शिक्षामित्रों को लेकर बड़ी खबर: करीब 15 हजार को ही मिली शिक्षक की नौकरी, 90 हजार से ज्यादा पास कर चुके TET

शिक्षामित्रों को लेकर बड़ी खबर: करीब 15 हजार को ही मिली शिक्षक की नौकरी, 90 हजार से ज्यादा पास कर चुके TET

 

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों के समायोजन और सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति का मामला एक बार फिर चर्चा में है। प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षामित्र लंबे समय से शिक्षक पद के सापेक्ष विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले के बाद सहायक अध्यापक पद पर समायोजन का रास्ता बंद होने से शिक्षामित्रों की स्थिति लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बिना टीईटी सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किए गए करीब 1.37 लाख शिक्षामित्रों के समायोजन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षामित्रों को राहत देने के लिए 68500 और 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में भारांक का प्रावधान किया गया। हालांकि, इन भर्तियों में सभी शिक्षामित्रों को नौकरी नहीं मिल सकी।

 

68500 और 69000 भर्ती में करीब 15 हजार को मिली नौकरी

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोजित सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में शिक्षामित्रों को भारांक का लाभ दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 68500 भर्ती में करीब सात हजार और 69000 भर्ती में करीब आठ हजार शिक्षामित्रों को ही शिक्षक पद पर नौकरी मिल सकी।

 

इस तरह दोनों भर्तियों को मिलाकर करीब 15 हजार शिक्षामित्र ही सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति हासिल कर सके। बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षामित्र अभी भी शिक्षक पद पर नियुक्ति या समायोजन की उम्मीद लगाए हुए हैं।

 

90 हजार से अधिक शिक्षामित्र पास कर चुके हैं TET

 

शिक्षामित्रों की ओर से अब एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में अब तक 90 हजार से अधिक शिक्षामित्र शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET पास कर चुके हैं।

 

शिक्षामित्रों का तर्क है कि TET पास करने के बाद उनकी स्थिति पहले की तुलना में अलग है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं और शिक्षक पद के सापेक्ष अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

 

इसी आधार पर शिक्षामित्रों का एक वर्ग सरकार से सहायक अध्यापक पद पर समायोजन का रास्ता निकालने की मांग कर रहा है।

 

NCTE की अधिसूचना का भी दिया जा रहा हवाला

 

शिक्षामित्रों की ओर से अपनी मांग के समर्थन में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की अधिसूचनाओं का भी हवाला दिया जा रहा है। उनका कहना है कि संबंधित अधिसूचना के अनुसार वे सहायक अध्यापक पद के लिए निर्धारित न्यूनतम अर्हताओं को पूरा करते हैं।

 

शिक्षामित्रों का कहना है कि वे विद्यालयों में शिक्षक के समान कार्य कर रहे हैं और अब बड़ी संख्या में शिक्षामित्र TET की अर्हता भी प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में सरकार को उनकी सेवा अवधि, शैक्षिक योग्यता और TET जैसी अर्हताओं को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति या समायोजन के संबंध में कोई रास्ता निकालना चाहिए।

 

2017 के फैसले के बाद बदली पूरी स्थिति

 

दरअसल, वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त कर दिया गया था। उस समय बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया गया था, लेकिन न्यायालय के फैसले के बाद उन्हें दोबारा शिक्षामित्र के पद पर लौटना पड़ा।

 

इसके बाद भर्ती प्रक्रियाओं में भारांक और अन्य प्रावधानों के जरिए शिक्षामित्रों को अवसर देने की कोशिश की गई। हालांकि, सीमित संख्या में ही शिक्षामित्र शिक्षक पद हासिल कर सके।

 

अब समय बीतने के साथ शिक्षामित्रों की ओर से फिर से यह मांग उठ रही है कि जो शिक्षामित्र आवश्यक योग्यता और TET की अर्हता पूरी कर चुके हैं, उनके मामले पर अलग से विचार किया जाए।

 

शिक्षामित्रों की मांग क्या है?

 

शिक्षामित्रों की मांग मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि लंबे समय से विद्यालयों में कार्य कर रहे और TET सहित निर्धारित शैक्षिक योग्यता पूरी करने वाले शिक्षामित्रों के लिए सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति या समायोजन का कोई व्यावहारिक रास्ता निकाला जाए।

 

उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों तक प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने का काम किया है। ऐसे में उनकी सेवा अवधि और अनुभव को भी नियुक्ति प्रक्रिया में महत्व दिया जाना चाहिए।

 

हालांकि, समायोजन या नियुक्ति का अंतिम निर्णय सरकार की नीति, लागू नियमों और न्यायालयों के आदेशों पर निर्भर करेगा। केवल TET पास करने से अपने आप सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति का अधिकार स्थापित नहीं हो जाता। इसके लिए संबंधित भर्ती नियमों और कानूनी स्थिति को भी देखना आवश्यक होगा।

 

आगे क्या हो सकता है?

 

शिक्षामित्रों का मामला लंबे समय से उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय रहा है। एक तरफ बड़ी संख्या में शिक्षामित्र वर्षों से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित नियम और न्यायालय के पुराने फैसले भी महत्वपूर्ण हैं।

 

ऐसे में शिक्षामित्रों की ओर से उठाई जा रही समायोजन की मांग पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। यदि सरकार इस संबंध में कोई नई नीति, प्रस्ताव या आदेश जारी करती है, तो इसका सीधा असर प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों पर पड़ सकता है।

 

फिलहाल शिक्षामित्रों की ओर से यह मांग लगातार उठाई जा रही है कि TET पास कर चुके और आवश्यक शैक्षिक योग्यता रखने वाले शिक्षामित्रों के मामले में सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और उनके भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट रास्ता निकाले।

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