UP Outsourcing Jobs: उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव, समय से मिलेगा मानदेय, EPF-ESIC और आरक्षण की व्यवस्था

UP Outsourcing Jobs: उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव, समय से मिलेगा मानदेय, EPF-ESIC और आरक्षण की व्यवस्था

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए शासन ने नई व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासनादेश के अनुसार उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) का गठन कंपनीज एक्ट, 2013 के सेक्शन-8 के अंतर्गत एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन के रूप में किया जाएगा। इसका उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को अधिक पारदर्शी व्यवस्था के तहत सेवाएं उपलब्ध कराना और उनके हितों की निगरानी करना है।

सचिवालय प्रशासन अनुभाग-13 (विविध), लखनऊ की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों को सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई मामलों में कर्मचारियों को शासन या विभाग से उपलब्ध कराई गई पारिश्रमिक की पूरी राशि नहीं मिलने, EPF और ESIC की धनराशि समय से जमा न होने तथा सेवा के नवीनीकरण के दौरान उचित लाभ नहीं मिलने जैसी समस्याएं सामने आई हैं।

इसी को देखते हुए ऐसी व्यवस्था तैयार करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें आउटसोर्सिंग एजेंसियों की निगरानी और नियंत्रण के लिए एक निगम काम करेगा। यह व्यवस्था प्रदेश के विभिन्न विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों, संस्थानों, उपक्रमों, स्थानीय निकायों, स्वायत्त संस्थाओं, जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर के कार्यालयों सहित अन्य सरकारी संस्थाओं में लागू की जा सकेगी।

आउटसोर्स कर्मचारियों को समय से मिलेगा पारिश्रमिक

शासनादेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के पारिश्रमिक को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों को हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।

एजेंसी की जिम्मेदारी होगी कि प्रत्येक माह की 5 तारीख तक आउटसोर्स कर्मचारियों के खाते में पारिश्रमिक पहुंचाया जाए। इसके अलावा नए और पुराने उन कर्मचारियों का EPF और ESIC खाता खुलवाना भी एजेंसी की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी, जिनका अभी तक खाता नहीं खुला है।

EPF और ESIC की धनराशि जमा कराना जरूरी

नई व्यवस्था में कर्मचारियों के EPF और ESIC से जुड़े मामलों पर भी विशेष जोर दिया गया है। एजेंसी को कर्मचारियों के खाते खुलवाने के साथ निर्धारित धनराशि उनके खातों में जमा करानी होगी।

इसकी पुष्टि से संबंधित प्रमाण-पत्र भी एजेंसी को निगम के समक्ष प्रत्येक माह की 10 तारीख से पहले प्रस्तुत करना होगा। प्रमाण प्रस्तुत किए जाने के बाद ही निगम की ओर से एजेंसी को कमीशन की धनराशि दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

SC, ST, OBC सहित इन वर्गों के लिए आरक्षण

शासनादेश में आउटसोर्स सेवाओं में आरक्षण व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इसके तहत SC, ST, OBC, दिव्यांगजन, महिलाओं, EWS, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित तथा भूतपूर्व सैनिकों आदि को नियमानुसार आरक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख है।

इसका उद्देश्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में निर्धारित आरक्षण व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करना है।

आउटसोर्सिंग एजेंसियों का चयन GEM पोर्टल से

शासनादेश के अनुसार आउटसोर्सिंग एजेंसियों का चयन निगम द्वारा GeM पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। एजेंसियों का इम्पैनलमेंट न्यूनतम 3 वर्ष या कार्य की आवश्यकता समाप्त होने तक, जो पहले हो, के लिए किया जाएगा।

आउटसोर्सिंग से संबंधित प्रक्रिया निगम, संबंधित क्रेता विभाग या अधीनस्थ संस्था और आउटसोर्सिंग एजेंसी के बीच Tripartite Agreement के माध्यम से संचालित की जाएगी।

इस व्यवस्था में कर्मचारी का Employer आउटसोर्सिंग एजेंसी होगी, जबकि निगम इन एजेंसियों के माध्यम से सरकारी विभागों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था करेगा।

मनमाने तरीके से कर्मचारी को नहीं हटा सकेगी एजेंसी

शासनादेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्ति को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। आउटसोर्सिंग एजेंसी किसी कर्मचारी को अपनी ओर से मनमाने तरीके से बदल या हटा नहीं सकेगी।

यदि कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी स्थिति सामने आती है तो संबंधित विभाग या संस्था और निगम की सहमति के बाद ही उसे हटाया जा सकेगा।

यह व्यवस्था आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा में अनावश्यक हस्तक्षेप को रोकने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से रखी गई है।

आउटसोर्स कर्मचारियों के चयन की प्रक्रिया

शासनादेश में कर्मचारियों को आउटसोर्स सेवा में लेने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। सेवाओं की प्राप्ति निगम यानी UPCOS की निगरानी में निर्धारित SOP के अनुसार की जाएगी।

उम्मीदवारों की नियुक्ति के दौरान संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित शैक्षिक और अन्य योग्यताओं का पालन करना होगा। इसके साथ ही संबंधित शासनादेश में निर्धारित आरक्षण व्यवस्था का भी अनुपालन किया जाएगा।

उम्मीदवारों के चयन में परिवार की आय, आयु, पद के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता, लिखित परीक्षा, साक्षात्कार में प्राप्त अंक और स्थानीय निवास जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। यह प्रक्रिया विभाग और निगम की निगरानी में पूरी की जाएगी।

ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों पर इंटरव्यू नहीं

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए कोई साक्षात्कार नहीं होगा। वहीं उम्मीदवारों की सेवाएं प्राप्त करने की प्रक्रिया निर्धारित मानकों और पारदर्शी व्यवस्था के अनुसार की जाएगी।

इसके अलावा विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को वरीयता दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है।

सेवायोजन पोर्टल से उम्मीदवारों का चयन

उम्मीदवारों की उपलब्धता के लिए सेवायोजन विभाग द्वारा तैयार किए गए पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। एक कर्मचारी की आवश्यकता होने पर पोर्टल से पांच आवेदनकर्ताओं में से तथा दो या उससे अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता होने पर निर्धारित अनुपात के अनुसार अभ्यर्थियों में से सेवा प्राप्त करने की व्यवस्था बताई गई है।

आदेश download करें 

https://drive.google.com/file/d/1VId5pUQmgVps_foTLNlmikSNk2XxDlqR/view?usp=drivesdk

निगम द्वारा तैयार पारदर्शी व्यवस्था के अनुसार कर्मचारियों की क्षमता और योग्यता का मूल्यांकन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में संबंधित विभाग की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

अंतिम रूप से चयनित आउटसोर्स कर्मचारी को संबंधित एजेंसी की ओर से Placement Letter जारी किया जाएगा।

कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण

निगम के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था भी रखी गई है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को उनके कार्य के अनुरूप बेहतर तरीके से तैयार करना है।

निगम करेगा नियामक निकाय की तरह काम

शासनादेश के अनुसार उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम एक Regulatory Body की तरह काम करेगा। निगम आउटसोर्सिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली और गतिविधियों के लिए निर्धारित कानूनों, नियमों और मानकों के आधार पर निगरानी एवं नियंत्रण की व्यवस्था स्थापित करेगा।

इसका मुख्य उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और कर्मचारियों को निर्धारित पारिश्रमिक तथा अन्य सुविधाएं समय से उपलब्ध कराने की व्यवस्था तैयार करना है।

क्या है शासन का विजन?

शासनादेश में निगम का विजन स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को पूरा पारिश्रमिक और अन्य सुविधाएं आसानी तथा समय से उपलब्ध कराई जाएं। इसके लिए ऐसी प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिसमें कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ आरक्षण व्यवस्था का भी अनुपालन सुनिश्चित हो।

निगम का उद्देश्य स्किल्ड, सेमी-स्किल्ड और अनस्किल्ड मैनपावर को आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं को उपलब्ध कराना है।

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