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HOW DID A,B,C,D START?:कैसे शुरू हुई A,B,C,D आओ इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करें

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HOW DID A,B,C,D START?:कैसे शुरू हुई A,B,C,D आओ इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करें

कैसे शुरू हुई ‘ए बी सी डी’:

बच्चो, जब तुम पहली बार स्कूल गए होगे, तो एबीसीडी पढ़ना सिखाया गया होगा, जिसे अल्फाबेट कहा जाता है। लेकिन क्या तुम्हें पता है कि इसकी शुरुआत कैसे हुई?

तुम्हें स्कूल में भले ही एबीसीडी एक सीक्वेंस में पढ़ाई जाती है, लेकिन शुरुआत में यह ऐसी नहीं थी।

क्या तुमने कभी यह जानने की कोशिश की कि आखिर ये ‘ए बो सी डी’ आई कहां से?

हम रोज इन अक्षरों को पढ़ते हैं. लिखते हैं और गुनगुनाते हैं, लेकिन इनकीशुरुआत की कहानी बहुत ही लंबी और मजेदार है। लगभग पांच हजार साल पहले, मिस्र में लोग लिखने के लिए आज जैसी लिपि का इस्तेमाल नहीं करते थे। वे दीवारों, पत्थरों, कागज और पत्तियों पर ‘चित्र’ बनाते थे। इन चित्रों को ‘हाइरोग्लिफ्स’ कहा जाता था। उदाहरण के लिए अगर उन्हें ‘मोर’ लिखना होता, तो वे मोर का चित्र बना देते। अगर ‘सूरज’ लिखना हो तो सूरज बना देते। चीजों को समझने का यह तरीका सुंदर तो था, लेकिन मुश्किल भी था। हर चीज का अलग चित्र यादरखना आसान नहीं था। सोचो अगर तुम्हें ‘किताब’ लिखनी हो और हर बार किताब का चित्र बनाना पड़े तो कितना समय लगेगा।

फोनीशियन का कमाल:

मिस आने-जाने वाले ‘फोनीशियन व्यापारी’ (आज का लेबनान, सीरिया और इसाइल क्षेत्र) ने देखा कि मिस के लोगों के लिखने का तरीका बहुत कामका है। इससे थोड़ा हटकर उन्होंने एक नया उपाय निकाला। उन्होंने यह निश्चय किया कि अब वे चित्रों से नहीं, ध्वनियों से लिखेंगे। यानी अगर शब्द ‘मां’ है, तो वे ‘म’ को आवाज दिखाने के लिए एक चिन्ह बनाएंगे और ‘आ’ की आवाज दिखाने के लिए दूसरा। इस तरह सबसे पहला ‘अल्फाबेट’ बना, जिसमें सिर्फ व्यंजन थे।

‘ए बी सी डी’ की शुरुआत लैटिन वर्णमाला से हुई, जो फोनीशियन और ग्रीक लिपियों से विकसित हुई। यह प्रक्रिया हजारों वर्षों में संचार कीआवश्यकताओं और सभ्यताओं के मेल-जोल से हुई।

यूनानियों का योगदान:

कुछ सौ साल बाद यूनान के लोग इस अल्फाबेट को लेकर आए। उन्हें समझ आया कि सिर्फ व्यंजनों से काम नहीं चलेगा, क्योंकि बोलने में तो स्वर मानी ए ई आई ओ यू भी जरूरी होते हैं। तो यूनानियों ने अल्फाबेट में स्वरों को जोड़ा। इसके बाद लिखना-पढ़ना और आसान हो गया।

रोमन्स ने दिया हमें ए से जेड:

यूनानियों के बाद ‘रोमन’ आए। उन्होंने यूनानी अधरों को, अपनी भाषा लैटिन के हिसाब से बदल लिया। धीरे-धीरे यही लैटिन अधर ‘ए बी, सी, डी से लेकर जेड’ तक बन गए। रोमन्स ने अपना साम्राज्य बहुत जगहों पर फैलाया, यूरोप, अफ्रीका और एशिया तक। उनके साथ-साथ उनका अल्फाबेट भी फैलता चला गया।

गायब और नए अक्षर:

अल्फाबेट आज जैसा नहीं था। उसमें ‘जे’ और ‘डब्ल्यू’ जैसे अधर नहीं थे। जनवरी को ‘लानुएरियस’ लिखा जीता था। ‘डब्ल्यू’ को बाद में मिडिल एज में जोड़ा गया। और ‘जे’ को यूरोप में पुनर्जागरण काल यानी लगभग 500 साल पहले जोड़ा गया। बदलते समय के साथ अल्फाबेट आज अंग्रेजी का अल्फाबेट 26 अक्षरों का है। लेकिन याद रखो, यह हमेशा से ऐसा नहीं था और भविष्य में यह बदल भी सकता है, क्योंकि भाषाएं नए-नए शब्द अपनाती रहती हैं।

और अधिक जानकारी प्राप्त करें :रोमन्स ने दिया हमें ए से जेड,मानव मस्तिष्क, मस्तिष्क और भावनाएं

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