जेल में शिक्षक, स्कूल में लगती रही हाजिरी! 10 महीने तक पोर्टल पर दर्ज होती रही उपस्थिति, निलंबन के बाद भी नहीं रुका मामला

जेल में शिक्षक, स्कूल में लगती रही हाजिरी! 10 महीने तक पोर्टल पर दर्ज होती रही उपस्थिति, निलंबन के बाद भी नहीं रुका मामला

उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि एक शिक्षक कई महीनों तक जेल में निरुद्ध रहा, लेकिन स्कूल के मानव संपदा पोर्टल पर उसकी उपस्थिति दर्ज होती रही। हैरानी की बात यह है कि शिक्षक को निलंबित किए जाने के बाद भी पोर्टल पर उसकी हाजिरी से संबंधित रिकॉर्ड लगातार सामने आता रहा।

मामला उच्च प्राथमिक विद्यालय सांधा से जुड़ा बताया जा रहा है। समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक को दहेज हत्या के मामले में जेल भेजा गया था। इसके बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था में उसकी हाजिरी दर्ज होने का मामला सामने आया है। अब इस पूरे प्रकरण की जांच कराए जाने की बात कही गई है।

क्या है पूरा मामला? जेल में बंद शिक्षक की ऑनलाइन हाजिरी का मामला

प्रकाशित समाचार के मुताबिक, फतेहपुर सीकरी के उच्च प्राथमिक विद्यालय सांधा में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात मनोज कुमार को दहेज हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, वह 6 अक्टूबर 2025 से जेल में निरुद्ध थे।

इस मामले में तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गौड़ की ओर से 27 अक्टूबर 2025 को शिक्षक को निलंबित कर दिया गया था। सामान्य तौर पर ऐसी स्थिति में संबंधित शिक्षक की सेवा स्थिति और उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड को विभागीय स्तर पर सही तरीके से अपडेट किया जाना आवश्यक होता है।

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लेकिन इस मामले में प्रकाशित रिपोर्ट ने एक अलग ही तस्वीर सामने रखी। शिक्षक के जेल में रहने और निलंबित होने के बावजूद मानव संपदा पोर्टल पर उनकी उपस्थिति दर्ज होने का मामला सामने आया है। इससे विद्यालय स्तर पर उपस्थिति लॉक करने की प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अक्टूबर में अनुपस्थित, नवंबर से अगस्त तक दर्ज होती रही उपस्थिति

समाचार रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर 2025 में मानव संपदा पोर्टल पर संबंधित शिक्षक को अनुपस्थित दिखाया गया था। इसके बाद नवंबर 2025 से अगस्त 2026 तक पोर्टल पर उनकी उपस्थिति लॉक किए जाने का मामला सामने आया है।

रिपोर्ट के अनुसार, निलंबन के समय विद्यालय की प्रधानाध्यापिका विमला कुमारी की ओर से मानव संपदा पोर्टल पर अटेंडेंस लॉक किया गया था। इसके बाद नवंबर 2025 से शिक्षक सहित विद्यालय के अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति भी पोर्टल पर दर्ज दिखाई देने लगी।

यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संबंधित शिक्षक जेल में निरुद्ध थे और विभाग की ओर से उनका निलंबन भी किया जा चुका था, तब उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज होती रही? क्या पोर्टल पर शिक्षक की वास्तविक सेवा स्थिति अपडेट नहीं की गई थी या अटेंडेंस लॉक करने की प्रक्रिया में कोई तकनीकी अथवा विभागीय चूक हुई?

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल इस प्रकरण ने मानव संपदा पोर्टल की कार्यप्रणाली और ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था की निगरानी पर चर्चा तेज कर दी है।

वेतन भुगतान को लेकर भी सामने आई अलग-अलग बातें

इस पूरे मामले में शिक्षक के वेतन भुगतान को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। समाचार में प्रधानाध्यापिका विमला कुमारी का पक्ष प्रकाशित किया गया है। उनके अनुसार, संबंधित शिक्षक का वेतन नहीं निकल रहा था और उनकी उपस्थिति भी नहीं लग रही थी।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बिल बाबू की ओर से पोर्टल पर उपस्थिति लॉक करने के लिए कहा गया था। इसके बाद कार्यालय स्तर पर आवश्यक संशोधन को लेकर पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है।

दूसरी ओर, विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर वेतन आहरित किया जा सकता है। ऐसे में यह जांच का विषय बन गया है कि संबंधित शिक्षक की वास्तविक उपस्थिति, पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड और वेतन भुगतान की स्थिति क्या रही।

इस मामले में केवल ऑनलाइन उपस्थिति का रिकॉर्ड देखना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निलंबन आदेश, मानव संपदा पोर्टल की लॉग हिस्ट्री, उपस्थिति लॉक करने वाले कर्मचारी और वेतन से संबंधित अभिलेखों की भी जांच जरूरी होगी।

बीएसए ने दिए जांच के निर्देश, दोषियों पर होगी कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश सिंह ने शिक्षक के जेल में रहने के दौरान पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज किए जाने के पूरे प्रकरण की जांच कराने की बात कही है।

उन्होंने कहा है कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे अब यह उम्मीद की जा रही है कि विभागीय जांच में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षक के निलंबन के बाद मानव संपदा पोर्टल पर उनकी सेवा स्थिति किसने अपडेट की, उपस्थिति किस स्तर से लॉक की गई और संबंधित अधिकारियों को इस मामले की जानकारी कब हुई।

फिलहाल यह मामला ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली की निगरानी और विभागीय जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे प्रकरण में किस स्तर पर लापरवाही हुई और उसकी जिम्मेदारी किन लोगों की बनती है।

महत्वपूर्ण बात: इस खबर में प्रकाशित समाचार रिपोर्ट के आधार पर मामला प्रस्तुत किया गया है। उपस्थिति दर्ज करने, वेतन भुगतान और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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