प्री-प्राइमरी के बच्चों को भी मिलेगा समग्र रिपोर्ट कार्ड, बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किया नया फ्रेमवर्क
उत्तर प्रदेश में अब प्री-प्राइमरी यानी बालवाटिका के बच्चों की पढ़ाई और विकास का भी पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को प्री-प्राइमरी शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए नया ECCE Framework जारी किया है। इसमें बच्चों की केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, उपस्थिति और उनके दूसरे विकासात्मक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। इससे अभिभावकों को भी बच्चे की प्रगति को समझने में मदद मिलेगी।
नए फ्रेमवर्क के तहत प्री-प्राइमरी बच्चों के लिए समग्र रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। इसमें बच्चे की learning progress के साथ स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होंगी। विभाग का मानना है कि छोटी उम्र में बच्चों के विकास को केवल किताब और पढ़ाई के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। खेल, गतिविधियों और व्यवहार के माध्यम से बच्चे किस तरह सीख रहे हैं, इसका भी आकलन जरूरी है।
नामांकन बढ़ाने और 70 प्रतिशत उपस्थिति पर जोर
बेसिक शिक्षा विभाग ने प्री-प्राइमरी कक्षाओं में बच्चों का enrollment बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही बच्चों की कम से कम 70 प्रतिशत attendance सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने अधिकारियों को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, शुरुआती वर्षों में बच्चों की नियमित उपस्थिति उनके learning development के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि बच्चा लगातार स्कूल आता है और उसे खेल आधारित गतिविधियों में शामिल किया जाता है, तो उसकी भाषा, समझ, सामाजिक व्यवहार और अन्य skills को विकसित करने में मदद मिलती है। इसलिए विभाग अब pre-primary education में attendance को भी गंभीरता से देख रहा है।
200 मीटर के दायरे वाले आंगनबाड़ी केंद्र स्कूल परिसर में होंगे
नए निर्देशों में आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। परिषदीय विद्यालयों के 200 मीटर के दायरे में गैर-विभागीय भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को विद्यालय परिसर में स्थानांतरित कराया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों के लिए शिक्षा और early childhood care की सुविधाओं को एक ही स्थान पर मजबूत करना है। आंगनबाड़ी और विद्यालय के बीच बेहतर coordination होने से बच्चों के शुरुआती learning experience को और बेहतर बनाया जा सकेगा। इससे अभिभावकों के लिए भी बच्चों से जुड़ी सेवाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
हर जिले में बनेगा 6 सदस्यीय ECCE कोर ग्रुप
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सभी जिलों में Early Childhood Care and Education यानी ECCE का 6 सदस्यीय Core Group गठित किया जाएगा। यह टीम प्री-प्राइमरी शिक्षा की activities और बच्चों के विकास से जुड़े कामों की monitoring में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस core group में जिला समन्वयक, नोडल स्टेट रिसोर्स ग्रुप सदस्य, डायट प्राचार्य द्वारा नामित नोडल प्रवक्ता, बीएसए द्वारा नामित अकादमिक रिसोर्स पर्सन, शिक्षक संकुल सदस्य और बाल विकास परियोजना अधिकारी शामिल होंगे। अलग-अलग विभागों से जुड़े अधिकारियों और शिक्षा विशेषज्ञों के coordination से बच्चों के लिए बेहतर learning environment तैयार करने पर जोर रहेगा।
स्कूलों में बनाए जा रहे चार Learning Corner
प्री-प्राइमरी बच्चों को केवल पारंपरिक तरीके से पढ़ाने के बजाय play-based और child-centred learning को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए स्कूलों में चार Learning Corner स्थापित किए जा रहे हैं।
Learning Corner में बच्चों को अलग-अलग गतिविधियों के जरिए सीखने का अवसर मिलेगा। इस उम्र में बच्चे देखकर, छूकर, खेलकर और गतिविधियों में भाग लेकर अधिक आसानी से सीखते हैं। ऐसे में classroom को बच्चों के लिए ज्यादा interesting और interactive बनाने की कोशिश की जा रही है।
पीएमश्री स्कूलों के बच्चों को मिलेगी Learning Kit और Diary
इसके साथ ही प्रदेश के PM SHRI योजना के प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की learning क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों को निपुण बनाने के उद्देश्य से Student Learning Kit और Diary उपलब्ध कराने की योजना है।
इसके लिए 11.37 करोड़ रुपये का budget स्वीकृत किया गया है। Learning Kit में बच्चों की उम्र और learning level को ध्यान में रखते हुए कई उपयोगी सामग्री शामिल की जाएगी। इसमें worksheets, activity-based material, colorful workbook, drawing sheets, origami paper, ऊन, ribbon और learning dice जैसी सामग्री दी जाएगी।
इन सामग्रियों का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई से जोड़ना और classroom learning को ज्यादा practical बनाना है। जब बच्चा खुद किसी activity में हिस्सा लेता है, तो उसे चीजों को समझने और याद रखने में आसानी होती है। इसी approach के जरिए बच्चों की foundational learning को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
स्कूलों में TLM और शैक्षणिक सामग्री भी खरीदी जाएगी
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी BSA को विद्यालयों में जरूरी teaching-learning material यानी TLM उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों में निपुण लक्ष्य पोस्टर, तालिका पोस्टर, IC सामग्री और साप्ताहिक आकलन ट्रैकर के साथ अन्य जरूरी educational material भी खरीदी जाएगी।
इसके अलावा cardboard, chart paper, sketch pen, abacus, globe, भारत और विश्व के मानचित्र, puppet तथा पशु-पक्षी और transportation charts जैसी सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इसका मकसद बच्चों को classroom में visual और activity-based learning का बेहतर अनुभव देना है।
Learning Kit वितरण का भी रखा जाएगा रिकॉर्ड
बच्चों को दी जाने वाली Learning Kit के वितरण में भी पारदर्शिता रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए Kit वितरण की पंजिका तैयार की जाएगी। इसमें अभिभावक या विद्यार्थी के हस्ताक्षर लिए जाएंगे।
विभाग के निर्देश के अनुसार Learning Kit और Diary का वितरण Parent-Teacher Meeting यानी PTM के दौरान भी किया जा सकता है। इससे अभिभावकों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि बच्चे को किस तरह की learning material दी जा रही है और उसका इस्तेमाल पढ़ाई में कैसे किया जा सकता है।
बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर बढ़ रहा फोकस
उत्तर प्रदेश में अब शुरुआती शिक्षा को केवल स्कूल में प्रवेश तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के overall development से जोड़ने की कोशिश हो रही है। प्री-प्राइमरी स्तर पर समग्र रिपोर्ट कार्ड, Learning Corner, नियमित attendance और ECCE Core Group जैसी व्यवस्थाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
बच्चे की मजबूत नींव आगे की पूरी शिक्षा को प्रभावित करती है। अगर शुरुआती वर्षों में भाषा, गणित, व्यवहार और सीखने की आदत अच्छी तरह विकसित हो जाए, तो आगे की पढ़ाई आसान हो सकती है। यही वजह है कि विभाग अब pre-primary और foundational learning को लेकर ज्यादा structured approach अपना रहा है।
उत्तर प्रदेश में प्री-प्राइमरी बच्चों के लिए जारी किया गया नया ECCE Framework शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा दिखाता है। अब बालवाटिका के बच्चों की प्रगति को केवल पढ़ाई के आधार पर नहीं देखा जाएगा। स्वास्थ्य, उपस्थिति और विकास से जुड़ी जानकारी भी समग्र रिपोर्ट कार्ड में शामिल होगी।
वहीं PM SHRI स्कूलों में Learning Kit, Diary और TLM की उपलब्धता से बच्चों को ज्यादा activity-based learning का अवसर मिलेगा। यदि इन योजनाओं को स्कूल स्तर पर सही तरीके से लागू किया जाता है, तो छोटे बच्चों के लिए classroom learning अधिक रोचक और प्रभावी बन सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआती उम्र में बच्चों को सीखने का बेहतर माहौल मिले, क्योंकि मजबूत नींव ही भविष्य की अच्छी शिक्षा की सबसे बड़ी ताकत होती है।
