Preparation: Your electricity bill will change every month starting from April: तैयारी : अप्रैल से हर माह बदल जाएगा आपका बिजली का बिल

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तैयारी : अप्रैल से हर माह बदल जाएगा आपका बिजली का बिल
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की नई नीति से बिजली उपभोक्ताओं को झटका लग सकता है। देश में अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) से बिजली का बिल हर साल ऑटोमैटिक तरीके से बढ़ सकता है। केंद्र सरकार ने बुधवार को जारी नई राष्ट्रीय विद्युत नीति (एनईपी) के मसौदे में इंडेक्स-लिंक्ड टैरिफ व्यवस्था का प्रस्ताव दिया है।
नए मसौदे के अनुसार, अगर राज्य नियामक आयोग समय पर टैरिफ तय नहीं करते हैं, तो एक तय फॉर्मूले के आधार पर बिजली की दरें अपने आप बढ़ जाएंगी। बता दें, अभी तक राज्यों में राजनीतिक कारणों से बिजली की दरें कई सालों तक नहीं बढ़ती थीं। बिजली कंपनियों का तीन लाख करोड़ रुपये का बकाया है।
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गौरतलब है कि बिजली (संशोधन) विधेयक का मसौदा संसद के आगामी बजट सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। मसौदे में कहा गया कि बिजली वितरण कंपनियों द्वारा बिजली खरीदने की लागत में होने वाली वृद्धि का ब्योरा हर महीने उपभोक्ताओं को दिया जाना चाहिए। सरकार ने इस ड्राफ्ट पॉलिसी पर सभी हितधारकों से 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। मसौदा नीति में कहा गया कि वित्त वर्ष 2026-27 से आयोगों को ऐसी कीमतें तय करनी होंगी, जो बिजली बनाने और पहुंचाने की पूरी लागत को उसी समय वसूल सकें। अब बाद में शुल्क देने वाली स्थिति को खत्म किया जाएगा।
इसके अलावा, बिजली की कीमतों को अब एक सूचकांक (जैसे महंगाई दर) से जोड़ा जाना चाहिए।

कंपनियों को हर यूनिट पर नुकसान; electricity bill
कंपनियों को हर यूनिट पर नुकसान उठाना पड़ता है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 में बिजली कंपनियों का औसत राजस्व अंतर करीब 0.5 रुपये प्रति यूनिट रहा, यानी जितनी लागत आई, उतनी वसूली नहीं हो सकी।
2032 तक दोगुनी होगी मांग: electricity bill
भारतीय उद्योग दुनिया में सबसे महंगी बिजली खरीदते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उद्योगों से ज्यादा पैसे लेकर किसानों और आम घरों को सस्ती बिजली (सब्सिडी) दी जाती है। देश की 45 फीसदी बिजली इन्हीं दो क्षेत्रों में खर्च होती है।
सूचकांक आधारित शुल्क व्यवस्था: electricity bill
सरकार के प्रस्ताव के तहत बिजली की दरें किसी तय इंडेक्स से जुड़ी होंगी जैसे कोयला महंगा होने से, बिजली बनाने की लागत बढ़ने से, डिस्कॉम का खर्च बढ़ने से तो बिजली का रेट भी उसी हिसाब से बढ़ जाएगा।
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