चार छात्राओं की शिकायत पर प्रोफेसर निलंबित, गंभीर आरोपों की जांच शुरू
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में चार छात्राओं की शिकायत के बाद एक प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया है। प्रोफेसर पर अनुचित तरीके से छूने, अपने केबिन में बुलाने और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू करा दी है।
मामला विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रोफेसर विनोद कुमार श्रीवास्तव से जुड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, फाइन आर्ट्स विभाग की चार छात्राओं ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई की है।
चार छात्राओं की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
छात्राओं की ओर से की गई शिकायतों में प्रोफेसर पर अनुचित व्यवहार करने और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, छात्राओं को अपने केबिन में बुलाने और गलत तरीके से छूने जैसी बातें भी सामने आई हैं।
इन शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच कराई। आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने प्रोफेसर विनोद कुमार श्रीवास्तव को निलंबित करने का निर्णय लिया।
हालांकि, शिकायतों में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही हो सकेगी।
निलंबन अवधि में MBA विभाग से किया गया संबद्ध
विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई के तहत निलंबित प्रोफेसर को निलंबन अवधि के दौरान MBA विभाग से संबद्ध किया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने तक प्रोफेसर निलंबित रहेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस प्रकरण में निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में जांच समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी, जिसके आधार पर अगला निर्णय लिया जा सकता है।
UGC के दिशा-निर्देशों के तहत जांच
विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनय कुमार सिंह के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों के तहत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की तीन सदस्यीय टीम मामले की जांच कर रही है।
समिति का काम शिकायतों से जुड़े तथ्यों की जांच करना और उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करना है। रिपोर्ट मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की बात सुनने के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देना और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना भी आवश्यक है।
प्रोफेसर ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, प्रोफेसर विनोद कुमार श्रीवास्तव ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने इस पूरे मामले के पीछे साजिश होने की आशंका भी जताई है।
इस तरह मामले में शिकायतकर्ता छात्राओं के आरोप और प्रोफेसर का पक्ष दोनों सामने आए हैं। अब जांच समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि शिकायतों से संबंधित तथ्यों में क्या सामने आता है।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
अवध विश्वविद्यालय में सामने आए इस मामले पर अब विश्वविद्यालय प्रशासन और आंतरिक शिकायत समिति की जांच पर नजर रहेगी। फिलहाल प्रोफेसर को निलंबित किया गया है और जांच की प्रक्रिया जारी है।
मामले में अंतिम निष्कर्ष आने से पहले आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई और मामले से जुड़े तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
