शिक्षिकाएं छुट्टी पर थीं, कक्षा 8 की छात्रा ने संभाली बच्चों की जिम्मेदारी… पालिकाध्यक्ष भी रह गए हैरान
गोकर्णनाथ। स्कूल में अक्सर शिक्षक ही बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन गोकर्णनाथ के एक विद्यालय में सोमवार को कुछ ऐसा देखने को मिला, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कम्पोजिट विद्यालय त्रिलोक गिरि में कक्षा 8 की छात्रा नेन्शी सिंह ने छोटे बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्हें पढ़ाया। वह कक्षा एक और दो के बच्चों को पूरे confidence के साथ पढ़ाती नजर आईं। उनकी यह पहल देखकर वहां मौजूद नगर पालिका अध्यक्ष भी प्रभावित हुए और छात्रा की जमकर सराहना की।
दरअसल, नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू सोमवार को विद्यालय में बच्चों के लिए drinking water की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाटर कूलर लगवाने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की व्यवस्थाओं को देखा और छात्र-छात्राओं से बातचीत भी की। इसी दौरान उनकी नजर कक्षा 8 की छात्रा नेन्शी सिंह पर पड़ी। नेन्शी छोटे बच्चों को पढ़ा रही थीं और साथ ही उन्हें अनुशासन में रखने की जिम्मेदारी भी निभा रही थीं।
हरितालिका तीज के अवसर पर विद्यालय की महिला शिक्षिकाएं अवकाश पर थीं। ऐसे में कक्षा एक और दो के छोटे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए नेन्शी ने आगे बढ़कर उनकी जिम्मेदारी संभाल ली। उन्होंने बच्चों को पाठ समझाने के साथ उन्हें शांत रहने और अनुशासन बनाए रखने के लिए भी प्रेरित किया। छोटी उम्र में इस तरह की जिम्मेदारी निभाते हुए नेन्शी का आत्मविश्वास देखकर वहां मौजूद लोग भी प्रभावित हुए।
नेन्शी की इस पहल को देखकर पालिकाध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू ने उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों में responsibility की भावना और leadership skill को बढ़ावा देने से उनका आत्मविश्वास मजबूत होता है। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और आगे बढ़ने के अवसर मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में केवल basic facilities उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों के personality development और उनकी प्रतिभा को निखारने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
छोटे बच्चों के लिए बनीं शिक्षक
नेन्शी ने जिस तरह कक्षा एक और दो के बच्चों को संभाला, वह दूसरे विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है। छोटे बच्चों को पढ़ाना आसान काम नहीं होता। इसके लिए patience, confidence और बच्चों को समझने की क्षमता जरूरी होती है। नेन्शी ने इन सभी बातों का परिचय देते हुए छोटे बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की।
विद्यालय में पढ़ाई के दौरान बच्चों के साथ संवाद करना और उन्हें अनुशासन में रखना भी नेन्शी की जिम्मेदारी का हिस्सा रहा। उनकी यह पहल बताती है कि बच्चों में भी जिम्मेदारी उठाने और दूसरों का सहयोग करने की क्षमता होती है। जरूरत केवल उन्हें सही अवसर देने की है।
विद्यालयों में सुविधाओं के साथ प्रतिभा पर भी ध्यान जरूरी
पालिकाध्यक्ष ने विद्यालय में वाटर कूलर लगवाने की पहल के साथ बच्चों की प्रतिभा और व्यक्तित्व विकास पर भी जोर दिया। स्कूल बच्चों के लिए केवल पढ़ाई की जगह नहीं होते। यहीं से उनमें confidence, leadership और social responsibility जैसी qualities विकसित होती हैं।
नेन्शी सिंह की यह छोटी-सी पहल इसी बात का उदाहरण है। उन्होंने किसी औपचारिक जिम्मेदारी के बिना छोटे बच्चों की मदद की और उनकी पढ़ाई जारी रखने में सहयोग दिया। ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा करते हैं और उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार करते हैं।
