इंचार्ज सहायक अध्यापिका की अस्पताल में मौत, BEO पर प्रताड़ित करने का आरोप; मुकदमे की मांग

इंचार्ज सहायक अध्यापिका की अस्पताल में मौत, BEO पर प्रताड़ित करने का आरोप; मुकदमे की मांग

हरदोई जिले के संडीला क्षेत्र से सामने आया सहायक अध्यापिका शाहीन बानो की मौत का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय टिमरुख की इंचार्ज सहायक अध्यापिका शाहीन बानो का रविवार शाम लखनऊ में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। वहीं परिजनों ने तत्कालीन BEO डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी पर फोन के माध्यम से कथित रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

परिजनों के मुताबिक 21 सितंबर को प्राथमिक विद्यालय टिमरुख में गैस पाइप में रिसाव के बाद आग लग गई थी। इस घटना में दो रसोइये झुलस गए थे। इसी घटना के बाद तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी की ओर से शाहीन बानो को फोन किए जाने की बात परिवार ने कही है। परिजनों का आरोप है कि फोन पर कार्रवाई समेत अन्य बातों को लेकर शिक्षिका पर दबाव बनाया गया। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की बात भी सामने आई है।

पांच साल से डायलिसिस पर थीं शाहीन बानो

परिवार के अनुसार शाहीन बानो पिछले करीब पांच वर्षों से डायलिसिस पर थीं। बीमारी के बावजूद वह प्राथमिक विद्यालय टिमरुख में अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं। परिजनों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण उन्हें कई बार अवकाश की जरूरत पड़ती थी। इसी मामले में परिवार की ओर से कथित वसूली के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

बताया गया कि तबीयत बिगड़ने के बाद शाहीन बानो बेहोश होकर गिर गई थीं। इसके बाद उन्हें लखनऊ के चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार के अनुसार उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। बाद में उन्हें बुद्धेश्वर क्षेत्र के पास स्थित एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। रविवार शाम उनके निधन की सूचना दी गई।

जांच के लिए कमेटी गठित, BEO को पद से हटाया गया

शाहीन बानो से जुड़े मामले में जिलाधिकारी की ओर से जांच कमेटी गठित की गई है। जांच टीम प्राथमिक विद्यालय टिमरुख पहुंचकर स्थलीय जांच भी कर चुकी है। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी ने तत्कालीन BEO डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी को उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय कार्यालय से संबद्ध कर दिया है।

शिक्षिका की मौत के बाद अब परिवार की ओर से मामले में FIR दर्ज कराने की मांग की जा रही है। बेटी शायमा और परिवार के अन्य सदस्यों का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

दूसरी ओर BEO डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्हें फंसाया जा रहा है। ऐसे में अब जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के अलग-अलग पहलुओं में किसकी क्या भूमिका रही।

मामला जनप्रतिनिधियों तक पहुंचा

सहायक अध्यापिका की मौत का मामला अब जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंच गया है। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एवं मिश्रिख सांसद अशोक रावत ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर तत्कालीन BEO डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं MLC अशोक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर परिजनों के प्रार्थना पत्र पर उच्चस्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया है।

सांसद की ओर से भेजे गए पत्र में शाहीन बानो से जुड़ी घटना का उल्लेख करते हुए परिवार द्वारा तत्कालीन BEO और उनके चालक पर लगाए गए आरोपों का हवाला दिया गया है। पत्र में भरावन, कछौना और संडीला क्षेत्रों में शिक्षकों से संबंधित कथित शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के माध्यम से ही हो सकेगी।

शिक्षक संघ ने जताया शोक

शाहीन बानो के निधन से शिक्षक समुदाय में भी शोक है। उत्तरप्रदेशीय जूनियर शिक्षक संघ के अनंत कुमार और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की संडीला इकाई के ब्लॉक अध्यक्ष देवेंद्र कुमार बाजपेयी ने शिक्षिका के निधन पर दुख जताया। शिक्षक नेताओं ने कहा कि दुख की इस घड़ी में शिक्षक संघ पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।

शिक्षक संगठनों ने मामले में न्याय की मांग करते हुए कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार को न्याय दिलाने के लिए संगठन की ओर से प्रयास जारी रखने की बात भी कही गई है।

निष्कर्ष

शाहीन बानो की मौत के बाद उठे आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। एक ओर परिवार BEO पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर मुकदमे और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं संबंधित अधिकारी आरोपों से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में अब प्रशासनिक जांच और उपलब्ध तथ्यों की भूमिका अहम होगी। परिवार और शिक्षक संगठन जांच के निष्पक्ष परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी की जिम्मेदारी तय होती है तो नियमानुसार कार्रवाई हो।

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