सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: लंबे समय से अस्थायी आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण
नई दिल्ली। लंबे समय से अस्थायी, दैनिक वेतन, संविदा या अन्य अस्थायी आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई है। अदालत ने कहा है कि नियमितीकरण के मामलों में केवल कर्मचारी की सेवा अवधि को ही नहीं देखा जा सकता, बल्कि नियुक्ति की प्रकृति, पद की स्थिति, भर्ती प्रक्रिया और कर्मचारी द्वारा किए गए काम जैसे कई पहलुओं पर भी विचार करना जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सेवा की निरंतरता और समानता के सिद्धांत से जुड़े पहलुओं पर सरकारों की जिम्मेदारी की ओर ध्यान दिलाया है। लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के मामलों को केवल इस आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि उनकी नियुक्ति शुरुआत में अस्थायी आधार पर हुई थी।
केवल 10 या 15 साल की सेवा से नियमितीकरण स्वतः नहीं
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल 10 या 15 साल तक सेवा कर लेने से कर्मचारी को स्वतः नियमितीकरण का अधिकार नहीं मिल जाता। नियमितीकरण के लिए नियुक्ति की परिस्थितियों और उस पद की प्रकृति को भी देखा जाएगा।
यदि कर्मचारी ने लंबे समय तक किसी विभाग या संस्था में लगातार काम किया है और उससे स्थायी प्रकृति का कार्य लिया जा रहा है, तो ऐसे मामले में सरकार को लागू नियमों और परिस्थितियों के अनुसार विचार करना होगा।
नियुक्ति की प्रक्रिया भी होगी महत्वपूर्ण
नियमितीकरण के मामलों में यह देखना भी जरूरी होगा कि कर्मचारी की नियुक्ति किस तरीके से हुई थी। नियुक्ति पूरी तरह अवैध थी या भर्ती प्रक्रिया में केवल कुछ प्रक्रियात्मक कमी रह गई थी, दोनों परिस्थितियों को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
इसी कारण प्रत्येक मामले का फैसला उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना जरूरी है। अदालत की टिप्पणी को सभी अस्थायी कर्मचारियों के स्वतः नियमितीकरण के आदेश के रूप में नहीं देखा जा सकता।
समान काम और समान वेतन का मुद्दा भी अहम
लंबे समय से काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों के मामलों में समान काम के लिए समान वेतन का मुद्दा भी सामने आता रहा है। यदि कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समान या लगभग समान जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े दावों पर भी संबंधित नियमों के अनुसार विचार किया जा सकता है।
हालांकि, समान काम का दावा भी अपने आप नियमित कर्मचारी का दर्जा प्रदान नहीं करता। इसके लिए संबंधित पद, कार्य की प्रकृति, योग्यता और लागू नियमों को देखना आवश्यक होगा।
कर्मचारियों को अपने दस्तावेज सुरक्षित रखने की सलाह
ऐसे कर्मचारियों के लिए नियुक्ति पत्र, सेवा प्रमाण-पत्र, वेतन रिकॉर्ड, उपस्थिति विवरण और विभागीय आदेश जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। लंबे समय से लगातार सेवा का दावा करने वाले कर्मचारियों को अपने सेवा रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना चाहिए।
किसी भी नियमितीकरण या सेवा संबंधी विवाद में अंतिम स्थिति संबंधित विभाग के नियमों, नियुक्ति की प्रक्रिया और मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगी
क्या है इस खबर का मतलब?
इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि लंबी अस्थायी सेवा नियमितीकरण के मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य हो सकती है, लेकिन यह अपने आप नियमितीकरण की गारंटी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ऐसे मामलों में नियुक्ति की प्रकृति, पद की उपलब्धता, भर्ती प्रक्रिया, कर्मचारी की सेवा की निरंतरता और लागू नियमों जैसे पहलुओं का महत्व रहता है।
इसलिए अलग-अलग विभागों में काम कर रहे संविदा, दैनिक वेतन या अन्य अस्थायी कर्मचारियों को अपने मामले को संबंधित सेवा नियमों और वास्तविक नियुक्ति रिकॉर्ड के आधार पर देखना चाहिए। केवल सोशल मीडिया या वायरल खबर के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि सभी अस्थायी कर्मचारियों को स्वतः स्थायी कर्मचारी का दर्जा मिल गया है।
