प्राथमिक विद्यालय में फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे 10 शिक्षकों की सेवा समाप्त
उत्तराखंड शिक्षक फर्जी प्रमाणपत्र मामला: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में नौकरी कर रहे दस शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में इन शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी और कूटरचित पाए जाने के बाद सभी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग की verification process पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मामला जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़ा है। विभाग की ओर से प्रमाणपत्रों की जांच के लिए दस्तावेज रामनगर बोर्ड भेजे गए थे। सत्यापन रिपोर्ट सामने आने के बाद दस शिक्षकों के प्रमाणपत्र सही नहीं पाए गए। इसके बाद विभाग ने रिपोर्ट के आधार पर उनकी नौकरी खत्म करने का निर्णय लिया।
जनवरी 2026 में हुई थी नियुक्ति
जानकारी के अनुसार, इन सभी दस शिक्षकों की नियुक्ति जनवरी 2026 में हुई थी। यानी नौकरी मिलने के बाद उन्होंने कई महीनों तक सरकारी विद्यालयों में सेवाएं दीं। विभागीय जानकारी के मुताबिक, इन शिक्षकों को करीब आठ महीने की salary भी मिल चुकी है।
अब प्रमाणपत्रों की जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी के खिलाफ कार्रवाई की है। इस मामले ने नियुक्ति प्रक्रिया में दस्तावेजों के verification को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर यह सवाल महत्वपूर्ण है कि नियुक्ति के समय इन प्रमाणपत्रों की जांच किस स्तर पर और किस तरीके से की गई थी।
रामनगर बोर्ड की जांच में सामने आई गड़बड़ी
बागेश्वर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक आशाराम के अनुसार, विभागीय verification के दौरान दस शिक्षकों के दस्तावेज रामनगर बोर्ड को जांच के लिए भेजे गए थे। बोर्ड की रिपोर्ट में प्रमाणपत्रों को फर्जी और कूटरचित बताया गया।
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित शिक्षकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं। विभाग की इस कार्रवाई से उन अभ्यर्थियों के लिए भी सख्त संदेश गया है, जो गलत दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का प्रयास करते हैं।
कपकोट से सबसे ज्यादा मामले
फर्जी प्रमाणपत्र मामले में सबसे ज्यादा छह शिक्षक कपकोट क्षेत्र से सामने आए हैं। इसके अलावा दो शिक्षक कांडा और दो शिक्षक बागेश्वर क्षेत्र में तैनात थे।
इस तरह एक ही जिले में दस शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने से विभागीय स्तर पर भी यह मामला काफी गंभीर माना जा रहा है। अब नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेजों की शुरुआती जांच को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
इन 10 शिक्षकों की सेवा समाप्त
शिक्षा विभाग की कार्रवाई में जिन शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उनके नाम और विद्यालय इस प्रकार हैं—
| शिक्षक का नाम | विद्यालय | क्षेत्र |
|---|---|---|
| कमला देवी | राप्रावि ससोला | कांडा |
| चंद्र प्रकाश | राप्रावि रीमा क्वीटी | कपकोट |
| रजनी | राप्रावि उछात | बागेश्वर |
| लक्ष्मी आर्य | राप्रावि स्यालढूंगा | कपकोट |
| रोहित कुमार | राप्रावि चनौस चनूसी | कपकोट |
| नेहा | राप्रावि नरगोली | कांडा |
| संजय कुमार | राप्रावि ठेली | कपकोट |
| अरविंद कुमार | राप्रावि जलमानी | कपकोट |
| पंकज कुमार | राप्रावि सुदिल | बागेश्वर |
| प्रियंका | राप्रावि उडियारी जगथाना | कपकोट |
आठ महीने तक मिलती रही salary
इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि इन शिक्षकों ने नियुक्ति के बाद करीब आठ महीने तक सरकारी शिक्षक के रूप में काम किया। इस अवधि में उन्हें विभाग की ओर से वेतन भी दिया गया।
अब सेवा समाप्त होने के बाद यह सवाल भी सामने आ सकता है कि गलत प्रमाणपत्रों के आधार पर प्राप्त की गई नौकरी और इस दौरान दिए गए वेतन को लेकर विभाग आगे क्या प्रक्रिया अपनाता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम कार्रवाई संबंधित विभागीय नियमों और आगे की जांच पर निर्भर करेगी।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
सरकारी नौकरी में चयन के दौरान शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का verification बेहद महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। अभ्यर्थी की शैक्षणिक योग्यता उसी दस्तावेज के आधार पर तय होती है। ऐसे में यदि नियुक्ति के बाद कई महीनों में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं, तो verification process की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस मामले में भी यही देखने को मिला कि जनवरी में नियुक्ति होने के बाद दस्तावेजों की जांच के दौरान प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी सामने आई। अब विभाग की कार्रवाई के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में नियुक्तियों के दौरान certificates का verification और अधिक सख्ती से किया जाएगा।
फर्जी दस्तावेजों पर विभाग का सख्त संदेश
दस शिक्षकों की सेवा समाप्त किए जाने की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि सरकारी नौकरी में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल सामने आने पर विभाग कार्रवाई कर सकता है। सरकारी पद हासिल करने के लिए गलत प्रमाणपत्र का सहारा लेना न केवल नियुक्ति समाप्त होने का कारण बन सकता है, बल्कि मामले की प्रकृति के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई का विषय भी बन सकता है।
फिलहाल बागेश्वर जिले में सामने आए इस मामले में विभाग ने सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर दस शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। अब इस प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं पर विभाग की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
