18 शिक्षकों का ग्रेड पे 4800 से 4600 करने पर मचा हड़कंप, दो बाबुओं को नोटिस

18 शिक्षकों का ग्रेड पे 4800 से 4600 करने पर मचा हड़कंप, दो बाबुओं को नोटिस

बदायूं। बेसिक शिक्षा विभाग में अगस्त महीने के वेतन बिल में 18 शिक्षकों के ग्रेड पे को 4800 रुपये से घटाकर 4600 रुपये किए जाने का मामला सामने आने के बाद विभाग में हलचल बढ़ गई है। ग्रेड पे में कमी किए जाने की जानकारी मिलने पर संबंधित शिक्षकों में नाराजगी देखी गई। मामला विकास क्षेत्र आसफपुर से जुड़ा है। शिक्षकों का कहना है कि वेतन बिल में ग्रेड पे बदलने से उनकी सैलरी पर सीधा असर पड़ा है।

मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों के सामने पूरी शिकायत रखी। शिक्षक नेताओं ने मामले की जांच कराने और जिस स्तर पर लापरवाही हुई है, वहां जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग की।

अगस्त के वेतन बिल में बदला ग्रेड पे

जानकारी के अनुसार, अगस्त माह के वेतन बिल में आसफपुर विकास क्षेत्र से जुड़े 18 शिक्षकों का ग्रेड पे 4800 रुपये के स्थान पर 4600 रुपये दर्ज हो गया। शिक्षकों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि पहले से निर्धारित ग्रेड पे में बदलाव किस आधार पर किया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

शिक्षकों का आरोप है कि वेतन बिल तैयार करने और उसे लॉक करने की प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही हुई है। इसी वजह से 18 शिक्षकों के रिकॉर्ड में ग्रेड पे कम दिखाई देने लगा। इससे संबंधित शिक्षकों के वेतन पर भी असर पड़ने की बात कही गई है।

ग्रेड पे किसी कर्मचारी के वेतन ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसमें बदलाव होने पर वेतन की गणना प्रभावित हो सकती है। ऐसे में शिक्षकों ने मामले को हल्के में न लेते हुए विभागीय अधिकारियों से शिकायत की।

शिक्षक संघ ने उठाया मामला

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रांतीय प्रचार मंत्री संजीव शर्मा ने मामले को अधिकारियों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि अगस्त के वेतन बिल में 18 शिक्षकों का ग्रेड पे 4800 रुपये से घटाकर 4600 रुपये दर्ज किया गया है।

शिक्षक संघ के पदाधिकारी इस मामले को लेकर वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। संघ की ओर से यह भी कहा गया कि यदि वेतन बिल तैयार करने या जांचने के दौरान किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

शिक्षक नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर कार्यालय में सांकेतिक धरना भी दिया। उनका कहना था कि शिक्षकों के वेतन से जुड़ा मामला होने के कारण इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। शिक्षकों की मेहनत की कमाई और उनके वेतन रिकॉर्ड में किसी भी तरह की गलती होने पर उसका समय रहते समाधान किया जाना जरूरी है।

वित्त एवं लेखाधिकारी ने मांगा स्पष्टीकरण

मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्त एवं लेखाधिकारी की ओर से दो कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है। इसमें आसफपुर के वरिष्ठ सहायक राहुल यादव और बदायूं कार्यालय के संबद्ध लिपिक शकील अहमद से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

आसफपुर के वरिष्ठ सहायक राहुल यादव से पूछा गया है कि उनके स्तर से वेतन बिल की जांच कर उसे ओके किया गया और लॉक भी किया गया था। ऐसे में सवाल यह है कि 18 शिक्षकों के ग्रेड पे में बदलाव कैसे हुआ।

नोटिस में संबंधित कर्मचारी से इस संबंध में स्पष्ट जवाब और आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया है। विभाग यह जानना चाहता है कि वेतन बिल में ग्रेड पे बदलने की स्थिति किस स्तर पर बनी और इसकी जानकारी जांच के दौरान क्यों सामने नहीं आई।

संबद्ध लिपिक से भी मांगा जवाब

बदायूं कार्यालय के संबद्ध लिपिक शकील अहमद को भी नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूछा गया है कि जिन शिक्षकों के ग्रेड पे में कमी दर्ज थी, उस वेतन बिल को किस आधार पर लॉक किया गया।

विभाग की ओर से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि बिल लॉक करने से पहले उसमें दर्ज सभी विवरणों की जांच की गई थी या नहीं। यदि जांच की गई थी तो ग्रेड पे में बदलाव क्यों नहीं पकड़ा गया, यह भी स्पष्टीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस तरह दोनों कर्मचारियों से अलग-अलग स्तर पर हुई प्रक्रिया के संबंध में जवाब मांगा गया है। इससे यह भी साफ है कि विभाग मामले की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

दो दिन में देना होगा स्पष्टीकरण

विभागीय नोटिस में दोनों कर्मचारियों को दो दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे कहा गया है कि जवाब के साथ आवश्यक साक्ष्य भी उपलब्ध कराए जाएं।

नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया या आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

अब सभी की नजर दोनों कर्मचारियों की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण पर है। जवाब मिलने के बाद विभाग यह तय करेगा कि ग्रेड पे में बदलाव किस स्तर पर हुआ और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है।

शिक्षकों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग

18 शिक्षकों के ग्रेड पे में बदलाव की खबर सामने आने के बाद संबंधित शिक्षकों में नाराजगी है। शिक्षकों का कहना है कि वेतन से जुड़ी जानकारी में किसी भी तरह की गलती होने से कर्मचारी को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ सकती है।

शिक्षक संघ का कहना है कि वेतन बिल तैयार करना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसमें कर्मचारी का नाम, पद, वेतनमान, ग्रेड पे और अन्य आवश्यक विवरण सही होना चाहिए। किसी भी स्तर पर गलती होने पर उसका असर कर्मचारी के मासिक वेतन पर पड़ सकता है।

इसी वजह से संघ ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। संघ चाहता है कि यह स्पष्ट किया जाए कि 18 शिक्षकों का ग्रेड पे 4800 रुपये से 4600 रुपये कैसे दर्ज हुआ। यदि यह मानवीय गलती थी तो उसे किस स्तर पर ठीक किया गया और यदि जानबूझकर बदलाव किया गया तो इसके पीछे क्या कारण था, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

वेतन बिल लॉक करने की प्रक्रिया पर भी सवाल

इस पूरे मामले में वेतन बिल को लॉक करने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। किसी भी वेतन बिल को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित स्तर पर उसकी जांच की जाती है। ऐसे में 18 शिक्षकों के ग्रेड पे में एक साथ बदलाव होना विभाग के लिए गंभीर विषय माना जा रहा है।

विभागीय अधिकारियों की ओर से जारी नोटिस में भी इसी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। एक कर्मचारी से पूछा गया है कि उसके स्तर से बिल की जांच कर उसे ओके और लॉक किया गया था तो ग्रेड पे में बदलाव कैसे हुआ। वहीं दूसरे कर्मचारी से पूछा गया है कि कटे हुए ग्रेड पे वाले बिल को किस आधार पर लॉक किया गया।

इन सवालों के जवाब मिलने के बाद मामले की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

शिक्षकों को वेतन संबंधी रिकॉर्ड की जांच की सलाह

ऐसे मामलों के बीच शिक्षकों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे अपने वेतन बिल और वेतन संबंधी रिकॉर्ड की भी समय-समय पर जांच करते रहें। ग्रेड पे, मूल वेतन और अन्य भुगतान से जुड़ी जानकारी में कोई अंतर दिखाई दे तो तुरंत संबंधित कार्यालय को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।

वेतन में छोटी सी गलती भी लंबे समय में बड़ा आर्थिक अंतर पैदा कर सकती है। इसलिए शिक्षक अपने वेतन बिल को ध्यान से देखें और किसी भी तरह की विसंगति मिलने पर समय रहते उसका समाधान कराने का प्रयास करें।

अब जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

फिलहाल विभाग की ओर से दो कर्मचारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। दोनों को दो दिन का समय दिया गया है। अब उनके जवाब और प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

विभाग के सामने मुख्य सवाल यही है कि 18 शिक्षकों का ग्रेड पे 4800 रुपये से घटकर 4600 रुपये कैसे दर्ज हुआ। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि बिल की जांच और लॉक करने के दौरान यह गलती क्यों नहीं पकड़ी गई।

यदि जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही साबित होती है तो विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि रिकॉर्ड में तकनीकी या अन्य किसी कारण से बदलाव हुआ है तो उसकी भी स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

फिलहाल इस मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग में वेतन बिल की जांच और उसे लॉक करने की प्रक्रिया पर ध्यान जरूर खींचा है। संबंधित शिक्षक अपने ग्रेड पे और वेतन में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं शिक्षक संघ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय होने तक वह इस मुद्दे को अधिकारियों के सामने उठाता रहेगा।

मुख्य बातें एक नजर में

बिंदु जानकारी
मामला 18 शिक्षकों के ग्रेड पे में कमी
जिला बदायूं
विकास क्षेत्र आसफपुर
पुराना ग्रेड पे ₹4800
दर्ज ग्रेड पे ₹4600
प्रभावित शिक्षक 18
संबंधित कर्मचारी राहुल यादव और शकील अहमद
कार्रवाई दोनों को नोटिस
जवाब की समय सीमा 2 दिन
मांग जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग

इस मामले में अब कर्मचारियों के स्पष्टीकरण के बाद स्थिति और साफ होगी। शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि विभाग जांच के बाद क्या निर्णय लेता है और उनके वेतन से जुड़ी समस्या का समाधान किस तरह किया जाता है।

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