परिषदीय अनुदेशकों के लम्बित मांग के सम्बन्ध में, मुख्यमंत्री को ज्ञापन 

परिषदीय अनुदेशकों के लम्बित मांग के सम्बन्ध में, मुख्यमंत्री को ज्ञापन

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत समस्त अनुदेशक लगभग 14 वर्षों से निष्ठापूर्वक व समर्पण के साथ अध्यापन कार्य कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अनुदेशकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन सभी अनुदेशकों को मूलभुत सुविधाओं का अभाव होने के कारण बड़ी समस्या से जूझ रहें हैं यदि इन सभी अनुदेशकों के मूलभुत सुविधाओं पर बिन्दुवार विचार कर लिया जाए तो इनके लिए यह एक वरदान साबित होगा। जो निम्नलिखित हैं:-

 

1. मा० उच्चतम न्यायालय में सिविल अपील सं०- ‘Arising out of S.L.P. (C) No. 9459 of 2023 तथा ‘Arising out of S.L.P. (C) No. 3331-3334 of 2024 के सन्दर्भ में मा० न्यायलय ने यह निर्णय दिया है कि ‘अनुदेशकों के पदों का सृजन कर स्थायीकरण किया जाए तथा देय बकाए एरियर का भुगतान किया जाए।’

 

2. समस्त अनुदेशकों को 12 माह के वेतन का भुगतान किया जाए।

 

3. दम्पति अनुदेशक को निकटतम विद्यालय में समायोजित/स्थानान्तरित किया जाए तथा 100 या उससे अधिक विद्यार्थियों की संख्या वाले विद्यालयों को स्थानान्तरण नीति में स्थानान्तरण हेतु विकल्प में सम्मिलित किया जाए।

 

4. स्थानान्तरण प्रक्रिया को पूर्णतः ऑफलाइन मोड में पारदर्शी, निष्पक्ष एवं न्यायसंगत बनाया जाए।

 

5. महिला अनुदेशकों को सी०सी०एल० तथा मिसकैरेज अवकाश से आच्छादित किया जाए।

 

6. समस्त अनुदेशकों को प्रत्येक वर्ष 14 आकस्मिक अवकाश एवं चिकित्सा अवकाश से आच्छादित किया जाए।

 

7. अन्य सभी शिक्षकों के सेवावधि के समान अनुदेशकों की भी सेवानिवृत्ति 62 वर्ष कर दी जाए।

अतः आपसे अनुरोध है कि मा० सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का समादर व अनुपालन सुनिश्चित कराते हुए इनकी अन्य मांगों पर उदारतापूर्वक विचार कर ऐतिहासिक निर्णय लेने की कृपा करें।

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