आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, 2018 तक नियुक्त कर्मियों को समान वेतन और DA
उत्तराखंड में आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे उपनल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकार ने समान वेतन और महंगाई भत्ते (DA) से जुड़े पुराने आदेश में बड़ा बदलाव किया है। अब एक जनवरी 2016 से पहले नियुक्त कर्मचारियों के साथ-साथ 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त उपनल कर्मचारियों को भी न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ देने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस फैसले से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
2018 तक नियुक्त कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
सैनिक कल्याण सचिव युगल किशोर पंत की ओर से गुरुवार को इस संबंध में संशोधित शासनादेश जारी किया गया। इसमें उपनल कर्मचारियों के समान वेतन से जुड़े आदेश में नया प्रावधान शामिल किया गया है। संशोधित आदेश के मुताबिक एक जनवरी 2016 से पहले नियुक्त कर्मचारियों के अलावा एक जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 के बीच नियुक्त और वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को भी न्यूनतम वेतनमान के साथ DA देने की कार्रवाई तत्काल शुरू की जाएगी।
यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से समान काम के बदले बेहतर वेतन की उम्मीद कर रहे थे। सरकार के इस संशोधन के बाद पात्र कर्मचारियों के वेतन में राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
1 अप्रैल 2027 से दूसरे चरण की प्रक्रिया
सरकार ने इसके साथ ही आगे की प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। सैनिक कल्याण सचिव के अनुसार 13 नवंबर 2018 से 15 अक्तूबर 2024 तक निर्धारित पात्रता अवधि के बीच नियुक्त और वर्तमान में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ देने की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2027 से शुरू की जाएगी।
यानी अलग-अलग नियुक्ति अवधि के आधार पर कर्मचारियों को लाभ देने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। बाकी नियम और शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी। इससे कर्मचारियों को अपनी eligibility और नियुक्ति की तारीख के आधार पर लाभ मिलने की स्थिति समझने में आसानी होगी।
उपनल कर्मचारियों की मांग लंबे समय से जारी
उपनल कर्मचारियों की ओर से समान वेतन, नियमितीकरण और अन्य मांगों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जाती रही है। उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ ने भी प्रदेश के विभिन्न विभागों में काम कर रहे करीब 22 हजार उपनल कर्मचारियों के चरणबद्ध नियमितीकरण को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की थी।
संघ पदाधिकारियों के अनुसार 10 सितंबर को हाईकोर्ट की ओर से मौखिक रूप से वेतन नहीं रोकने, पांच महीने का लंबित वेतन जारी करने और कर्मचारियों को नए अनुबंध या Bond के लिए मजबूर नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, संघ का कहना था कि शासन की ओर से इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी नहीं होने के कारण कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानी बनी हुई थी।
कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
उपनल कर्मचारियों के लिए यह अपडेट इसलिए अहम है क्योंकि लंबे समय से वेतन और महंगाई भत्ते को लेकर असमानता का मुद्दा उठता रहा है। अब 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त कर्मचारियों को भी संशोधित व्यवस्था में शामिल किए जाने से पात्र कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
हालांकि, किसी कर्मचारी को कितना लाभ मिलेगा, यह उसकी नियुक्ति की तारीख, पद, विभाग और लागू वेतनमान सहित संबंधित नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए कर्मचारियों को अपने विभाग और संबंधित कार्यालय से जारी होने वाले आदेशों की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
