निषेचन (fertilization);

निषेचन एक प्रक्रिया है जिसमें पुरुष का शुक्राणु महिला के अंडे से मिलता है और गर्भाधान होता है। यह प्रक्रिया प्रजनन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- निषेचन कैसे होता है?: निषेचन आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में होता है जब एक शुक्राणु अंडे से मिलता है। इसके बाद भ्रूण बनता है जो गर्भाशय में जाकर विकसित होता है।
- निषेचन के लिए आवश्यक शर्ते
- निषेचन के लिए सही समय (ओवुलेशन के आसपास), स्वस्थ शुक्राणु, और स्वस्थ अंडा जरूरी है।
- निषेचन और गर्भावस्था: निषेचन के बाद भ्रूण गर्भाशय में विकसित होता है और गर्भावस्था शुरू होती है।
- निषेचन की संभावना: निषेचन की संभावना ओवुलेशन के समय सबसे ज्यादा होती है। ओवुलेशन के आसपास के दिनों में गर्भाधान की संभावना अधिक होती है।
- निषेचन में समस्याएं: कुछ जोड़ों को निषेचन में समस्याएं हो सकती हैं जैसे शुक्राणु की कमी, अंडे की समस्या, या फैलोपियन ट्यूब में रुकावट। इनके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
- निषेचन और प्रजनन तकनीक: कुछ मामलों में आईवीएफ (IVF) जैसी प्रजनन तकनीक का उपयोग निषेचन में मदद के लिए किया जाता है।
- निषेचन के बाद क्या होता है?: निषेचन के बाद भ्रूण गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है और गर्भावस्था शुरू होती है। इसके बाद भ्रूण विकसित होता है।
- निषेचन की पुष्टि: गर्भावस्था की पुष्टि आमतौर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट से की जाती है जो एचसीजी (hCG) हार्मोन का पता लगाता है।
- निषेचन और स्वास्थ्य: निषेचन और गर्भावस्था के दौरान महिला का स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण है। डॉक्टर की सलाह और नियमित जांच जरूरी है।
- निषेचन की समय सीमा: निषेचन आमतौर पर ओवुलेशन के बाद 24 घंटे के अंदर होता है क्योंकि अंडा ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहता।
- निषेचन के लिए तैयारी: स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, और तनाव कम करना निषेचन की संभावना बढ़ा सकते हैं।
- निषेचन और उम्र: उम्र का प्रभाव निषेचन पर पड़ता है। महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ निषेचन की संभावना कम हो सकती है।
- प्राकृतिक निषेचन: यह सबसे आम तरीका है जहां यौन संबंध के दौरान शुक्राणु अंडे से मिलता है।
- सहायता प्राप्त निषेचन: इसमें आईवीएफ (IVF), आईयूआई (IUI) जैसी तकनीकें शामिल हैं जो निषेचन में मदद करती हैं जब प्राकृतिक तरीके से निषेचन में समस्या होती है।
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यह दो प्रकार का होता है-
- आंतरिक निषेचन
- बाहरी या बाह्य निषेचन
आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization)-

अब निषेचन मावा के शरीर के अंदर होता है, उसे आंतरिक निषेचन कहते हैं
दूसरे शब्दों में, आंतरिक निषेचन तब होता है, अब नर व मादा युग्मको का संयोजन मादा के शरीर के अंदर होता है। मनुष्यों में जाइगोट (Zygote) माँ के शरीर में शिशु के रूप में वृद्धि करता है। माँ के शरीर में शिशु के पूरी तरह विकसित हो जाने के बाद ही वह उसे जन्म देती है।
मनुष्यों के समान जंतुओं में भी आंतरिक निषेचन होता है। लेकिन कुछ में जन्म देने की प्रक्रिया थोड़ी-सी अलग होती है। पक्षी जैसे अंडा देने वाले जंतु निषेचित अंडों को ऊष्मा देने के लिए अर्थात् उसको सेने के लिए उन पर एक निश्चित समयान्तराल के लिए लंबे समय तक बैठते हैं। सेने के इस समय में प्रत्येक अंडे में उपस्थित युग्मक विकसित होता हुआ व वृद्धि करता हुआ नए पक्षी का आकार ले लेता है। कुछ दिनों के बाद अंडे टूट जाते हैं और पक्षी बाहर आता है। एक समय में विभिन्न स्तनधारी (Mammals) विभिन्न अंडे पैदा करते हैं।
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बाह्य निषेचन (External Fertilization)-

ब्राह्य निषेचन मादा के शरीर के बाहर होता है, अन्य शब्दों में, इसमें युग्मनजों का संयोजन शरीर के बाहर होता है। मेंढक व मछली इसके अच्छे उदाहरण हैं।
वर्षाकाल में वर्षा होने के दौरान मेंढक तालाब, नदी व नालों की ओर चले जाते हैं। जल में मादा व नर मेंढक के एक साथ होने के बाद मादा लगभग 100 अंडे त्यागती है। इन अंडों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए इनके चारों ओर जैली की एक परत होती है। इन त्यागे हुए अंडों पर नर मेंढक अपने शुक्राणु छोड़ता है। प्रत्येक शुक्राणु अपनी लंबी पूँछ की सहायता से तैरता हुआ अंडों के संपर्क में आता है, और इस प्रकार निषेचन हो जाता है।
मछली व मेंढक 100 अंडे क्यों त्यागते हैं जबकि मुर्गी एक बार में एक ही अंडा त्यागती हैं?
मछली व मेंढक 100 अंडे त्यागते हैं, व करोड़ों शुक्राणु छोड़ते हैं, सभी अंडे निषेचित होकर संतति में विकसित नहीं होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अंडे व शुक्राणु जल की गति, हवा व वर्षा में घुल जाते हैं। तालाब में अन्य जानवर भी होते हैं, जो इन अंडों को खा जाते हैं। अतः अंडों व शुक्राणुओं की अधिकता आवश्यक है ताकि उनमें से कुछ निषेचित हो सकें।
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