कम्पोजिट ग्रांट या कुबेर का खजाना? स्कूलों को मिलने वाली राशि खर्च करने में नियमों की अनदेखी पर सवाल

कम्पोजिट ग्रांट या कुबेर का खजाना? स्कूलों को मिलने वाली राशि खर्च करने में नियमों की अनदेखी पर सवाल

लखनऊ। परिषदीय स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई, स्वच्छता और जरूरी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से कम्पोजिट ग्रांट उपलब्ध कराई जाती है। इस राशि का उद्देश्य स्कूल की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करना है। लेकिन कई जगहों पर ग्रांट की राशि के उपयोग और खर्च को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

कम्पोजिट ग्रांट को लेकर सामने आई जानकारी में खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया है कि स्कूलों को मिलने वाली राशि का इस्तेमाल निर्धारित मदों और वास्तविक जरूरतों के अनुसार किया जाना चाहिए। राशि का सही समय पर उपयोग नहीं होने या अनावश्यक रूप से बचाकर रखने से स्कूलों की जरूरी व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।

छात्र संख्या के आधार पर मिलती है कम्पोजिट ग्रांट

स्कूलों में कम्पोजिट ग्रांट की राशि विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर अलग-अलग निर्धारित की जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राशि का एक प्रमुख ढांचा इस प्रकार है—

छात्र संख्या कम्पोजिट ग्रांट
1 से 30 ₹12,500
31 से 100 ₹25,000
101 से 250 ₹50,000
251 से 1000 या अधिक ₹75,000

इस राशि से स्कूल की आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न कार्य कराए जा सकते हैं। इसका मकसद विद्यालय में पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना और जरूरी सुविधाओं को बनाए रखना है।

किन कामों में खर्च की जा सकती है राशि?

कम्पोजिट ग्रांट का इस्तेमाल विद्यालय की आवश्यकता के अनुसार जरूरी सामग्री और व्यवस्थाओं पर किया जाता है। इसमें स्कूल की साफ-सफाई, छोटी-मोटी मरम्मत, शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ी जरूरतें और विद्यालय के रखरखाव से संबंधित खर्च शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, किसी भी मद में खर्च करने से पहले विभागीय नियम और निर्धारित दिशा-निर्देश देखना जरूरी है। विद्यालय स्तर पर उपलब्ध राशि को मनमाने तरीके से खर्च नहीं किया जा सकता।

कम खर्च और अधिक बचत पर उठ रहे सवाल

कम्पोजिट ग्रांट का उद्देश्य केवल खाते में पैसा जमा रखना नहीं है। स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार यह राशि देती है। ऐसे में यदि विद्यालय में साफ-सफाई, जरूरी मरम्मत या शैक्षणिक सामग्री जैसी वास्तविक जरूरतें मौजूद हैं और फिर भी राशि का पर्याप्त उपयोग नहीं होता, तो इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

दूसरी ओर, इसका मतलब यह भी नहीं है कि पूरी राशि किसी भी तरह खर्च कर दी जाए। जरूरत के अनुसार, नियमों का पालन करते हुए और पारदर्शी तरीके से खर्च करना ही महत्वपूर्ण है।

रिकॉर्ड और बिल-वाउचर रखना जरूरी

कम्पोजिट ग्रांट से किए गए खर्च का रिकॉर्ड रखना भी अहम है। संबंधित विद्यालय को खर्च से जुड़े बिल, वाउचर और अन्य आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। विभागीय जांच या ऑडिट के दौरान इन्हीं अभिलेखों के आधार पर खर्च की पुष्टि की जा सकती है।

इसलिए विद्यालयों के लिए केवल ग्रांट प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है। राशि का सही उपयोग, रिकॉर्ड का रखरखाव और पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

स्कूलों में सुविधाएं बेहतर करना है मुख्य उद्देश्य

कम्पोजिट ग्रांट को स्कूलों की रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़कर देखा जाता है। यदि इसका उपयोग सही तरीके से हो तो छोटे-छोटे जरूरी कार्यों के लिए विद्यालयों को अलग से लंबी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ता।

विद्यालय में बच्चों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना, जरूरी सामग्री उपलब्ध कराना और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं को दूर करना इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य है।

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