स्कूल लंबे समय तक बंद तो हर सप्ताह 20 मिनट की शिक्षक से बात बढ़ा सकती है बच्चों की पढ़ाई

स्कूल लंबे समय तक बंद तो हर सप्ताह 20 मिनट की शिक्षक से बात बढ़ा सकती है बच्चों की पढ़ाई

जब स्कूल लंबे समय तक बंद रहते हैं, तो बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। ऐसे समय में हर परिवार के लिए महंगी online classes की व्यवस्था करना आसान नहीं होता। लेकिन एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने कम लागत वाला ऐसा तरीका सामने रखा है, जो बच्चों की learning क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। अध्ययन के अनुसार, शिक्षक अगर हर सप्ताह करीब 20 मिनट बच्चे से phone पर बात करें और साथ में छोटे educational text messages भेजें, तो इसका बच्चों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

यह अध्ययन प्रतिष्ठित Nature में प्रकाशित हुआ है। इसमें भारत समेत पांच देशों के 16 हजार से अधिक परिवारों को शामिल किया गया। भारत, केन्या, नेपाल, फिलीपींस और युगांडा में अलग-अलग randomized trials किए गए। अध्ययन में शामिल ज्यादातर बच्चे कक्षा 3 से 5 के बीच के थे। वहीं केन्या में कक्षा 1 और 2 के बच्चों को भी research में शामिल किया गया। इसका उद्देश्य यह समझना था कि स्कूल बंद रहने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई को कम खर्च में किस तरह जारी रखा जा सकता है।

बच्चों को तीन समूहों में बांटकर हुआ अध्ययन

शोध के दौरान बच्चों को तीन अलग-अलग groups में बांटा गया। पहले समूह के बच्चों को कोई अतिरिक्त educational support नहीं दिया गया। दूसरे समूह को गणित और पढ़ाई से जुड़े छोटे-छोटे text messages भेजे गए। इन messages का उद्देश्य बच्चों और उनके परिवारों को पढ़ाई के लिए लगातार motivate करना था।

तीसरे समूह को text messages के साथ हर सप्ताह शिक्षक की phone पर व्यक्तिगत tutoring भी दी गई। यह सहायता आठ या 12 सप्ताह तक जारी रही। खास बात यह रही कि phone tutoring में शिक्षक सभी बच्चों को एक जैसा lesson नहीं पढ़ाते थे। सबसे पहले शिक्षक यह समझते थे कि बच्चा पहले से कितना जानता है और उसे किस विषय में परेशानी हो रही है।

इसके बाद बच्चे की जरूरत के अनुसार पढ़ाई शुरू की जाती थी। अगर किसी बच्चे को basic mathematics में दिक्कत थी, तो शिक्षक उसी स्तर से समझाते थे। बच्चे की understanding बेहतर होने पर सवालों का level भी धीरे-धीरे बढ़ाया जाता था। इस तरह phone पर होने वाली पढ़ाई को बच्चे की individual learning जरूरत के अनुसार रखा गया।

शिक्षक की 20 मिनट की बातचीत का दिखा असर

पांचों देशों के आंकड़ों को एक साथ देखने पर phone tutoring और text messages पाने वाले बच्चों में learning outcomes में सबसे ज्यादा सुधार देखा गया। यानी बच्चों की पढ़ाई में मदद करने के लिए हमेशा लंबी online classes या महंगे digital resources की जरूरत नहीं होती। कई मामलों में शिक्षक और बच्चे के बीच नियमित और focused बातचीत भी काफी प्रभावी साबित हो सकती है।

इस अध्ययन की खास बात यह है कि इसमें technology का इस्तेमाल केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि बच्चे की वास्तविक जरूरत समझने के लिए किया गया। शिक्षक को यह पता चलता है कि बच्चा कहां अटक रहा है। इसके बाद उसी problem पर काम किया जाता है। इससे थोड़े समय में भी पढ़ाई को ज्यादा useful बनाया जा सकता है।

स्कूल बंद होने पर काम आ सकता है यह तरीका

प्राकृतिक आपदा, महामारी, मौसम की गंभीर स्थिति या किसी अन्य कारण से अगर स्कूल लंबे समय तक बंद होते हैं, तो बच्चों की पढ़ाई को जारी रखना बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में हर बच्चे को नियमित online class से जोड़ना संभव नहीं होता। खासकर ग्रामीण और कम संसाधन वाले परिवारों के लिए smartphone, internet और data की उपलब्धता हमेशा आसान नहीं रहती।

ऐसी स्थिति में weekly phone call और छोटे text messages एक practical solution बन सकते हैं। शिक्षक केवल 20 मिनट में बच्चे की पढ़ाई की स्थिति समझ सकते हैं। उसे जरूरी सवाल दे सकते हैं और अगले सप्ताह तक की छोटी learning activity बता सकते हैं। इससे बच्चा पढ़ाई से पूरी तरह disconnected नहीं होता।

अध्ययन का संदेश यही है कि बच्चों की शिक्षा में quality interaction ज्यादा महत्वपूर्ण है। केवल पढ़ाई की सामग्री भेज देना पर्याप्त नहीं है। जब शिक्षक बच्चे से सीधे बात करते हैं, उसकी परेशानी सुनते हैं और उसके स्तर के अनुसार समझाते हैं, तो learning process ज्यादा प्रभावी हो सकती है।

कम लागत में बच्चों की पढ़ाई को मिल सकता है सहारा

इस research के नतीजे उन education systems के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, जहां resources सीमित हैं। हर बच्चे के लिए महंगी digital education उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है। इसके मुकाबले phone-based tutoring कम लागत में बड़ी संख्या में बच्चों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि online classes या classroom teaching की जरूरत खत्म हो जाती है। स्कूल में शिक्षक और बच्चों की आमने-सामने की पढ़ाई का अपना महत्व है। लेकिन जब किसी कारण से स्कूल लंबे समय तक बंद हों, तब शिक्षक की नियमित phone बातचीत बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।

लंबे समय तक स्कूल बंद रहने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने के लिए हमेशा बड़े technology setup की जरूरत नहीं होती। कई बार शिक्षक की सिर्फ 20 मिनट की weekly phone call भी बच्चे के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है। अगर इसके साथ छोटे और उपयोगी educational text messages भी भेजे जाएं, तो पढ़ाई में सुधार की संभावना और बढ़ सकती है।

इस अध्ययन से एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है। बच्चों को सिर्फ किताब, मोबाइल या online content नहीं चाहिए। उन्हें यह महसूस होना भी जरूरी है कि कोई शिक्षक उनकी पढ़ाई को लेकर लगातार उनके साथ है। यही छोटी-सी बातचीत कई बच्चों के लिए पढ़ाई से जुड़े रहने और आगे बढ़ने का मजबूत जरिया बन सकती है।

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