EMI महंगी होने की आहट! RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, सस्ती किश्तों का दौर थमा

EMI महंगी होने की आहट! RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, सस्ती किश्तों का दौर थमा

EMI महंगी होने की आहट! RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, सस्ती किश्तों का दौर थमा

मुंबई, 7 अक्टूबर 2026। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच बड़ा फैसला लेते हुए नीतिगत रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है। इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब RBI ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है।

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RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने यह फैसला सर्वसम्मति से लिया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका संकेत है कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए RBI आगे भी जरूरत के मुताबिक सख्त कदम उठा सकता है।

महंगाई बनी सबसे बड़ी चिंता

RBI के इस फैसले के पीछे बढ़ती महंगाई प्रमुख कारणों में शामिल है। अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। महंगे कच्चे तेल और खाद्य कीमतों के दबाव ने भी महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है।

इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। कमजोर मानसून और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी महंगाई के जोखिम को बढ़ा रही हैं। RBI का मानना है कि इन परिस्थितियों में महंगाई की उम्मीदों पर नियंत्रण रखना जरूरी है।

आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?

रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंकों की फंडिंग लागत पर पड़ सकता है। इसके बाद बैंक होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। ऐसे में नई लोन लेने वालों के लिए कर्ज महंगा हो सकता है और मौजूदा ग्राहकों की EMI बढ़ने या लोन की अवधि बढ़ने की संभावना बन सकती है।

हालांकि EMI में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह प्रत्येक बैंक की ब्याज दर, लोन की राशि, बची हुई अवधि और ग्राहक के लोन प्रकार पर निर्भर करेगा। इसलिए 0.25 प्रतिशत रेपो रेट बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति की EMI भी ठीक 0.25 प्रतिशत बढ़ जाएगी।

FD और बचत करने वालों को फायदा संभव

रेपो रेट बढ़ने से जहां कर्ज लेने वालों पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं बैंक जमा और FD की ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी की संभावना रहती है। यदि बैंक अपनी जमा दरें बढ़ाते हैं तो FD और बचत करने वाले ग्राहकों को इसका फायदा मिल सकता है।

RBI का संदेश साफ

RBI के इस फैसले से संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक अब महंगाई के जोखिम को लेकर अधिक सतर्क है। मजबूत आर्थिक गतिविधियों के बीच RBI का लक्ष्य कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना और महंगाई की उम्मीदों को काबू में रखना है।

कुल मिलाकर, RBI की 0.25 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी आम कर्जदारों के लिए राहत की जगह चिंता बढ़ाने वाली है। आने वाले दिनों में बैंकों द्वारा ब्याज दरों में किए जाने वाले बदलाव से यह स्पष्ट होगा कि होम लोन, कार लोन और अन्य EMI पर वास्तविक असर कितना पड़ता है।

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