शिक्षामित्र की 60 वर्ष में सेवा समाप्ति पर रोक, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश
सुलतानपुर। 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवा समाप्त किए जाने के मामले में शिक्षामित्र ऊषा ओझा को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से राहत मिली है। उनके द्वारा दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया है कि उनके विरुद्ध की जाने वाली किसी भी कार्रवाई रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। कोर्ट के इस आदेश के बाद संबंधित शिक्षामित्र को फिलहाल सेवा में बने रहने का संरक्षण मिल गया है।
यह मामला जनपद सुलतानपुर की शिक्षामित्र ऊषा ओझा से जुड़ा है। उन्होंने अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय के माध्यम से अपनी सेवा समाप्ति के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में हुई। न्यायमूर्ति प्रकाश सिंह ने मामले में आदेश पारित करते हुए याचिनी के हित में अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है।
वर्ष 2006 से शिक्षामित्र के रूप में कर रहीं कार्य
याचिका के अनुसार श्रीमती ऊषा ओझा वर्ष 2006 से प्राथमिक विद्यालय विभारपुर, विकासखंड जयसिंहपुर में शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत हैं। लंबे समय से विद्यालय में अपनी सेवाएं देने के बाद उनकी 60 वर्ष की आयु पूरी होने के आधार पर सेवा समाप्त किए जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित थी।
बताया गया कि 23 नवंबर 2025 को ऊषा ओझा की आयु 60 वर्ष पूरी हो रही थी। इसी आधार पर उनकी सेवा समाप्ति प्रस्तावित की गई थी। इसके खिलाफ उन्होंने न्यायालय का रुख किया और संबंधित शासनादेश को चुनौती देते हुए अपनी सेवा जारी रखने की मांग की।
17 फरवरी 2023 के शासनादेश को दी चुनौती
याचिका में 17 फरवरी 2023 को जारी उस शासनादेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत शिक्षामित्रों की सेवा समाप्ति की आयु 60 वर्ष निर्धारित किए जाने का प्रावधान किया गया था। याचिनी की ओर से न्यायालय के समक्ष सेवा समाप्ति की आयु से जुड़े विभिन्न पहलुओं को रखा गया।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि नियमित सहायक अध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, जबकि शिक्षामित्र भी विद्यालयों में शिक्षण कार्य और विभिन्न शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं। इसी आधार पर 60 वर्ष की आयु में शिक्षामित्रों की सेवा समाप्त किए जाने के प्रावधान को समानता के सिद्धांत से जोड़ते हुए चुनौती दी गई है।
पूर्व के न्यायालयीन फैसलों का भी दिया हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान याचिका में पूर्व में आए उच्च न्यायालयीन निर्णयों का भी उल्लेख किया गया। याचिनी की ओर से न्यायालय के सामने सेवा की निरंतरता और सेवा समाप्ति की आयु से संबंधित कानूनी पहलुओं को रखा गया।
फिलहाल हाईकोर्ट ने इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि याचिनी के विरुद्ध किसी भी प्रकार की कार्रवाई रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। इसका मतलब यह है कि मामले का अंतिम फैसला आने तक याचिनी को न्यायालय की ओर से अंतरिम संरक्षण प्राप्त रहेगा।
विद्यालय में दोबारा कराया गया कार्यभार ग्रहण
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विद्यालय की ओर से श्रीमती ऊषा ओझा को पुनः सेवा ग्रहण करा दी गई है। इसके बाद वह पूर्व की तरह विद्यालय में शिक्षण कार्य कर रही हैं।
इस आदेश से संबंधित शिक्षामित्र को तत्काल राहत मिली है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हाईकोर्ट का यह आदेश इस मामले में अंतिम फैसला नहीं है। रिट याचिका पर आगे होने वाली सुनवाई और अंतिम निर्णय के बाद ही मामले की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
प्रदेश के शिक्षामित्रों की नजर मामले पर
60 वर्ष की आयु में सेवा समाप्ति का मुद्दा लंबे समय से शिक्षामित्रों के बीच चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में ऊषा ओझा के मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम संरक्षण को शिक्षामित्र वर्ग के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई पर शिक्षामित्रों और संबंधित पक्षों की नजर रहेगी। अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि न्यायालय इस मामले में क्या दिशा-निर्देश जारी करता है। फिलहाल ऊषा ओझा को हाईकोर्ट के आदेश के चलते सेवा में बने रहने का संरक्षण प्राप्त है।
