अनुदेशक को सेवा समाप्ति की चेतावनी, स्कूल में ड्यूटी के बजाय लेखाधिकारी कार्यालय में काम 

अनुदेशक को सेवा समाप्ति की चेतावनी, स्कूल में ड्यूटी के बजाय लेखाधिकारी कार्यालय में काम 

झांसी। सरकारी विद्यालयों में बच्चों को कम्प्यूटर और डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए संविदा पर तैनात किए गए अनुदेशकों की मूल तैनाती को लेकर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। झांसी में एक कम्प्यूटर अनुदेशक के लंबे समय से विद्यालय में कार्यभार ग्रहण न करने और वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय से संबद्ध रहने का मामला सामने आया है। इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सम्बद्धता समाप्त करते हुए अनुदेशक को तत्काल मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।

मामला बबीना विकासखंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय डगरिया रुन्द में तैनात कम्प्यूटर अनुदेशक नीरज कुमार से जुड़ा है। बीएसए के निर्देश के अनुसार उन्हें 7 सितंबर को शाम 4 बजे स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो संविदा सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही उन्हें तत्काल मूल विद्यालय में पहुंचकर अपने दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए गए हैं।

शासन के आदेश के बाद भी कार्यालय से सम्बद्धता

बीएसए के पत्र के अनुसार अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से 21 अक्टूबर 2025 को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि शासन की अनुमति के बिना किसी अध्यापक, अनुदेशक या कर्मचारी को उसके मूल तैनाती स्थल से अन्यत्र सम्बद्ध न रखा जाए। ऐसे सभी सम्बद्धीकरण तत्काल समाप्त कर संबंधित कर्मचारियों को उनके मूल विद्यालय या तैनाती स्थल पर भेजने के निर्देश दिए गए थे।

बताया गया है कि नीरज कुमार 16 जनवरी 2025 को मऊरानीपुर के कम्पोजिट विद्यालय मेंढकी से स्थानांतरित होकर उच्च प्राथमिक विद्यालय डगरिया रुन्द पहुंचे थे। इसके बाद 21 जनवरी 2025 को उन्हें वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया। बाद में तत्कालीन बीएसए ने भी सम्बद्धता समाप्त करते हुए उन्हें मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए थे। विभाग के अनुसार, इन आदेशों के बावजूद उन्होंने विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं किया।

मामला इसलिए है गंभीर

कम्प्यूटर अनुदेशक की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को कम्प्यूटर, डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है। ऐसे में यदि किसी अनुदेशक की लंबे समय तक विद्यालय में उपस्थिति नहीं रहती है और वह किसी अन्य कार्यालय में कार्य करता है, तो इससे संबंधित विद्यालय के बच्चों की कम्प्यूटर शिक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है।

शासन की ओर से विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। इसलिए विभागीय अधिकारियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति जिस उद्देश्य से की गई है, वे उसी स्थान पर अपनी जिम्मेदारी निभाएं। यही वजह है कि बीएसए ने इस मामले में अब सख्त कार्रवाई का रुख अपनाया है।

लेखाधिकारी कार्यालय का भी है अपना पक्ष

वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय की ओर से नीरज कुमार को कार्यमुक्त न करने के पीछे अलग वजह बताई जा रही है। कार्यालय के अनुसार वहां कम्प्यूटर लिपिक की कमी होने के कारण उन्हें सम्बद्ध किया गया था। बताया गया कि शिक्षकों के वेतन, पेंशन और अन्य ऑनलाइन कार्य उनके माध्यम से किए जा रहे थे।

कार्यालय का तर्क है कि यदि उन्हें तत्काल कार्यमुक्त कर दिया जाता है तो शिक्षकों से जुड़े ऑनलाइन कार्य प्रभावित हो सकते हैं और वेतन संबंधी प्रक्रिया में भी परेशानी आ सकती है। हालांकि, दूसरी ओर बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि शासन के स्पष्ट आदेश के बाद बिना अनुमति किसी कर्मचारी को मूल तैनाती स्थल से बाहर सम्बद्ध रखना उचित नहीं है।

अब पूरे मामले में 7 सितंबर को होने वाले स्पष्टीकरण के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। यदि अनुदेशक का जवाब विभाग को संतोषजनक नहीं लगता है तो उनकी संविदा सेवा समाप्त करने की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

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