रसोइयों के लिए बड़ी खुशखबरी, मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ोतरी, अब हर महीने मिलेंगे 3000 रुपये

रसोइयों के लिए बड़ी खुशखबरी, मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ोतरी, अब हर महीने मिलेंगे 3000 रुपये

Yogi Cabinet Decision: उत्तर प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में मिड डे मील तैयार करने वाली लाखों रसोइयों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहीं रसोइयों के हित में योगी सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब प्रदेश में मिड डे मील बनाने वाली रसोइयों को पहले के मुकाबले 1000 रुपये अधिक मानदेय मिलेगा। उनका मासिक मानदेय 2000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश की करीब 3.53 लाख रसोइयों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

रसोइये सरकारी स्कूलों की मिड डे मील व्यवस्था का एक अहम हिस्सा हैं। सुबह से ही स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर होती है। बड़ी संख्या में बच्चे प्रतिदिन स्कूल में मिलने वाले गर्म और पौष्टिक भोजन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में रसोइयों की भूमिका केवल खाना बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। लंबे समय से कम मानदेय में काम कर रही इन रसोइयों के लिए 1000 रुपये की यह बढ़ोतरी भले ही बहुत बड़ी न लगे, लेकिन घरेलू खर्चों के बीच यह राशि उनके लिए निश्चित रूप से कुछ राहत लेकर आएगी।

योगी सरकार ने लिया मानदेय बढ़ाने का फैसला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में शासनादेश जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। दी गई जानकारी के अनुसार, सितंबर 2026 से बढ़ा हुआ मानदेय लागू किया जाना है और इसकी राशि अक्तूबर में मिलने वाले मानदेय में शामिल होकर मिलने की बात कही गई है।

सरकार के इस फैसले को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रसोइये लंबे समय से अपने मानदेय में वृद्धि की मांग कर रहे थे। महंगाई बढ़ने के साथ रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च भी लगातार बढ़ा है। ऐसे में 2000 रुपये मासिक मानदेय में काम करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा था। अब 3000 रुपये मासिक मानदेय मिलने से उन्हें पहले की तुलना में कुछ अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।

मानदेय में इस वृद्धि का असर सरकारी खजाने पर भी पड़ेगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 1000 रुपये प्रति रसोइया मासिक बढ़ोतरी के कारण सरकार पर हर महीने लगभग 35.35 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है। वहीं सालाना आधार पर यह अतिरिक्त भार करीब 424 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार ने प्रदेश की बड़ी संख्या में कार्यरत रसोइयों को राहत देने के लिए कितनी बड़ी राशि का प्रावधान किया है।

यूपी में 3.53 लाख रसोइये तैयार करती हैं मिड डे मील

उत्तर प्रदेश के परिषदीय और एडेड स्कूलों में मिड डे मील योजना के तहत बड़ी संख्या में रसोइये काम कर रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के करीब 1.41 लाख परिषदीय और एडेड स्कूलों में लगभग 3.53 लाख रसोइये बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 1.46 करोड़ विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन मिड डे मील तैयार किया जाता है।

स्कूलों में बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया में रसोइयों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। सुबह से भोजन की तैयारी, सब्जियां काटना, खाना पकाना और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने तक कई जिम्मेदारियां इनके हिस्से में आती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक स्कूलों में रसोइये लंबे समय से इस व्यवस्था को संभालती आ रही हैं।

मिड डे मील केवल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की योजना नहीं है। इसका एक उद्देश्य यह भी है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे नियमित रूप से स्कूल आएं और पढ़ाई से जुड़े रहें। स्कूल में मिलने वाला भोजन बच्चों के लिए आकर्षण का एक कारण भी बनता है। इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर लागू करने में रसोइयों का योगदान अहम है। इसलिए मानदेय में बढ़ोतरी को उनके काम की उपयोगिता और जिम्मेदारी से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

 कितना मिलता था रसोइयों को मानदेय?

उत्तर प्रदेश में स्कूलों में काम करने वाली रसोइयों का मानदेय समय-समय पर बढ़ाया गया है। शुरुआत में रसोइयों को 1000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता था। उस समय इस राशि में केंद्र और राज्य सरकार दोनों का योगदान शामिल था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले 1000 रुपये के मानदेय में 600 रुपये केंद्रांश और 400 रुपये राज्यांश शामिल था।

इसके बाद वर्ष 2019 में रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी की गई और इसे 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। इससे रसोइयों को पहले की तुलना में 500 रुपये अधिक मिलने लगे। हालांकि, समय के साथ महंगाई और घरेलू खर्च बढ़ने के कारण रसोइयों की ओर से मानदेय बढ़ाने की मांग लगातार बनी रही।

वर्ष 2022 में एक बार फिर मानदेय बढ़ाया गया। उस समय इसे 1500 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। इस राशि में केंद्र सरकार का 600 रुपये का अंश और राज्य सरकार का 1400 रुपये का अंश शामिल बताया गया है। अब वर्ष 2026 में सरकार ने इसमें फिर से 1000 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए मानदेय को 3000 रुपये कर दिया है।

इस तरह पिछले कुछ वर्षों में रसोइयों के मानदेय में लगातार वृद्धि हुई है। हालांकि, रसोइयों की ओर से समय-समय पर यह मांग उठती रही है कि उनकी जिम्मेदारियों और बढ़ती महंगाई को देखते हुए मानदेय को और बेहतर किया जाए।

2026 में अब मिलेगा 3000 रुपये मासिक मानदेय

वर्ष 2026 में हुई नई बढ़ोतरी के बाद रसोइयों को अब 3000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। यानी वर्ष 2022 में मिलने वाले 2000 रुपये की तुलना में उन्हें हर महीने 1000 रुपये अधिक प्राप्त होंगे। साल के हिसाब से देखें तो एक रसोइये को पहले की तुलना में 12,000 रुपये सालाना अधिक मिलेंगे।

यह राशि सीधे तौर पर रसोइयों के घरेलू बजट में अतिरिक्त मदद कर सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए जहां आय के सीमित साधन हैं, अतिरिक्त 1000 रुपये की मासिक राशि छोटी नहीं होती। इससे दैनिक जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, घर के सामान या अन्य आवश्यक खर्चों में कुछ सहायता मिल सकती है।

सरकार की ओर से रसोइयों को मानदेय के अलावा अन्य सुविधाओं का भी प्रावधान बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें 500 रुपये यूनिफॉर्म और 400 रुपये ग्लव्स के लिए अतिरिक्त दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य रसोइयों को स्कूल में भोजन तैयार करते समय आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

सितंबर से लागू होगा बढ़ा हुआ मानदेय

नई बढ़ोतरी को लेकर रसोइयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बढ़ा हुआ मानदेय कब से मिलेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सितंबर 2026 से 3000 रुपये का बढ़ा हुआ मानदेय लागू किया जाना है। इसके बाद सितंबर का बढ़ा हुआ मानदेय अक्तूबर में मिलने वाले भुगतान में जोड़े जाने की बात कही गई है।

इससे रसोइयों को अपनी आय में हुई बढ़ोतरी का लाभ जल्द मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक भुगतान की तारीख और प्रक्रिया संबंधित विभाग की ओर से जारी होने वाले शासनादेश और निर्देशों के अनुसार तय होगी। इसलिए रसोइयों को विभागीय आदेश और अपने स्कूल स्तर पर मिलने वाली जानकारी पर नजर रखनी चाहिए।

एक नजर में रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी

रसोइयों के मानदेय में हुई बढ़ोतरी को अगर आसान भाषा में समझें तो शुरुआत में उन्हें 1000 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। वर्ष 2019 में यह राशि बढ़कर 1500 रुपये हुई। इसके बाद वर्ष 2022 में इसे 2000 रुपये कर दिया गया। अब वर्ष 2026 में सरकार ने इसमें 1000 रुपये की और बढ़ोतरी करते हुए मासिक मानदेय 3000 रुपये कर दिया है।

इस बदलाव को एक छोटे उदाहरण से समझ सकते हैं। अगर कोई रसोइया वर्ष 2025-26 तक 2000 रुपये मासिक मानदेय प्राप्त कर रही थी, तो नई व्यवस्था में उसे हर महीने 3000 रुपये मिलेंगे। यानी उसके मासिक मानदेय में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पूरे साल के हिसाब से पहले 24,000 रुपये मिलते थे, जबकि नई दर के अनुसार सालाना मानदेय 36,000 रुपये होगा। इस तरह साल भर में 12,000 रुपये की अतिरिक्त राशि मिलेगी।

3.53 लाख रसोइयों को मिलेगा फायदा

सरकार के इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि इसका लाभ किसी एक जिले या कुछ स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश के करीब 3.53 लाख रसोइये इससे लाभान्वित होंगे। ये रसोइये उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में स्थित परिषदीय और एडेड स्कूलों में बच्चों के लिए मिड डे मील तैयार करती हैं।

प्रदेश में स्कूलों की संख्या और विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में मिड डे मील योजना को सफलतापूर्वक चलाने के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। रसोइये इस व्यवस्था की जमीनी कड़ी हैं। बच्चों तक भोजन पहुंचाने की प्रक्रिया में उनका काम रोजाना और लगातार चलता है।

कई रसोइयों के लिए यह काम परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में मानदेय में वृद्धि से उन्हें आर्थिक रूप से कुछ राहत मिलना स्वाभाविक है। सरकार के इस निर्णय से यह संदेश भी जाता है कि स्कूलों में भोजन व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।

शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के बाद रसोइयों को राहत

उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों से जुड़े कर्मचारियों और मानदेय पर काम करने वाले कर्मियों के भुगतान को लेकर समय-समय पर मांग उठती रही है। हाल के समय में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि की खबरों के बाद रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग भी चर्चा में थी।

अब रसोइयों के मानदेय में 1000 रुपये की वृद्धि किए जाने से उन्हें भी राहत मिली है। लंबे समय से अपनी मांग को लेकर आवाज उठा रहीं रसोइयों के लिए यह फैसला उम्मीद बढ़ाने वाला है। हालांकि, आगे भी महंगाई और काम की जिम्मेदारियों के अनुसार मानदेय में सुधार की मांग जारी रह सकती है।

सरकार पर कितना बढ़ेगा आर्थिक भार?

मानदेय बढ़ाने का निर्णय सीधे तौर पर सरकारी बजट से जुड़ा हुआ है। करीब 3.53 लाख रसोइयों के मानदेय में 1000 रुपये मासिक की वृद्धि होने पर सरकार को हर महीने लगभग 35.35 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। सालाना आधार पर यह रकम करीब 424 करोड़ रुपये बैठती है।

इस अतिरिक्त खर्च के बावजूद सरकार ने रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी का फैसला किया है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश की मिड डे मील व्यवस्था में काम करने वाले इन कर्मचारियों को राहत देने के लिए सरकार ने अतिरिक्त वित्तीय भार उठाने का निर्णय लिया है।

हालांकि, रसोइयों के लिए केवल मानदेय की राशि ही महत्वपूर्ण नहीं है। समय पर भुगतान, काम के दौरान आवश्यक सुविधाएं और सम्मानजनक कार्य वातावरण भी उतने ही जरूरी हैं। यदि इन सभी पहलुओं पर लगातार ध्यान दिया जाए तो मिड डे मील व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकता है।

रसोइयों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

किसी भी योजना की सफलता केवल कागज पर बने नियमों से नहीं होती। उसकी असली सफलता उन लोगों के काम पर निर्भर करती है जो उसे जमीन पर लागू करते हैं। मिड डे मील योजना में रसोइयों की भूमिका इसी तरह की है। वे रोजाना बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं और स्कूल की भोजन व्यवस्था को संभालती हैं।

बढ़ती महंगाई के दौर में 1000 रुपये की अतिरिक्त मासिक राशि उनके लिए कुछ राहत जरूर दे सकती है। विशेषकर कम आय वाले परिवारों में यह पैसा रोजमर्रा की जरूरतों में काम आ सकता है। कई परिवारों के लिए यह राशि बच्चों की पढ़ाई या घर के जरूरी खर्चों को पूरा करने में भी सहायक हो सकती है।

इस फैसले की अहमियत केवल बढ़ी हुई रकम तक सीमित नहीं है। यह उन हजारों महिलाओं और कर्मचारियों के लिए भी राहत का संकेत है जो वर्षों से स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन बनाने का काम कर रही हैं। उनके काम को अक्सर पर्दे के पीछे का काम माना जाता है, लेकिन स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था को चलाने में उनकी मेहनत बेहद जरूरी है।

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