आंगनबाड़ी कर्मियों ने उठाई 26 हजार मानदेय व किराया बढ़ाने की मांग, स्थायी कर्मचारी घोषित करने की भी मांग

आंगनबाड़ी कर्मियों ने उठाई 26 हजार मानदेय व किराया बढ़ाने की मांग, स्थायी कर्मचारी घोषित करने की भी मांग

Anganwadi News: आंगनबाड़ी केंद्रों पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों की मांगें एक बार फिर सामने आई हैं। राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और शिशु पालना गृह सहायिकाओं ने अपने मानदेय, किराए और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें अभी तक नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

इसी को लेकर राजस्थान आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी संघ, संबद्ध अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत की ओर से अटरू परियोजना क्षेत्र के बडोरा के माली मोहल्ले में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और शिशु पालना गृह सहायिकाओं की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान संगठन की ओर से सरकार के सामने कई मांगें रखने की बात कही गई।

26 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय की मांग

बैठक में सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम 26 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की रही। संगठन का कहना है कि जब तक आंगनबाड़ी कर्मियों को स्थायी कर्मचारी घोषित करके नियमित नहीं किया जाता, तब तक उन्हें कम से कम 26 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाना चाहिए।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की जिम्मेदारी केवल बच्चों की देखभाल तक सीमित नहीं है। वे बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सरकार की कई welfare schemes को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में संगठन का कहना है कि उनके काम और जिम्मेदारियों को देखते हुए मानदेय में बढ़ोतरी जरूरी है।

स्थायी कर्मचारी घोषित करने की मांग

संगठन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और शिशु पालना गृह सहायिका को स्थायी कर्मचारी घोषित करने की मांग भी उठाई है। संगठन के अनुसार, नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक कर्मचारियों को सम्मानजनक और पर्याप्त मानदेय मिलना चाहिए।

बैठक में कर्मचारियों की service conditions को बेहतर करने और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद भी retirement के समय उन्हें पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलती है। इस वजह से सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन उनके लिए चिंता का विषय बना रहता है।

आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए में बढ़ोतरी की मांग

बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन किराए में महंगाई के अनुसार बढ़ोतरी करने की मांग भी रखी गई। संगठन का कहना है कि समय के साथ मकानों और भवनों का किराया लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पुराने किराए की दरों पर आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करना मुश्किल होता जा रहा है।

खासकर urban areas में किराए की दरें अधिक होने के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती है। संगठन ने मांग की है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए की समीक्षा कर वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार उचित बढ़ोतरी की जाए, ताकि केंद्रों के संचालन में कर्मचारियों को परेशानी न हो।

सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये देने की मांग

आंगनबाड़ी कर्मचारी संगठन ने retirement के समय आर्थिक सहायता की भी मांग की है। संगठन की ओर से कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और शिशु पालना गृह सहायिका को सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दी जानी चाहिए।

इसके साथ ही कर्मचारियों को PF और pension का लाभ देने की मांग भी रखी गई। संगठन का कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को भविष्य के लिए social security मिलना जरूरी है। इससे कर्मचारियों को अपने भविष्य को लेकर आर्थिक भरोसा मिलेगा।

बैठक में पदाधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद

बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष शाहिदा खान ने की। कार्यकर्ता अनीसा बेगम ने बैठक में रखी गई मांगों की जानकारी दी। इस दौरान कोटा से आए अध्यक्ष संतोष शर्मा, गीता मेहरा सहित संगठन के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं मौजूद रहीं।

बैठक में संगठन को मजबूत करने और कर्मचारियों की समस्याओं को प्रभावी तरीके से सामने रखने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। संगठन की ओर से आने वाले समय में कर्मचारियों की मांगों को लेकर आगे की रणनीति तैयार किए जाने की बात कही गई।

कर्मचारियों को सरकार से उम्मीद

आंगनबाड़ी कर्मियों की मांगें केवल मानदेय बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं। इसमें स्थायी कर्मचारी का दर्जा, retirement benefit, PF, pension और केंद्रों के किराए में बढ़ोतरी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार जिम्मेदारी के साथ अपना काम कर रहे हैं और सरकार को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय होता है तो इससे हजारों महिला कर्मचारियों को आर्थिक राहत और भविष्य की सुरक्षा मिल सकती है। लंबे समय से सेवा दे रही इन कर्मियों के लिए मानदेय और social security में सुधार निश्चित रूप से बड़ी राहत साबित होगा।

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