नसबन्दी ऑपरेशन कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को विशेष आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति, 1981 का आदेश फिर चर्चा में
सरकारी कर्मचारियों के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबन्दी ऑपरेशन कराने पर विशेष आकस्मिक अवकाश (Special Casual Leave) की व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण शासनादेश सामने आया है। उत्तर प्रदेश शासन के कार्मिक अनुभाग-1 की ओर से जारी यह आदेश 1 दिसंबर 1981 का है। इसमें नसबन्दी ऑपरेशन कराने वाले सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ महिला कर्मचारियों के लिए भी विशेष आकस्मिक अवकाश के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

नसबन्दी कराने वाले कर्मचारियों को मिलेगा विशेष आकस्मिक अवकाश
शासनादेश में बताया गया है कि परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत नसबन्दी ऑपरेशन कराने वाले राज्य सरकार के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को निर्धारित शर्तों के अनुसार विशेष आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।
आदेश में कहा गया कि पहले जारी शासनादेश में कुछ संशोधन करते हुए विशेष आकस्मिक अवकाश की गणना और इसे स्वीकृत करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। इसका उद्देश्य परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत ऑपरेशन कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को आवश्यक अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराना है।
केवल कार्य दिवसों के आधार पर होगी अवकाश की गणना
शासनादेश के अनुसार, जो सरकारी कर्मचारी पहली बार वैसेक्टॉमी (Vasectomy) ऑपरेशन कराते हैं, उनके मामले में विशेष आकस्मिक अवकाश की गणना केवल कार्य दिवसों (Working Days) के संबंध में की जाएगी।
अर्थात विशेष आकस्मिक अवकाश की अवधि की गणना करते समय बीच में पड़ने वाले रविवार और राजपत्रित अवकाशों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारी को ऑपरेशन के बाद आवश्यक आराम के लिए निर्धारित कार्य दिवसों का लाभ देना है।
महिला कर्मचारी के लिए भी विशेष व्यवस्था
आदेश में महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। यदि किसी महिला कर्मचारी का पहला ट्यूबेक्टॉमी (Tubectomy) ऑपरेशन असफल हो जाता है और इसके कारण उसे दूसरी बार ट्यूबेक्टॉमी ऑपरेशन कराना पड़ता है, तो निर्धारित चिकित्सा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर दोबारा विशेष आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।
ऐसे मामले में 14 दिनों से अधिक का विशेष आकस्मिक अवकाश पुनः स्वीकृत किए जाने का प्रावधान आदेश में दिया गया है।
आईयूसीडी दोबारा लगवाने पर भी अवकाश का प्रावधान
शासनादेश में उन महिला सरकारी कर्मचारियों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने पहले अन्तर्गर्भाशयी गर्भ निरोधक युक्ति (IUD) अपनाई थी और बाद में उसे पुनः स्थापित कराया है।
ऐसी महिला कर्मचारियों को भी आईयूसीडी की पुनः स्थापना के दिन विशेष आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किए जाने की व्यवस्था की गई है।
ऑपरेशन के बाद परेशानी होने पर अतिरिक्त व्यवस्था
आदेश में नसबन्दी या ट्यूबेक्टॉमी ऑपरेशन के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी ध्यान रखा गया है।
यदि ऑपरेशन के बाद उत्पन्न जटिलताओं के कारण कर्मचारी को अस्पताल में भर्ती रहना आवश्यक नहीं है, तो विशेष आकस्मिक अवकाश की अवधि निर्धारित सीमा के भीतर रखी जानी है। शासनादेश में ऐसे मामलों में क्रमशः 7/14 कार्य दिवसों से अधिक विशेष आकस्मिक अवकाश नहीं दिए जाने की बात कही गई है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ के लिए कर्मचारी को आवश्यक समय मिल सके, लेकिन विशेष आकस्मिक अवकाश की अवधि अनिश्चित न हो।
नियमित अवकाश के साथ जोड़ने पर भी स्पष्ट निर्देश
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत नसबन्दी/नसबन्दी से संबंधित विशेष आकस्मिक अवकाश को नियमित अवकाश अथवा आकस्मिक अवकाश के साथ जोड़ने के संबंध में निर्धारित नियमों का पालन किया जाएगा।
आदेश के अनुसार विशेष आकस्मिक अवकाश को दोनों प्रकार के अवकाशों के साथ मनमाने तरीके से जोड़ने की अनुमति नहीं होगी। बीच में पड़ने वाले अवकाश और रविवारों को भी नियमों के अनुसार ही माना जाएगा।
आदेश में किया गया था संशोधन
उत्तर प्रदेश शासन के कार्मिक अनुभाग-1 द्वारा जारी इस शासनादेश में पहले जारी आदेशों को संशोधित किया गया था। पत्र में कहा गया है कि वर्तमान आदेशों को और उदार बनाए जाने के संबंध में विचार के बाद ये संशोधन किए गए हैं।
शासनादेश दिनांक 1 दिसंबर 1981 को जारी किया गया था। पत्र पर तत्कालीन उत्तर प्रदेश शासन के सचिव मोहन चन्द्र जोशी के हस्ताक्षर हैं।
सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या है खास?
इस पुराने शासनादेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार नियोजन के तहत नसबन्दी ऑपरेशन कराने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश का प्रावधान किया गया था। इसमें पुरुष कर्मचारियों की वैसैक्टॉमी और महिला कर्मचारियों की ट्यूबेक्टॉमी के साथ-साथ कुछ विशेष परिस्थितियों में दोबारा ऑपरेशन और आईयूसीडी से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया था।
यानी 1981 के इस शासनादेश में परिवार नियोजन ऑपरेशन कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश देने की विस्तृत व्यवस्था की गई थी। आदेश में कार्य दिवसों की गणना, रविवार एवं राजपत्रित अवकाशों तथा ऑपरेशन के बाद उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
