जनगणना 2027: 800 की आबादी पर बनेगा एक जनगणना ब्लॉक, तैयारियों में जुटा निदेशालय
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जनगणना की तैयारियां अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं। जनगणना की तारीखें घोषित होने के बाद निदेशालय ने फील्ड वर्क को व्यवस्थित करने की कवायद शुरू कर दी है। दूसरे चरण में घर-घर जाकर लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके लिए अब जनगणना ब्लॉक तैयार किए जा रहे हैं। एक जनगणना ब्लॉक में करीब 800 की आबादी को शामिल किया जाएगा, ताकि एक प्रगणक पर काम का बोझ ज्यादा न हो और लोगों से जुड़ी जानकारी सही तरीके से दर्ज की जा सके।
पहले चरण में House Listing Survey के दौरान हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाए गए थे। अब इन्हीं ब्लॉक को जनगणना ब्लॉक में बदला जाएगा। निदेशालय ने जिलों को निर्देश दिए हैं कि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक की आबादी के आधार पर नए जनगणना ब्लॉक तय किए जाएं। कोशिश रहेगी कि एक प्रगणक के पास औसतन 800 से 850 लोगों की जिम्मेदारी हो। उदाहरण के तौर पर अगर किसी हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में करीब 400 घर और 1100 लोगों की आबादी है, तो उसे दो जनगणना ब्लॉक में बांटा जा सकता है।
जनगणना ब्लॉक की संख्या तय होने के बाद इसे Freeze कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि बाद में जरूरत पड़ने पर जनगणना ब्लॉक की संख्या बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इसे कम नहीं किया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि जनगणना के दौरान किसी क्षेत्र की आबादी छूट न जाए और प्रत्येक परिवार तक प्रगणक आसानी से पहुंच सके।
16 नवंबर से शुरू होगा Self Enumeration
जनगणना के दूसरे चरण में लोगों को Self Enumeration यानी स्वगणना की सुविधा भी मिलेगी। इसके तहत लोग खुद ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश में 16 नवंबर से 30 नवंबर तक स्वगणना का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इसके बाद 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।
विभाग की कोशिश है कि शहरी इलाकों, कार्यालयों और Housing Societies में ज्यादा से ज्यादा लोग Self Enumeration का इस्तेमाल करें। इसके लिए विशेष Awareness Campaign भी चलाया जाएगा। लोगों को इस सुविधा के बारे में जानकारी देने के लिए प्रमुख चेहरों को भी अभियान से जोड़ा जा सकता है। स्वगणना करने वाले घरों के Address पर Self Enumeration ID भी लगाई जाएगी। इससे प्रगणक को उस घर की पहचान करने में आसानी होगी और फील्ड वर्क में समय भी बचेगा।
सामान्य परिवारों के साथ बेघर लोगों की भी होगी गिनती
जनगणना में आबादी का पूरा Coverage सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सामान्य परिवारों की गिनती के साथ Slum Areas, घनी बस्तियों और किराएदारों की जानकारी जुटाने पर भी विशेष फोकस रहेगा। इसका उद्देश्य यह है कि कोई परिवार जनगणना प्रक्रिया से बाहर न रह जाए।
इसके अलावा Institutional Areas में रहने वाले लोगों की भी गिनती की जाएगी। इनमें जेल, वृद्धाश्रम, Hostel और Registered PG जैसे स्थान शामिल हैं। इन जगहों पर रहने वाले लोगों की जानकारी को भी जनगणना के आंकड़ों में शामिल किया जाएगा।
बेघर परिवारों की गिनती पर रहेगा खास फोकस
जनगणना के दौरान बेघर परिवारों की गिनती को भी अलग प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए Railway Station, Bus Station, बाजार, Construction Sites, Labour Addas और पूजा स्थलों जैसे स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इन जगहों पर रहने या रात गुजारने वाले लोगों की जानकारी जुटाना भी जनगणना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
बेघर परिवारों की गिनती फील्ड वर्क के आखिरी दिन शाम के बाद की जाएगी। जारी कार्यक्रम के अनुसार 4 जनवरी को शाम के बाद ऐसे लोगों की गणना की जाएगी। इस व्यवस्था से उन लोगों को भी जनगणना में शामिल करने की कोशिश होगी, जिनका कोई स्थायी Address नहीं है।
कुल मिलाकर, जनगणना 2027 के लिए उत्तर प्रदेश में तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच रही हैं। 800 से 850 की आबादी पर एक प्रगणक का भार रखने से फील्ड वर्क को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। वहीं Self Enumeration की सुविधा से लोगों को अपनी जानकारी खुद दर्ज करने का मौका मिलेगा। सबसे अहम बात यह है कि सामान्य परिवारों के साथ संस्थागत क्षेत्रों और बेघर लोगों को भी गिनती में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। सही और व्यापक जनगणना के लिए यह तैयारी आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
