प्राइमरी शिक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव: डीएलएड-टीईटी अनिवार्य, बीपीएड धारकों को भी मौका
अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के संबद्ध प्राइमरी अनुभाग में शिक्षक भर्ती के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब कक्षा एक से पांच तक के शिक्षकों की भर्ती के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बीटीसी के साथ डीएलएड डिग्री धारकों को भी शिक्षक पद के लिए अर्ह माना गया है।
यह बदलाव एडेड माध्यमिक विद्यालयों के संबद्ध प्राइमरी अनुभाग में होने वाली आगामी शिक्षक भर्तियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए नियमों के अनुसार अब बिना टीईटी पास किए अभ्यर्थी शिक्षक पद की भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा।
संबद्ध प्राइमरी शिक्षक भर्ती में टीईटी अनिवार्य
एडेड माध्यमिक स्कूलों के संबद्ध प्राइमरी अनुभाग में कक्षा एक से पांच तक के शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती अब संशोधित नियमों के अनुसार होगी। शिक्षक पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी को पहले टीईटी उत्तीर्ण होना जरूरी होगा।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से टीईटी को लेकर अपनाए गए सख्त रुख के बाद शिक्षक भर्ती की अर्हता में यह बदलाव किया गया है। इसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जो संबद्ध प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं।
डीएलएड धारकों को भी शिक्षक बनने का मौका
नए प्रावधानों में बीटीसी के साथ डीएलएड डिग्री धारकों को भी शिक्षक पद के लिए अर्ह माना गया है। इससे डीएलएड योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए एडेड स्कूलों के संबद्ध प्राइमरी अनुभाग में रोजगार का अवसर बढ़ेगा।
हालांकि शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता के साथ टीईटी पास होना भी जरूरी रहेगा।
बीपीएड धारकों को भी भर्ती में मौका
एडेड माध्यमिक विद्यालयों में केवल संबद्ध प्राइमरी शिक्षक भर्ती की अर्हता में ही बदलाव नहीं हुआ है, बल्कि प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक पदों की अर्हताओं में भी संशोधन किया गया है।
इंटरमीडिएट स्तर के एडेड माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य पद के लिए परास्नातक (PG) में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक और बीएड की योग्यता जरूरी होगी।
वहीं हाईस्कूल स्तर के एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक पद के लिए भी परास्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ बीएड के अलावा बीपीएड पास अभ्यर्थियों को भी अर्ह माना जाएगा।
इस बदलाव से बीपीएड धारकों के लिए भी प्रधानाध्यापक पद पर भर्ती का रास्ता खुल सकेगा।
28 साल बाद टीजीटी शिक्षकों को प्रधानाचार्य बनने का मौका
एडेड माध्यमिक विद्यालयों में इंटरमीडिएट स्तर के प्रधानाचार्य पद की अर्हता में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। करीब 28 साल बाद प्रशिक्षित स्नातक (TGT/जीटी) शिक्षकों को भी चार वर्ष का अनुभव होने पर प्रधानाचार्य पद पर भर्ती का अवसर मिलेगा।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1998 तक टीजीटी शिक्षकों को यह अवसर मिलता था। अब संशोधित नियमों के तहत निर्धारित अनुभव पूरा करने वाले टीजीटी शिक्षक भी प्रधानाचार्य पद के लिए पात्र हो सकेंगे।
यह बदलाव लंबे समय से प्रधानाचार्य पद की अर्हता का इंतजार कर रहे टीजीटी शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानाध्यापक पद के लिए अनुभव और उम्र की शर्त
हाईस्कूल स्तर के प्रधानाध्यापक पद के लिए भी अर्हता निर्धारित की गई है। इसके लिए अभ्यर्थी के पास कम से कम चार वर्ष का अनुभव होना चाहिए। साथ ही अभ्यर्थी की आयु 30 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
इस प्रकार प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य पदों पर भर्ती के लिए शैक्षिक योग्यता के साथ-साथ अनुभव और आयु संबंधी शर्तों को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है।
प्रदेश में हजारों पद रिक्त
प्रदेश में वर्तमान में कुल 4512 एडेड माध्यमिक विद्यालय बताए गए हैं। इनमें प्रधानाध्यापक के 1172 पद और प्रधानाचार्य के 1475 पद रिक्त बताए गए हैं।
इन रिक्त पदों पर भर्ती के लिए संशोधित अर्हता नियम लागू होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और कार्यरत शिक्षकों को इसका लाभ मिल सकता है।
क्या बदला, एक नजर में
- संबद्ध प्राइमरी अनुभाग में शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी अनिवार्य।
- कक्षा 1 से 5 तक शिक्षक पद के लिए नए नियम लागू होंगे।
- बीटीसी के साथ डीएलएड धारकों को भी अर्ह माना गया।
- इंटरमीडिएट स्तर के प्रधानाचार्य पद के लिए PG में 50% अंक और बीएड जरूरी।
- हाईस्कूल प्रधानाध्यापक पद के लिए PG में 50% अंक जरूरी।
- प्रधानाध्यापक पद के लिए बीएड के साथ बीपीएड धारकों को भी अर्हता।
- चार वर्ष के अनुभव वाले टीजीटी शिक्षकों को प्रधानाचार्य पद का अवसर।
- हाईस्कूल प्रधानाध्यापक पद के लिए न्यूनतम चार वर्ष का अनुभव और 30 वर्ष की आयु निर्धारित।
