प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की पदोन्नति और सेवा निरंतरता के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की पदोन्नति और सेवा निरंतरता के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता

माननीय उच्चतम न्यायालय ने सिविल अपील संख्या 1385/2025 (अंजुमन इशअत-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य) में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की योग्यताओं को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। इस निर्णय ने सेवारत (इन-सर्विस) शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की विधिक स्थिति, पदोन्नति (Promotion) के नियम और नौकरी में बने रहने की शर्तों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

 

1. पदोन्नति के संदर्भ में न्यायालय का स्पष्ट दृष्टिकोण

 

अदालत के समक्ष मुख्य तर्कों में से एक यह था कि निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की धारा 23 में प्रयुक्त “नियुक्ति” (Appointment) शब्द केवल प्रारंभिक/सीधी नियुक्ति पर लागू होता है, पदोन्नति द्वारा नियुक्ति पर नहीं। इसलिए सेवारत शिक्षकों के लिए पदोन्नति हेतु टीईटी आवश्यक नहीं होना चाहिए।

 

उच्चतम न्यायालय ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायालय ने विधिक सिद्धांतों और पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि:

 

‘नियुक्ति’ और ‘भर्ती’ के अंतर्गत आंतरिक स्रोत यानी “पदोन्नति द्वारा नियुक्ति” (Appointment by Promotion) भी पूरी तरह समाहित है।

 

एनसीटीई (NCTE) द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यताएं (जिसमें टीईटी शामिल है) केवल पहली नियुक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पदोन्नति पर भी समान रूप से लागू होती हैं।

पैरा 170 में अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो भी सेवारत शिक्षक पदोन्नति चाहते हैं, चाहे उनकी सेवा अवधि कितनी भी लंबी क्यों न हो, पदोन्नति के विचारार्थ पात्र होने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।

 

पैरा 218 में इसे पुनः दोहराते हुए रेखांकित किया गया कि पदोन्नति चाहने वाले शिक्षकों को टीईटी पास करना ही होगा, अन्यथा उन्हें अपनी उम्मीदवारी पर विचार कराने का भी कोई विधिक अधिकार नहीं होगा।

 

2. सेवा निरंतरता (नौकरी बचाने) और पदोन्नति में अंतर

 

अदालत ने उन वरिष्ठ शिक्षकों की व्यावहारिक कठिनाई को ध्यान में रखा जो आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे और दशकों से पढ़ा रहे हैं। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए सेवा निरंतरता के संदर्भ में दो श्रेणियां बनाईं:

 

जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से कम समय बचा है:

उन्हें बिना टीईटी पास किए अपनी सेवानिवृत्ति तक नौकरी में बने रहने की छूट दी गई है। परंतु, पैरा 216 में यह कड़ा प्रतिबंध लगाया गया कि यदि ऐसा कोई शिक्षक पदोन्नति चाहता है, तो उसे टीईटी उत्तीर्ण किए बिना पात्र नहीं माना जाएगा।

 

जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक समय बाकी है:

उन्हें अपनी नौकरी बचाने के लिए 2 वर्ष का समय दिया गया है कि वे टीईटी उत्तीर्ण कर लें। यदि वे 2 वर्ष में टीईटी पास नहीं करते हैं, तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा। रिव्यू पेटीशन में टीईटी उत्तीर्ण करने की अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष किया गया।

 

3. क्या गैर-टीईटी शिक्षक पूरी पदोन्नति प्रक्रिया को रोक सकते हैं?

 

विधिक व प्रशासनिक रूप से यह स्थिति पूरी तरह साफ है कि गैर-टीईटी शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया को बाधित नहीं कर सकते:

 

3 वर्ष का समय केवल सेवा सुरक्षा के लिए है, पदोन्नति के लिए नहीं: 3 वर्ष की दी गई मोहलत का उद्देश्य शिक्षकों को तत्काल बर्खास्तगी से बचाना और उन्हें न्यूनतम योग्यता अर्जित करने का समय देना है। इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि उन्हें पदोन्नति के नियमों में 3 वर्ष की छूट दी गई है।

 

पदोन्नति के समय पात्रता की अनिवार्यता: सेवा नियमों के अनुसार, जिस तिथि को पदोन्नति की प्रक्रिया (DPC) होती है, उस तिथि को अभ्यर्थी के पास पद की अनिवार्य अर्हता होनी चाहिए। गैर-टीईटी शिक्षक वर्तमान में पदोन्नति के लिए विधिक रूप से “अपात्र” (Ineligible) हैं।

 

योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन नहीं हो सकता: जो शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण हैं और सभी शर्तें पूरी करते हैं, उनके पदोन्नति के अधिकार को केवल इसलिए लंबित नहीं रखा जा सकता कि अन्य शिक्षकों के पास टीईटी पास करने के लिए 2 वर्ष की मियाद बची है। कानून की दृष्टि में अपात्र व्यक्ति इस आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक नहीं लगवा सकते कि वे भविष्य में कभी पात्र हो सकते हैं।

 

माननीय उच्चतम न्यायालय का यह फैसला स्पष्ट करता है कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जहां एक ओर न्यायालय ने मानवीय आधार पर शिक्षकों की आजीविका को 3 वर्ष की मोहलत देकर सुरक्षित किया है, वहीं दूसरी ओर यह अकाट्य रूप से तय कर दिया है कि पदोन्नति केवल और केवल टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों का ही अधिकार है। अतः वर्तमान में होने वाली पदोन्नति प्रक्रिया में टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों की पदोन्नति को रोका नहीं जा सकता।

राहुल पांडे अविचल

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