा हिस्सा कम हो सकता है। हालांकि वास्तविक भुगतान और अनुदान प्राप्त होने की प्रक्रिया संबंधित नियमों और स्वीकृति पर निर्भर करेगी। इसलिए उपभोक्ता को केवल अनुमान के आधार पर निर्णय लेने के बजाय आवेदन के समय उपलब्ध आधिकारिक जानकारी देखनी चाहिए।

1, 2 और 3 किलोवाट पर कितना अनुदान?

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक सोलर पैनल की क्षमता के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग अनुदान बताया गया है। 1 किलोवाट सिस्टम की लागत करीब 60 हजार रुपये है, जिस पर केंद्र की ओर से 30 हजार रुपये और राज्य की ओर से 10 हजार रुपये अनुदान बताया गया है।

2 किलोवाट सोलर पैनल की लागत करीब 1.20 लाख रुपये बताई गई है। इस पर केंद्र सरकार की ओर से 60 हजार रुपये और राज्य सरकार की ओर से 20 हजार रुपये अनुदान का उल्लेख है। वहीं 3 किलोवाट सिस्टम की अनुमानित लागत 1.80 लाख रुपये है। इसके लिए केंद्र अनुदान 78 हजार रुपये और राज्य अनुदान 20 हजार रुपये बताया गया है।

यह आंकड़े उन उपभोक्ताओं के लिए खास तौर पर उपयोगी हैं जो सोलर पैनल की क्षमता को लेकर फैसला करना चाहते हैं। अगर किसी परिवार की बिजली खपत अधिक है, तो उसके लिए अधिक क्षमता वाला सोलर सिस्टम उपयोगी हो सकता है। दूसरी ओर, कम बिजली खपत वाले परिवार अपनी जरूरत के हिसाब से छोटी क्षमता वाला सिस्टम चुन सकते हैं।

राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। दिए गए विवरण के अनुसार, इससे करीब 5 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के अनुसार, राज्य सरकार का अनुदान हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद करेगा और सोलर प्लांट लगाने की शुरुआती लागत कम होगी।

पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर मिलेगा राज्य अनुदान

राज्य अनुदान को लेकर दी गई जानकारी में यह भी बताया गया है कि इसका लाभ पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर उपभोक्ताओं को मिलेगा। ऊर्जा सचिव अजय यादव के अनुसार, अनुदान का लाभ इसी आधार पर दिए जाने की बात कही गई है।

इसका मतलब यह है कि जो उपभोक्ता रूफटॉप सोलर लगाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें आवेदन प्रक्रिया को लेकर बहुत ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए। हालांकि आवेदन की अंतिम प्रक्रिया, पात्रता और उपलब्धता

स्मार्ट मीटर से होगा बिजली का हिसाब

ग्रिड कनेक्टेड सोलर सिस्टम में बिजली के उत्पादन और खपत का हिसाब रखना जरूरी होता है। दिए गए विवरण के अनुसार, इसके लिए नेट स्मार्ट मीटर का इस्तेमाल किया जाएगा। इस मीटर के माध्यम से यह देखा जा सकेगा कि घर में कितनी बिजली की खपत हुई और सोलर पैनल से कितनी बिजली पैदा हुई।

इस व्यवस्था को आसान तरीके से समझें तो यदि किसी महीने सोलर पैनल से ज्यादा बिजली का उत्पादन हुआ और घर में कम बिजली इस्तेमाल हुई, तो अतिरिक्त यूनिट अगले महीने के लिए शिफ्ट हो सकती है। वहीं यदि किसी समय बिजली की खपत उत्पादन से अधिक हो जाती है, तो अतिरिक्त बिजली के लिए भुगतान करना पड़ सकता है।

यही वजह है कि सोलर सिस्टम को केवल पैनल लगाने तक सीमित नहीं समझना चाहिए। स्मार्ट मीटर बिजली की पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जरिए उपभोक्ता को अपनी बिजली खपत और सोलर उत्पादन का बेहतर अंदाजा मिल सकता है।

सोलर लगाने वाली एजेंसी द्वारा मेंटेनेंस की व्यवस्था किए जाने की भी जानकारी दी गई है। इससे उपभोक्ता को सिस्टम की देखभाल को लेकर कुछ सुविधा मिल सकती है। हालांकि मेंटेनेंस से जुड़े वास्तविक नियम और जिम्मेदारियां संबंधित एजेंसी तथा योजना की शर्तों पर निर्भर करेंगी।

3 किलोवाट सोलर से हर महीने 375 यूनिट बिजली

3 किलोवाट का सोलर पैनल इस पूरी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिए गए विवरण के अनुसार, इससे औसतन हर महीने करीब 375 यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकता है। अगर घर की बिजली खपत इस उत्पादन के आसपास रहती है, तो बिजली बिल में काफी अंतर देखने को मिल सकता है।

इसके अलावा 500 यूनिट बिजली की खपत पर कोई बिल नहीं देने की बात दी गई जानकारी में कही गई है। इसमें 125 यूनिट बिजली राज्य सरकार की ओर से मुफ्त मिलने की बात बताई गई है। इसके बाद 3 किलोवाट का सोलर पैनल औसतन 375 यूनिट बिजली का उत्पादन कर सकता है।

इस गणना को समझने पर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर पैनल का महत्व साफ दिखाई देता है। अगर बिजली की जरूरत और सोलर उत्पादन के बीच अच्छा संतुलन बन जाता है, तो परिवार को बिजली बिल के मामले में राहत मिल सकती है।

हालांकि बिजली उत्पादन हर महीने बिल्कुल एक जैसा नहीं रहेगा। मौसम और सोलर पैनल को मिलने वाली धूप जैसी परिस्थितियों का असर उत्पादन पर पड़ सकता है। इसलिए 375 यूनिट को औसत उत्पादन के रूप में समझना बेहतर है, न कि हर महीने निश्चित उत्पादन की गारंटी के रूप में।

बिजली की दर 3.87 रुपये प्रति यूनिट होने पर क्या फायदा होगा?

दिए गए विवरण के अनुसार, टाइम ऑफ डे टैरिफ लागू होने के बाद औसतन बिजली की दर 3.87 रुपये प्रति यूनिट बताई गई है। इस दर को आधार मानकर सोलर से होने वाली बिजली की बचत को समझा जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर अगर 375 यूनिट बिजली का उत्पादन सोलर पैनल से होता है और इतनी ही बिजली की जरूरत घर में होती है, तो उपभोक्ता को उतनी मात्रा में बाहर से बिजली खरीदने की जरूरत कम हो सकती है। 3.87 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से 375 यूनिट की कीमत लगभग 1,451 रुपये बैठती है। यह केवल दिए गए आंकड़ों पर आधारित एक सामान्य गणना है; वास्तविक बचत बिजली खपत, उत्पादन और बिलिंग व्यवस्था के अनुसार अलग हो सकती है।

यही कारण है कि सोलर पैनल को लंबे समय के नजरिए से देखने की जरूरत है। शुरुआत में पैनल, स्टैंड और अन्य खर्च होते हैं, लेकिन इसके साथ अनुदान और लोन की सुविधा शुरुआती आर्थिक बोझ को कम कर सकती है। इसके बाद सोलर से पैदा होने वाली बिजली घर की नियमित जरूरत में इस्तेमाल की जा सकती है।

किन लोगों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है?

अगर आप घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं और आपके घर की छत पर पर्याप्त जगह उपलब्ध है, तो रूफटॉप सोलर आपके लिए विचार करने योग्य विकल्प हो सकता है। खासकर ऐसे परिवार जिनकी बिजली खपत नियमित और अपेक्षाकृत अधिक है, वे 3 किलोवाट सिस्टम के अनुमानित उत्पादन को अपनी जरूरत के साथ जोड़कर देख सकते हैं।

हालांकि सोलर पैनल लगवाने से पहले केवल अनुदान देखकर फैसला करना उचित नहीं होगा। कुल लागत, छत की स्थिति, बिजली की खपत, उपलब्ध धूप, स्मार्ट मीटर की व्यवस्था और लोन की शर्तों को समझना जरूरी है। इससे आपको यह तय करने में आसानी होगी कि आपके लिए कौन-सी क्षमता का सिस्टम बेहतर रहेगा।

साथ ही आवेदन करने से पहले बिजली कंपनी से मौजूदा नियमों की जानकारी लेना भी जरूरी है। योजनाओं की राशि, प्रक्रिया और शर्तों में समय के साथ बदलाव हो सकते हैं। इसलिए अंतिम निर्णय हमेशा संबंधित विभाग या अधिकृत एजेंसी से पुष्टि करने के बाद ही लेना बेहतर रहेगा।

सोलर पैनल के लिए आवेदन कैसे करें? Step by Step Guide

Step 1: पीएम सूर्य घर योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं।

Step 2: अपने राज्य और बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) का चयन करें।

Step 3: अपना बिजली कनेक्शन नंबर और मांगी गई अन्य जानकारी दर्ज करें।

Step 4: आवेदन फॉर्म भरकर उसे ऑनलाइन सबमिट करें।

Step 5: आवेदन के बाद पोर्टल पर उपलब्ध अधिकृत सोलर विक्रेता का चयन करें।

Step 6: चुनी गई एजेंसी से अपने घर की छत पर रूफटॉप सोलर पैनल लगवाएं।

Step 7: सोलर सिस्टम लगने के बाद DISCOM द्वारा निरीक्षण और मीटर से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कराएं।

Step 8: पोर्टल पर बैंक खाते की आवश्यक जानकारी और मांगे गए दस्तावेज जमा करें।

Step 9: सिस्टम का सत्यापन और कमीशनिंग पूरी होने के बाद सब्सिडी की प्रक्रिया पूरी होगी।

Step 10: अगर सोलर पैनल के लिए लोन लेना है, तो संबंधित बैंक से लोन के लिए आवेदन करें और बैंक की शर्तों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करें।

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