फॉर्म-6 और SIR पर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण, आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा- आदेशों को सर्वसम्मति से मिली मंजूरी

फॉर्म-6 और SIR पर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण, आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा- आदेशों को सर्वसम्मति से मिली मंजूरी

नई मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर चल रही चर्चा के बीच चुनाव आयोग की ओर से स्पष्टीकरण सामने आया है। आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा के लिए अलग से एनेक्सर-डी जोड़ा गया है। वहीं, आयोग से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि SIR से संबंधित आदेशों को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।

मामला नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़ा है। SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र देने की व्यवस्था सामने आई है। चुनाव आयोग के अनुसार यह घोषणा पत्र फॉर्म-6 का हिस्सा बदलने के बजाय अलग दस्तावेज के रूप में रखा गया है। आयोग ने 24 जून 2025 के निर्देश का हवाला देते हुए बताया कि नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने वाले व्यक्ति को फॉर्म-6 या संबंधित स्थिति में फॉर्म-8 के साथ एनेक्सर-डी भी भरना होगा।

आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बिहार में SIR, असम में पुनरीक्षण तथा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े SIR आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली थी। सूत्रों ने यह भी कहा कि इन स्वीकृत आदेशों में नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 के साथ जमा किए जाने वाले घोषणा पत्र का प्रावधान शामिल था। आयोग का तर्क है कि यह एक अतिरिक्त आवश्यकता है और इससे मौजूदा फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं हुआ है।

हालांकि, इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग के भीतर अलग राय होने की रिपोर्ट भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म-6 में SIR से संबंधित घोषणा को ऑनलाइन प्रक्रिया में शामिल करने पर आपत्ति दर्ज की थी। उनकी आपत्ति इस बात को लेकर बताई गई कि फॉर्म-6 को Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित किया गया है, इसलिए उसमें बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

इस पूरे मामले में चुनाव आयोग ने अलग तस्वीर पेश की है। आयोग का कहना है कि आंतरिक स्तर पर अधिकारियों की ओर से सवाल, सुझाव या अलग राय सामने आना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। आयोग ने यह भी कहा है कि उसके अंतिम निर्णय और आदेश कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिए गए हैं। 23 सितंबर को जारी आयोग के स्पष्टीकरण में कहा गया कि SIR सहित आयोग के निर्णयों को तीनों सदस्यों की मंजूरी के साथ सर्वसम्मति से लिया गया।

फॉर्म-6 को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 के साथ अलग Declaration Form भी उपलब्ध कराया गया है। पोर्टल पर इसे SIR-2026 से जुड़े नए मतदाता पंजीकरण के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। इससे आयोग के उस स्पष्टीकरण की पुष्टि होती है कि फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र की व्यवस्था मौजूद है।

इस तरह फॉर्म-6 विवाद में दो अलग पहलू सामने आते हैं। चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि मूल फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया और SIR से जुड़ी जानकारी के लिए एनेक्सर-डी को अतिरिक्त घोषणा पत्र के रूप में रखा गया है। दूसरी ओर, सामने आई रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से इस व्यवस्था की कानूनी प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल आयोग ने अपने आदेशों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप और अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है।

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