सोना 2 दिन में ₹2,300 सस्ता, चांदी भी ₹5,000 टूटी; जानें 10 ग्राम गोल्ड और 1 किलो सिल्वर का नया भाव
सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली है। 21 अक्टूबर को कीमती धातुओं के दाम नीचे आने से उन लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है, जो शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश के उद्देश्य से सोना-चांदी लेने की योजना बना रहे हैं। दिए गए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर 1,884 रुपये घटकर करीब 1.44 लाख रुपये रह गया। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत में 2,900 रुपये की कमी दर्ज की गई और इसका भाव लगभग 2.06 लाख रुपये पर आ गया।
पिछले दो कारोबारी दिनों में सोना करीब 2,300 रुपये और चांदी लगभग 5,000 रुपये सस्ती हुई है। लगातार हो रही इस गिरावट के कारण बाजार में सोने-चांदी की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, कीमतों में आगे भी गिरावट होगी या फिर बाजार दोबारा तेजी पकड़ेगा, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है।
21 अक्टूबर को सोने और चांदी का नया भाव
ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। सोना खरीदने वालों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि कीमत में थोड़ी-सी कमी भी अधिक वजन के गहने खरीदने पर अच्छी-खासी बचत करा सकती है। हालांकि, खरीदारी का वास्तविक खर्च स्थानीय बाजार, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू करों के अनुसार अलग हो सकता है।
सोने की कीमत में गिरावट का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ सकता है, जो आगामी त्योहारों या शादी के सीजन के लिए खरीदारी टालकर बाजार की चाल पर नजर रख रहे हैं। दूसरी ओर, निवेशकों के लिए केवल एक या दो दिन की गिरावट के आधार पर खरीदारी का फैसला करना उचित नहीं माना जाता।
दो दिन में सोना ₹2,300 और चांदी ₹5,000 सस्ती
सोने-चांदी के बाजार में हालिया गिरावट को समझने के लिए पिछले दो कारोबारी दिनों में आए बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सोने की कीमत में कुल मिलाकर लगभग 2,300 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई है। चांदी भी करीब 5,000 रुपये प्रति किलो सस्ती हुई है।
कीमती धातुओं की कीमतों में इस तरह का उतार-चढ़ाव कई कारणों से हो सकता है। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव, डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां शामिल हैं। इसलिए घरेलू बाजार में दर्ज गिरावट को किसी एक कारण से जोड़ने से पहले संबंधित आंकड़ों और बाजार की परिस्थितियों को देखना जरूरी है।
खरीदारों के लिए यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि IBJA के प्रकाशित भाव और ज्वेलरी दुकानों पर मिलने वाले अंतिम भाव में अंतर हो सकता है। गहने खरीदते समय सोने की शुद्धता, मेकिंग चार्ज, वेस्टेज और लागू GST को मिलाकर कुल कीमत पूछनी चाहिए।
सितंबर में भी सस्ता हुआ था सोना और चांदी
सितंबर महीने में भी सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त को सोने का भाव लगभग 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 30 सितंबर तक घटकर करीब 1.48 लाख रुपये रह गया। इस तरह महीने के दौरान सोने की कीमत में लगभग 8,000 रुपये की कमी आई।
इसी अवधि में चांदी के भाव में भी गिरावट देखने को मिली। 31 अगस्त को एक किलो चांदी की कीमत लगभग 2.37 लाख रुपये थी, जो 30 सितंबर को घटकर करीब 2.22 लाख रुपये पर पहुंच गई। यानी चांदी की कीमत में लगभग 15,000 रुपये प्रति किलो की कमी आई।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि सोने और चांदी में तेजी के दौर के बाद गिरावट भी आ सकती है। हालांकि, पिछले महीने की चाल के आधार पर भविष्य की कीमतों का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। निवेश से पहले मौजूदा भाव, खरीदारी का उद्देश्य और जोखिम सहने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
क्या सोने की कीमतों में गिरावट आगे भी जारी रहेगी?
सोने की कीमतों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा गिरावट लंबी चलेगी या बाजार में दोबारा तेजी देखने को मिलेगी। इसका जवाब कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों पर निर्भर करता है। फिलहाल कीमतों की दिशा को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
1. अमेरिकी ब्याज दरों का असर
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां सोने की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। सामान्य तौर पर ब्याज दरें बढ़ने या ऊंची रहने की संभावना से सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश की आकर्षकता पर दबाव पड़ सकता है। इसके उलट, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद सोने को सहारा दे सकती है।
हालांकि, ब्याज दरों और सोने की कीमतों के बीच संबंध हमेशा एक जैसा नहीं रहता। डॉलर की चाल, महंगाई के आंकड़े और निवेशकों की बाजार संबंधी उम्मीदें भी कीमतों को प्रभावित करती हैं। इसलिए किसी भी गिरावट को केवल ब्याज दरों का परिणाम मानना सही नहीं होगा।
2. वैश्विक तनाव से मिल सकता है सहारा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध, राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर कई निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में देखते हैं। ऐसी परिस्थितियों में सोने की मांग बढ़ सकती है, जिससे इसकी कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
दूसरी ओर, यदि वैश्विक तनाव कम होता है या निवेशक दूसरे परिसंपत्ति विकल्पों की ओर रुख करते हैं, तो सोने पर दबाव भी बन सकता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर बाजार में तेजी और गिरावट, दोनों रूपों में दिखाई दे सकता है।
3. निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए
कीमतों में गिरावट आने पर कई लोग इसे खरीदारी का अच्छा मौका मानते हैं। लेकिन केवल भाव नीचे आने के कारण बड़ी रकम निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। सोने और चांदी की कीमतें कम समय में फिर बदल सकती हैं।
यदि खरीदारी आभूषणों के लिए करनी है, तो बजट और जरूरत के अनुसार फैसला लिया जा सकता है। वहीं, निवेश के उद्देश्य से खरीदने वालों को अपनी निवेश अवधि, जोखिम और कुल पोर्टफोलियो को ध्यान में रखना चाहिए। किसी भी निवेश में मुनाफे की गारंटी नहीं होती।
सोना खरीदते समय इन दो बातों का रखें ध्यान
कीमतों में गिरावट देखकर सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल कम भाव पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शुद्धता और सही कीमत की जानकारी होना भी जरूरी है।
1. BIS हॉलमार्क और HUID की जांच करें
सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता की पुष्टि जरूर करें। BIS हॉलमार्क वाले आभूषण को प्राथमिकता दें और जहां लागू हो, उस पर दर्ज छह अंकों वाले HUID यानी हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर की जांच करें। केवल किसी अल्फान्यूमेरिक कोड को देखकर सोने की शुद्धता तय न करें; उसकी वैधता और संबंधित विवरण की पुष्टि BIS के आधिकारिक माध्यम से करें।
24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की शुद्धता अलग-अलग होती है। आमतौर पर आभूषण बनाने के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि 24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध होता है। खरीदारी से पहले दुकानदार से कैरेट, शुद्धता और बिल में दर्ज विवरण स्पष्ट रूप से पूछें।
2. खरीदारी से पहले भाव की तुलना करें
सोना खरीदने से पहले IBJA जैसे विश्वसनीय स्रोतों पर प्रकाशित भाव देखें। इसके बाद स्थानीय ज्वेलर से उसी दिन का बिक्री भाव पूछें। यह भी जांचें कि बताई गई कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट या किसी अन्य शुद्धता के लिए है।
दुकानदार से सोने का वजन, प्रति ग्राम कीमत, मेकिंग चार्ज, अन्य शुल्क और GST का अलग-अलग विवरण मांगें। पक्का बिल जरूर लें। इससे कीमतों की तुलना करना और भविष्य में किसी समस्या की स्थिति में खरीदारी का रिकॉर्ड रखना आसान होता है।
असली चांदी की पहचान कैसे करें? जानें चार तरीके
चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच करना भी उतना ही जरूरी है। केवल रंग या चमक देखकर चांदी को असली मान लेना ठीक नहीं है। कुछ शुरुआती जांच उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन घर पर किए जाने वाले परीक्षण चांदी की शुद्धता का अंतिम प्रमाण नहीं होते।
1. मैग्नेट टेस्ट
शुद्ध चांदी सामान्य परिस्थितियों में चुंबक से मजबूती से नहीं चिपकती। यदि कोई वस्तु चुंबक से जोर से आकर्षित होती है, तो उसमें लोहे जैसी चुंबकीय धातु होने की संभावना हो सकती है। हालांकि, चुंबक से न चिपकना इस बात की गारंटी नहीं है कि वस्तु शुद्ध चांदी की ही बनी है।
2. आइस टेस्ट
चांदी ऊष्मा की अच्छी चालक होती है, इसलिए उसके संपर्क में रखी बर्फ तेजी से पिघल सकती है। लेकिन तापमान, वस्तु का आकार और आसपास की परिस्थितियां भी बर्फ पिघलने की गति को प्रभावित करती हैं। इसलिए इसे केवल एक शुरुआती संकेत मानें, शुद्धता की पक्की जांच नहीं।
3. गंध से पहचान
शुद्ध चांदी में सामान्य तौर पर तांबे जैसी तेज धातु की गंध नहीं होती। हालांकि, गंध के आधार पर असली और नकली चांदी में निश्चित अंतर करना संभव नहीं है। मिश्रधातु, पॉलिश और सतह पर मौजूद पदार्थ भी गंध को प्रभावित कर सकते हैं।
4. कपड़े से रगड़कर जांच
कुछ चांदी की वस्तुओं को मुलायम सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान आ सकता है। यह चांदी की सतह पर बनने वाले सिल्वर सल्फाइड से संबंधित हो सकता है। लेकिन निशान आना या न आना अपने आप में शुद्धता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।
सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि चांदी खरीदते समय शुद्धता, वजन और बिल की जांच करें। जरूरत पड़ने पर विश्वसनीय जौहरी या मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र से जांच कराएं। चांदी की वस्तु पर BIS हॉलमार्क का दावा किया गया हो, तो उसकी लागू प्रमाणन व्यवस्था और विवरण की भी पुष्टि करें।
क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?
सोना और चांदी खरीदने का सही समय हर व्यक्ति के उद्देश्य पर निर्भर करता है। यदि गहने खरीदना जरूरी है, तो मौजूदा भाव की तुलना करके, कुल खर्च समझकर और बजट तय करके खरीदारी की जा सकती है। केवल इस उम्मीद में खरीदारी टालना भी जरूरी नहीं कि कीमतें निश्चित रूप से और नीचे आएंगी।
यदि उद्देश्य निवेश है, तो एक-दो दिन के भाव के बजाय लंबी अवधि की योजना पर ध्यान देना बेहतर हो सकता है। सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी और गिरावट आती रहती है। इसलिए पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम को समझकर फैसला करें।
खरीदारी से पहले उसी दिन का भाव जरूर जांचें, क्योंकि बाजार के दाम बदल सकते हैं। यह भी ध्यान रखें कि IBJA के संदर्भ भाव, स्थानीय बाजार के खुदरा भाव और आभूषणों की अंतिम कीमत एक जैसी नहीं होती।
