LPG सिलेंडर ₹600 तक सस्ता क्यों बेच रहे गैस एजेंसी वाले, क्या है मजबूरी?
एलपीजी सिलेंडर की कीमत सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में सरकारी रेट ही आता है। लेकिन इस समय कुछ ग्रामीण इलाकों में 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर तय कीमत से काफी कम दाम में मिलने की बात सामने आ रही है। कहीं यह सिलेंडर 200 रुपये कम में मिल रहा है तो कहीं इसकी कीमत में 500 से 600 रुपये तक की कमी देखी जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकारी रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, तो गैस एजेंसी संचालक कमर्शियल सिलेंडर सस्ते में क्यों बेच रहे हैं?
दरअसल, अप्रैल और मई के दौरान एलपीजी की सप्लाई को लेकर काफी परेशानी देखने को मिली थी। ईरान युद्ध के शुरुआती दिनों में कमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता भी प्रभावित हुई थी। उस समय कई जगहों पर 19 किलो वाला सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहा था। अब स्थिति में बदलाव आया है और सप्लाई पहले की तुलना में बेहतर बताई जा रही है। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ गैस एजेंसियों के पास कमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ गई है।
ग्रामीण इलाकों में कमर्शियल सिलेंडर सस्ता क्यों मिल रहा है?
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जैसे ग्रामीण और छोटे कस्बाई क्षेत्रों में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की मांग अपेक्षाकृत कम है। यहां गैस एजेंसियों के सामने एक अलग तरह की परेशानी पैदा हो रही है। एजेंसी को जितने कमर्शियल सिलेंडर सप्लाई में मिलते हैं, उनके बदले खाली सिलेंडर भी वापस करने होते हैं। यदि खाली सिलेंडर उपलब्ध नहीं होते हैं तो सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
एक गैस एजेंसी संचालक के अनुसार, सिलेंडर से भरी गाड़ी में औसतन पांच कमर्शियल सिलेंडर आते हैं। इन सिलेंडरों के बदले खाली सिलेंडर वापस भेजना जरूरी होता है। ग्रामीण इलाकों में 19 किलो वाले सिलेंडर की खपत कम होने के कारण कई बार खाली सिलेंडर की उपलब्धता भी कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में एजेंसी के पास मौजूद सिलेंडर लंबे समय तक पड़े रह सकते हैं।
यही वजह बताई जा रही है कि कुछ एजेंसी संचालक कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर को कम कीमत पर बेच देते हैं। इसका उद्देश्य अधिक मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि रुके हुए स्टॉक को निकालना और सप्लाई व्यवस्था को बनाए रखना बताया गया है। कुशीनगर में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 2946 रुपये बताई गई है, लेकिन कुछ जगहों पर यह करीब 2400 से 2700 रुपये के बीच मिलने की बात सामने आई है।
सरकारी रेट में बदलाव नहीं, फिर भी कीमत कम क्यों?
यहां यह समझना जरूरी है कि गैस एजेंसी पर कम कीमत में सिलेंडर मिलने का मतलब यह नहीं है कि सरकार ने कमर्शियल एलपीजी की कीमत घटा दी है। दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2747.50 रुपये बताई गई है। वहीं घरेलू 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। यानी सरकारी स्तर पर घोषित कीमत और किसी स्थानीय एजेंसी द्वारा दिए जा रहे रेट में अंतर हो सकता है।
कुशीनगर के उदाहरण में भी यही स्थिति दिखाई देती है। वहां 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2946 रुपये बताई गई है, लेकिन कम मांग और उपलब्ध स्टॉक की वजह से कुछ एजेंसियां इसे कम कीमत पर देने को तैयार हैं। घरेलू सिलेंडर के मामले में ऐसी गुंजाइश नहीं होती, क्योंकि उसकी कीमत अलग व्यवस्था के तहत तय होती है।
इसलिए अगर किसी ग्रामीण क्षेत्र में कमर्शियल सिलेंडर 200 से 600 रुपये तक कम कीमत में मिल रहा है, तो इसके पीछे मुख्य कारण कम मांग और एजेंसी के पास मौजूद स्टॉक को निकालने की मजबूरी बताई जा रही है। यह स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी स्थिति है और हर गैस एजेंसी पर एक जैसी कीमत होना जरूरी नहीं है।
गैस सिलेंडर बुकिंग का अंतराल 45 से घटकर 25 दिन
एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग अंतराल को लेकर भी हाल में बदलाव किया गया है। पहले शहरी क्षेत्रों में सिलेंडर बुक करने के लिए 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतराल रखा गया था। अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह अवधि घटाकर 25 दिन कर दी गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के पत्र के अनुसार, गैस की आपूर्ति में पहले की तुलना में सुधार हुआ है और बैकलॉग भी काफी कम हुआ है। इसी को देखते हुए घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए, चाहे वे शहर में रहते हों या गांव में, सिलेंडर बुकिंग का अंतराल 25 दिन किया गया है। सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इसे लागू किया है।
इस बदलाव से ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को भी पहले की तुलना में जल्दी घरेलू एलपीजी सिलेंडर बुक करने की सुविधा मिलेगी। वहीं कमर्शियल सिलेंडर की कम कीमत में बिक्री का मामला अलग है और यह मुख्य रूप से स्थानीय मांग, उपलब्ध स्टॉक और खाली सिलेंडर की जरूरत से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
