NCTE TET Guidelines 2011: शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का महत्वपूर्ण पत्र, सभी शिक्षक साथी जरूर पढ़ें
उत्तर प्रदेश सहित देशभर के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) का वर्ष 2011 में जारी पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस पत्र में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने से जुड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर इस पत्र को लेकर चर्चा के बीच शिक्षकों के लिए इसके मूल प्रावधानों को समझना जरूरी है।
NCTE ने TET को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी किए थे?
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के लागू होने के बाद प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं को निर्धारित करने की आवश्यकता महसूस हुई। इसी क्रम में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के माध्यम से शिक्षक नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यताओं से संबंधित प्रावधान निर्धारित किए।
इसके बाद NCTE ने 11 फरवरी 2011 को पत्र संख्या 76-4/2010/NCTE/Acad के माध्यम से राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों को TET आयोजित करने के लिए दिशा-निर्देश भेजे। पत्र का विषय शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने से संबंधित था।
इस पत्र का उद्देश्य शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित योग्यता सुनिश्चित करना और शिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक मानकों का पालन कराना था।
कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए TET का प्रावधान
NCTE के दिशा-निर्देशों में कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्ति के संदर्भ में TET को आवश्यक योग्यताओं में शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि शिक्षक के रूप में नियुक्त होने वाले अभ्यर्थियों में बच्चों को पढ़ाने के लिए जरूरी समझ, शैक्षणिक क्षमता और शिक्षण कौशल मौजूद हों।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, संबंधित सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जानी थी। केंद्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षा और राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षा की प्रयोज्यता संबंधित विद्यालयों एवं नियमों के आधार पर निर्धारित होती है।
हालांकि, किसी विशेष शिक्षक या भर्ती प्रक्रिया पर इन प्रावधानों का क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका निर्धारण संबंधित अधिसूचनाओं, नियुक्ति नियमों और न्यायालय के लागू आदेशों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

TET परीक्षा में कितने पेपर निर्धारित किए गए थे?
NCTE के वर्ष 2011 के दिशा-निर्देशों में TET परीक्षा को दो पेपरों में विभाजित किया गया था।
पेपर-I उन अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित था, जो कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाना चाहते हैं। वहीं, पेपर-II कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित किया गया था।
दोनों स्तरों पर पढ़ाने के इच्छुक अभ्यर्थियों को दोनों पेपरों में शामिल होने का प्रावधान बताया गया था।
पेपर-I और पेपर-II की संरचना में बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र, भाषा-I, भाषा-II तथा संबंधित विषयों को शामिल किया गया था। प्राथमिक स्तर के पेपर में गणित और पर्यावरण अध्ययन के प्रश्न भी निर्धारित थे। उच्च प्राथमिक स्तर पर गणित एवं विज्ञान या सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों का प्रावधान था।
इन विषयों के माध्यम से अभ्यर्थियों की विषय संबंधी जानकारी, बच्चों को समझने की क्षमता और शिक्षण के प्रति उनकी समझ का आकलन किया जाना था।
TET में उत्तीर्ण होने के लिए कितने अंक जरूरी थे?
11 फरवरी 2011 के दिशा-निर्देशों के संबंधित पृष्ठ पर TET में 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण मानने का प्रावधान दिया गया था।
साथ ही, संबंधित विद्यालय प्रबंधन को आरक्षण नीति के अनुरूप अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग अभ्यर्थियों जैसी श्रेणियों के लिए नियमानुसार छूट पर विचार करने की बात कही गई थी।
यह भी स्पष्ट किया गया था कि TET उत्तीर्ण करना अपने आप में नियुक्ति का अधिकार नहीं देता। यह नियुक्ति के लिए निर्धारित आवश्यक योग्यताओं में से एक है। भर्ती में चयन के लिए अन्य लागू शैक्षिक योग्यताओं, सेवा नियमों और चयन प्रक्रिया को पूरा करना भी आवश्यक होता है।
इसलिए केवल TET प्रमाणपत्र प्राप्त कर लेने से किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती।
भर्ती प्रक्रिया में TET के अंकों का क्या महत्व बताया गया था?
NCTE के दिशा-निर्देशों में भर्ती प्रक्रिया के दौरान TET के अंकों को महत्व देने की बात कही गई थी। हालांकि, परीक्षा उत्तीर्ण करने को नियुक्ति की गारंटी नहीं माना गया था।
इसका अर्थ है कि TET शिक्षक पद के लिए पात्रता निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन अंतिम चयन संबंधित भर्ती विज्ञापन, निर्धारित योग्यता, चयन नियमों और लागू सरकारी आदेशों के अनुसार होता है।
अलग-अलग राज्यों और भर्ती प्रक्रियाओं में नियमों में बदलाव या अतिरिक्त प्रावधान हो सकते हैं। इसलिए किसी वर्तमान भर्ती के संबंध में निर्णय लेने से पहले उसके लिए जारी आधिकारिक विज्ञापन और संबंधित अधिसूचना का अध्ययन करना जरूरी है।
क्या 2011 का पत्र आज भी शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है?
NCTE का यह पत्र TET की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके मूल दिशा-निर्देशों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें परीक्षा की संरचना, न्यूनतम उत्तीर्ण अंक, पात्रता तथा भर्ती में TET की भूमिका जैसे विषयों का उल्लेख मिलता है।
हालांकि, वर्ष 2011 में जारी दिशा-निर्देशों को वर्तमान समय में लागू प्रत्येक परिस्थिति पर बिना जांच के लागू मानना उचित नहीं होगा। बाद में जारी अधिसूचनाओं, संशोधनों, न्यायालय के निर्णयों और संबंधित राज्य के सेवा नियमों के आधार पर वर्तमान स्थिति का निर्धारण किया जाना चाहिए।
विशेष रूप से कार्यरत शिक्षकों की पात्रता, नियुक्ति की तारीख, भर्ती की शर्तों और TET संबंधी वर्तमान कानूनी दायित्वों के प्रश्न पर केवल पुराने पत्र के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
शिक्षक साथी मूल पत्र को जरूर पढ़ें
शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े नियमों को सही तरीके से समझने के लिए शिक्षकों को मूल सरकारी दस्तावेजों का अध्ययन करना चाहिए। सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी पत्र की तारीख, पत्रांक, विषय और उसमें दिए गए प्रावधानों की पुष्टि करना भी जरूरी है।
आपके द्वारा साझा किए गए दस्तावेज पर 11 फरवरी 2011 की तारीख दिखाई दे रही है। इसलिए इसे 2 फरवरी 2011 को जारी पत्र बताने के बजाय 11 फरवरी 2011 के पत्र के रूप में संदर्भित करना अधिक सही होगा।
