UP Basic Education Leave Rules 2026: परिषदीय शिक्षकों के लिए CL, मेडिकल, मातृत्व और चाइल्ड केयर लीव के नियम
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं अन्य कर्मचारी विभिन्न प्रकार के अवकाश के पात्र हो सकते हैं। इनमें आकस्मिक अवकाश (Casual Leave), उपार्जित अवकाश (Earned Leave), चिकित्सा अवकाश (Medical Leave), मातृत्व अवकाश (Maternity Leave), गर्भपात अवकाश और बाल्य देखभाल अवकाश (Child Care Leave) प्रमुख हैं।
शिक्षकों के लिए अवकाश से संबंधित नियमों की सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। कई बार अवकाश की अवधि, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और स्वीकृति देने वाले अधिकारी को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है। ऐसे में गलत जानकारी के आधार पर आवेदन करने से शिक्षक को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इस लेख में उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के लिए विभिन्न अवकाशों से संबंधित उपलब्ध जानकारी, महत्वपूर्ण शर्तों और आवेदन करते समय ध्यान रखने योग्य बातों को सरल भाषा में समझाया गया है। ध्यान रखें कि किसी अवकाश की अंतिम पात्रता और स्वीकृति वर्तमान में लागू शासनादेश तथा संबंधित सेवा नियमों के अनुसार ही निर्धारित होगी।
1. आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) के नियम
आकस्मिक अवकाश का उपयोग शिक्षक व्यक्तिगत कार्य, पारिवारिक आवश्यकता या किसी जरूरी काम के लिए कर सकते हैं। इसे सामान्य बोलचाल में CL भी कहा जाता है।
उपलब्ध विभागीय संदर्भों में नियमित कर्मचारियों के लिए प्रति कैलेंडर वर्ष 14 आकस्मिक अवकाश का उल्लेख मिलता है। वहीं शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के लिए अलग-अलग संविदा संबंधी सीमाओं का उल्लेख किया गया है।
आकस्मिक अवकाश के संबंध में मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- नियमित कर्मचारियों के लिए 14 दिन प्रतिवर्ष का प्रावधान उपलब्ध संदर्भों में बताया गया है।
- शिक्षामित्रों एवं अंशकालिक अनुदेशकों की अवकाश सीमा उनकी लागू संविदा शर्तों के अनुसार जांची जानी चाहिए।
- चार दिन तक के अवकाश और चार दिन से अधिक के अवकाश के लिए अलग-अलग सक्षम अधिकारियों का उल्लेख उपलब्ध विभागीय संकलनों में मिलता है।
- आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अवकाश मानव सम्पदा पोर्टल अथवा विभाग द्वारा निर्धारित अन्य प्रक्रिया से प्रस्तुत किया गया है।
आकस्मिक अवकाश के मामले में प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की स्वीकृति संबंधी भूमिका कर्मचारी के पद तथा लागू विभागीय निर्देशों के अनुसार अलग हो सकती है।
इसलिए यह मानकर न चलें कि प्रत्येक शिक्षक को हर परिस्थिति में एक ही अधिकारी से अवकाश स्वीकृत कराना होगा।
2. उपार्जित अवकाश (Earned Leave) के नियम
उपार्जित अवकाश को Earned Leave या EL कहा जाता है। यह आकस्मिक अवकाश से अलग प्रकार का अवकाश है और इसकी पात्रता संबंधित सेवा नियमों पर निर्भर करती है।
उपलब्ध अवकाश संबंधी संकलनों में प्रति सेवा वर्ष एक दिन के उपार्जित अवकाश का उल्लेख मिलता है। हालांकि, इस प्रावधान को सभी प्रकार के परिषदीय कर्मचारियों पर समान रूप से लागू मानने से पहले संबंधित नियम की पुष्टि करना आवश्यक है।
उपार्जित अवकाश के लिए आवेदन करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- अपने पद के लिए लागू अवकाश नियम की जानकारी प्राप्त करें।
- अवकाश खाते में दर्ज पात्रता और उपलब्ध अवधि की जांच करें।
- आवेदन संबंधित सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें।
- स्वीकृति मिलने से पहले अनुपस्थित रहने से बचें, जब तक लागू नियमों में कोई अन्य व्यवस्था न हो।
उपार्जित अवकाश की स्वीकृति और इसकी गणना को लेकर संदेह होने पर संबंधित BSA कार्यालय से लिखित स्पष्टीकरण लेना बेहतर रहेगा।
3. चिकित्सा अवकाश (Medical Leave) के नियम
यदि कोई शिक्षक बीमारी, शारीरिक अस्वस्थता अथवा अन्य चिकित्सकीय कारण से विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सकता, तो लागू सेवा नियमों के अंतर्गत चिकित्सा संबंधी अवकाश के लिए आवेदन किया जा सकता है।
उपलब्ध संदर्भों में नियमित शिक्षकों के लिए पूरे सेवाकाल में अधिकतम 365 दिनों तक चिकित्सा अवकाश का उल्लेख मिलता है। लेकिन इस अवधि को हर प्रकार के कर्मचारी के लिए समान वेतन सहित अवकाश मानना उचित नहीं होगा।
चिकित्सा अवकाश के मामले में निम्नलिखित बातों की जांच जरूरी है:
- कर्मचारी के पद पर कौन-सा अवकाश नियम लागू है।
- चिकित्सा प्रमाणपत्र किस प्रकार के चिकित्सक से बनवाना आवश्यक है।
- कितने दिनों के अवकाश के लिए किस अधिकारी की स्वीकृति जरूरी है।
- अवकाश अवधि के दौरान वेतन अथवा अर्द्ध-वेतन का क्या प्रावधान है।
- लंबी बीमारी की स्थिति में अतिरिक्त अवकाश की पात्रता क्या है।
कुछ उपलब्ध विभागीय संकलनों में 42 दिनों तक के चिकित्सा अवकाश के लिए BEO और इससे अधिक अवधि के लिए BSA की स्वीकृति का उल्लेख मिलता है। इसे वर्तमान में लागू व्यवस्था की पुष्टि किए बिना अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए।
इसी प्रकार, 365 दिनों की अवधि के बाद चिकित्सा परिषद की संस्तुति पर अतिरिक्त अर्द्ध-वेतन अवकाश मिलने के दावे की भी संबंधित सेवा नियमों से पुष्टि आवश्यक है।
4. मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) के नियम
मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारियों के लिए गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित परिस्थितियों में महत्वपूर्ण सुविधा है। उत्तर प्रदेश के सरकारी सेवा नियमों से संबंधित उपलब्ध संदर्भों में पात्र महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए 180 दिनों तक के मातृत्व अवकाश का उल्लेख मिलता है।
इस सुविधा की पात्रता कर्मचारी की सेवा स्थिति और लागू नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए नियमित शिक्षिकाओं तथा संविदा पर कार्यरत महिला कर्मचारियों के नियमों को एक जैसा नहीं मानना चाहिए।
मातृत्व अवकाश के संबंध में ध्यान देने योग्य बातें:
- पात्र महिला कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया से आवेदन प्रस्तुत करें।
- आवेदन के साथ आवश्यक चिकित्सा प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज लगाए जा सकते हैं।
- जीवित बच्चों की संख्या तथा पूर्व में लिए गए मातृत्व अवकाश की जानकारी पात्रता को प्रभावित कर सकती है।
- संविदा पर कार्यरत महिला शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए अलग शासनादेश लागू हो सकते हैं।
मातृत्व अवकाश के लिए दो बच्चों के आधार पर कुल 360 दिनों का दावा करने के बजाय प्रत्येक अवसर की पात्रता और अधिकतम अवधि को लागू नियमों के अनुसार समझना चाहिए।
यह भी ध्यान रखें कि अलग-अलग स्रोतों में मातृत्व अवकाश की कुल अनुमन्य संख्या को लेकर अलग विवरण मिलते हैं। इसलिए किसी पुराने लेख को वर्तमान नियम का प्रमाण न मानें।
5. गर्भपात अथवा गर्भस्राव अवकाश (Abortion Leave)
महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए गर्भपात अथवा गर्भस्राव की स्थिति में भी निर्धारित नियमों के अंतर्गत अवकाश का प्रावधान उपलब्ध है।
उत्तर प्रदेश के सेवा नियमों से संबंधित प्रकाशित संदर्भों में प्रत्येक पात्र अवसर पर छह सप्ताह यानी 42 दिनों तक के अवकाश का उल्लेख मिलता है।
इस अवकाश के लिए सामान्यतः प्राधिकृत चिकित्सक का प्रमाणपत्र आवश्यक हो सकता है। आवेदन करते समय संबंधित नियम में निर्धारित दस्तावेज और स्वीकृति प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
महत्वपूर्ण बातें:
- गर्भपात अथवा गर्भस्राव से संबंधित चिकित्सा प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना पड़ सकता है।
- पात्रता और आवेदन प्रक्रिया संबंधित सेवा नियमों के अनुसार निर्धारित होगी।
- इस अवकाश को कितनी बार लिया जा सकता है, इसकी पुष्टि लागू नियमों से की जानी चाहिए।
इसलिए 42 दिनों की अवधि का उल्लेख करते समय यह स्पष्ट रहना चाहिए कि वास्तविक स्वीकृति संबंधित नियमों और चिकित्सकीय दस्तावेजों पर निर्भर करेगी।
6. चाइल्ड केयर लीव (Child Care Leave) के नियम
चाइल्ड केयर लीव को हिंदी में बाल्य देखभाल अवकाश कहा जाता है। इसका उद्देश्य पात्र महिला सरकारी कर्मचारियों को बच्चों की देखभाल, बीमारी अथवा परीक्षा जैसी विशेष परिस्थितियों में सुविधा प्रदान करना है।
उत्तर प्रदेश के बाल्य देखभाल अवकाश से संबंधित उपलब्ध शासनादेशों के संकलनों में पूरे सेवाकाल में अधिकतम दो वर्ष यानी 730 दिनों तक के अवकाश का उल्लेख मिलता है।
हालांकि, इस अवकाश के लिए कई शर्तें लागू हो सकती हैं।
प्रमुख बिंदु:
- उपलब्ध नियम-संकलनों में यह सुविधा महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए बताई गई है।
- पात्र बच्चों की संख्या और आयु से संबंधित शर्तें लागू हो सकती हैं।
- बच्चे की बीमारी, देखभाल अथवा परीक्षा जैसी परिस्थितियों में निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन किया जा सकता है।
- दिव्यांग बच्चे की स्थिति में संबंधित प्रमाणपत्र और अतिरिक्त शर्तों की आवश्यकता हो सकती है।
- आवेदन के साथ बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र, आवश्यक चिकित्सा दस्तावेज अथवा अन्य निर्धारित प्रमाण लगाए जा सकते हैं।
- अवकाश की स्वीकृति सक्षम अधिकारी और विभागीय आवश्यकताओं के अधीन हो सकती है।
कुछ उपलब्ध संकलनों में एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम तीन बार CCL लेने और एक बार में न्यूनतम 15 दिनों का अवकाश लेने का उल्लेख है। इसलिए एक बार में अधिकतम 30 दिन की सीमा को बिना पुष्टि के सही नहीं मानना चाहिए।
इसी प्रकार, 730 दिनों की अधिकतम अवधि का अर्थ यह नहीं है कि कर्मचारी बिना शर्त अपनी इच्छानुसार किसी भी समय पूरा अवकाश ले सकता है। स्वीकृति के लिए लागू नियमों का पालन जरूरी है।
7. शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के लिए अवकाश
बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों की सेवा शर्तें नियमित शिक्षकों से अलग हो सकती हैं। इसलिए उनके अवकाश संबंधी नियमों की जांच अलग से करना जरूरी है।
उपलब्ध अवकाश संकलन में शिक्षामित्रों के लिए 11 दिन और अंशकालिक अनुदेशकों के लिए 10 दिन के आकस्मिक अवकाश का उल्लेख मिलता है। इन सीमाओं को संबंधित संविदा अवधि और वर्तमान विभागीय निर्देशों से सत्यापित करना चाहिए।
महिला शिक्षामित्रों और महिला अंशकालिक अनुदेशकों के मातृत्व अवकाश के संबंध में भी विभागीय शासनादेश जारी किए गए हैं। ऐसे मामलों में नियमित महिला सरकारी कर्मचारियों पर लागू प्रत्येक नियम स्वतः लागू मान लेना उचित नहीं है।
कर्मचारी को आवेदन करने से पहले अपने नियुक्ति आदेश, संविदा शर्तों और संबंधित शासनादेश की जांच करनी चाहिए।
8. किन अवकाशों की पात्रता की पुष्टि जरूरी है?
कुछ विवरणों में निर्बन्धित अवकाश, प्रतिकर अवकाश और अध्ययन अवकाश को परिषदीय विद्यालयों के कर्मचारियों के लिए अनुमन्य नहीं बताया गया है।
हालांकि, इन तीनों को लेकर एक समान निष्कर्ष निकालने से पहले वर्तमान सेवा नियमों तथा विभागीय निर्देशों की जांच आवश्यक है। अलग-अलग प्रकार के कर्मचारियों और विशेष परिस्थितियों में अलग प्रावधान हो सकते हैं।
इसी तरह, किसी पुराने शासनादेश में उल्लिखित व्यवस्था बाद में संशोधित हुई हो सकती है। इसलिए अवकाश से संबंधित निर्णय लेते समय शासनादेश की तारीख, संशोधन और वर्तमान प्रभावशीलता अवश्य जांचें।
9. अवकाश के लिए आवेदन कैसे करें?
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में अवकाश आवेदन की प्रक्रिया कर्मचारी के पद और लागू विभागीय व्यवस्था के अनुसार निर्धारित होती है।
आवेदन करने से पहले इन चरणों का पालन करना उपयोगी रहेगा:
- सबसे पहले अपने पद के लिए लागू अवकाश नियम की जानकारी प्राप्त करें।
- मानव सम्पदा पोर्टल अथवा निर्धारित माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करें।
- चिकित्सा, मातृत्व या बाल्य देखभाल अवकाश के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र और दस्तावेज संलग्न करें।
- यह सुनिश्चित करें कि आवेदन उचित सक्षम अधिकारी के पास पहुंचा है।
- आवेदन की स्थिति और स्वीकृति की जानकारी सुरक्षित रखें।
- लंबे अवकाश अथवा नियमों से जुड़े विवाद की स्थिति में BEO या BSA कार्यालय से लिखित जानकारी प्राप्त करें।
अवकाश आवेदन प्रस्तुत कर देना और अवकाश स्वीकृत हो जाना दो अलग बातें हैं। इसलिए संबंधित नियमों में दी गई प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
10. अवकाश नियमों की आधिकारिक जानकारी कहां देखें?
अवकाश से संबंधित सही जानकारी प्राप्त करने के लिए विभागीय शासनादेश, लागू सेवा नियम और संबंधित कार्यालय के निर्देशों को प्राथमिकता दें।
उपयोगी संदर्भ:
1. मिशन प्रेरणा एवं बेसिक शिक्षा विभाग का शिक्षक कॉर्नर
विभागीय निर्देशों और उपलब्ध शासनादेशों से संबंधित जानकारी देखने के लिए:
https://prernaup.in/login/teacherscorner
2. उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की अवकाश तालिका
वर्ष 2026 की विद्यालय अवकाश तालिका देखने के लिए:
ध्यान दें कि विद्यालयों की वार्षिक अवकाश तालिका और कर्मचारियों के व्यक्तिगत सेवा-अवकाश नियम अलग विषय हैं। विद्यालय की छुट्टियों की सूची को व्यक्तिगत अवकाश की पात्रता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए आकस्मिक अवकाश, उपार्जित अवकाश, चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश, गर्भपात अवकाश तथा चाइल्ड केयर लीव से संबंधित नियमों की जानकारी होना आवश्यक है।
उपलब्ध संदर्भों में नियमित कर्मचारियों के लिए 14 दिन के आकस्मिक अवकाश, पात्र महिला कर्मचारियों के लिए 180 दिन के मातृत्व अवकाश, गर्भपात अथवा गर्भस्राव की स्थिति में 42 दिन तक के अवकाश और बाल्य देखभाल अवकाश के लिए अधिकतम 730 दिनों का उल्लेख मिलता है। लेकिन इन सभी सुविधाओं की पात्रता, अवधि, वेतन और स्वीकृति की शर्तें कर्मचारी की सेवा स्थिति तथा लागू नियमों पर निर्भर करती हैं।
इसलिए किसी भी अवकाश के लिए आवेदन करने से पहले संबंधित शासनादेश और सेवा नियमों की पुष्टि अवश्य करें। इससे उपस्थिति, वेतन और सेवा संबंधी परेशानियों से बचने में मदद मिलेगी।
महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख उपलब्ध प्रकाशित संदर्भों के आधार पर सामान्य जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे किसी नवीनतम शासनादेश का विकल्प न मानें। अंतिम निर्णय से पहले संबंधित सक्षम अधिकारी अथवा विभागीय कार्यालय से वर्तमान नियमों की पुष्टि करें।
